आचार संहिता तोड़ने संबंधी आयोग के कई फैसलों पर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा असहमति जता चुके हैं
चुनाव आयोग में भी मतभेद सामने आने लगे हैं. आचार संहिता तोड़ने संबंधी आयोग के कई फैसलों पर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा असहमति जता चुके हैं. लवासा ने मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को पत्र लिखकर कहा है कि आयोग के फैसलों में आयुक्तों के बीच उठे मतभेद को भी आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल किया जाए.
अशोक लवासा अगले मुख्य चुनाव आयुक्त बनने की कतार में हैं. सूत्रों के मुताबिक लवासा आचार संहिता उल्लंघन की शिकायतों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को क्लीन चिट और विरोधी दलों के नेताओं को नोटिस थमाए जाने के खिलाफ रहे हैं. लवासा आयोग की बैठकों में भी शामिल नहीं हो रहे हैं. चुनाव आयोग में तीन चुनाव आयुक्त हैं.देश के मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने 2 दिसंबर 2018 को सीईसी का पदभार संभाला था. उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत की जगह संभाली थी. सुनील अरोड़ा भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1980 बैच के राजस्थान कैडर के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं. बतौर चुनाव आयुक्त अरोड़ा की नियुक्ति 31 अगस्त 2017 को हुई थी. राजस्थान में प्रशासनिक सेवा के दौरान विभिन्न जिलों में तैनाती के अलावा 62 वर्षीय अरोड़ा ने केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रसारण सचिव और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय में सचिव के रूप में कार्य किया. सुनील अरोड़ा वित्त और कपड़ा मंत्रालय एवं योजना आयोग में विभिन्न पदों पर रहे हैं. 1993 से 1998 तक राजस्थान में भाजपा के सीएम भैरो सिंह शेखावत के सचिव और 2005 से 2008 तक सीएम वसुंधरा राजे के प्रधान सचिव भी थे. सुनील अरोड़ा का जन्म 13 अप्रैल 1956 को पंजाब के होशियारपुर में हुआ था. शुरुआती शिक्षा होशियारपुर के विद्या मंदिर स्कूल और दयानंद मॉडल स्कूल से हुई. फिर डीएवी और वहां से डीएवी कॉलेज होशियापुर से ग्रेजुएशन की. फिर पंजाब यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी से एमए किया. सुनील के पिता भारतीय रेलवे में काम करते, जबकि मां होशियारपुर के ही डीएवी कॉलेज में पढ़ाती थीं. सुनील अरोड़ा आईएएस की नौकरी के दौरान राजस्थान के धौलपुर, अलवर, नागौर और जोधपुर जैसे जिलों में तैनात रह चुके हैं. सुनील ने राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क, उद्योग एवं निवेश विभागों में भी सेवाएं दी हैं. पांच साल तक इंडियन एयरलाइंस के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भी रह चुके हैं.अशोक लवासा ने 23 जनवरी 2018 को भारत के चुनाव आयुक्त का पदभार संभाला. उन्हें 21 जनवरी 2018 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नियुक्त किया था. लवासा ने ओम प्रकाश रावत का स्थान लिया था, जो मुख्य चुनाव आयुक्त बनाए गए थे. बतौर चुनाव आयुक्त लवासा का कार्यकाल अक्टूबर 2022 तक चलेगा. इसके बाद उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया जाएगा. अशोक लवासा का जन्म 21 अक्टूबर 1957 को हुआ था. लवासा 1980 बैच के हरियाणा कैडर के आईएएस हैं. लवासा इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्रालय में वित्त सचिव थे. वे 31 अक्टूबर 2017 को पद से सेवानिवृत्त हुए. लवासा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से इंग्लिश ऑनर्स और साउदर्न क्रॉस यूनिवर्सिटी साउथ वेल्स से एमबीए हैं. अपने 37 के सेवाकाल के दौरान प्रधान सचिव और वित्तीय आयुक्त , मुख्य समन्वयक , हरियाणा के रेजिडेंट आयुक्त, एचएसआईडीसी के निदेशक, केंद्रीय वित्त सचिव, केंद्रीय नागर विमानन सचिव एवं कई अन्य पद पर रहे. यूपीए शासन में पर्यावरण मंत्रालय पर बहुत सुस्त और भ्रष्ट होने का आरोप लगा था. अशोक लवासा ने अप्रूवल्स के लिए पर्यावरण मंत्रालय में पड़े आवेदनों के अंबार को कम किया. फोटोग्राफी के शौकीन लवासा ने An Uncivil Servant नाम की किताब भी लिखी है.सुशील चंद्रा चुनाव आयोग के तीसरे चुनाव आयुक्त हैं. इससे पहले सुशील चंद्रा सीबीडीटी के चेयरमैन थे. सुशील चंद्रा 2016 में ही रिटायर हो चुके थे, लेकिन उनका कार्यकाल 2016 से दो बार बढ़ाया जा चुका है. सीबीडीटी में सुशील चंद्रा का बतौर अध्यक्ष कार्यकाल मई, 2019 में खत्म हो रहा था. एक नवंबर, 2016 में सीबीडीटी अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करने के बाद यह उनका दूसरा सेवा विस्तार है. चंद्रा आईआईटी स्नातक व 1980 बैच के भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी हैं. टीएस कृष्णमूर्ति के बाद चंद्रा दूसरे ऐसे आईआरएस अफसर हैं, जिन्हें चुनाव आयुक्त बनाया गया है. कृष्णमूर्ति को 2004 में मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया गया था. चुनाव आयोग में सुशील चंद्रा की नियुक्ति का कारण उनकी कराधान और जांच में विशेषज्ञता होना है. इससे पहले भी वह आयकर विभाग में विभिन्न पदों पर कार्यरत रह चुके हैं. चंद्रा ने रुड़की विश्वविद्यालय से बीटेक, देहरादून से एलएलबी किया था. वह उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात और मुंबई में सेवारत रहे. वह दिल्ली में आयकर अंतरराष्ट्रीय कराधान के कमिश्नर भी रह चुके हैं.
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