जरूरत की खबर- इमर्शन रॉड से बच्ची की मौत: जानें इसका रिस्क, इस्तेमाल के दौरान बरतें 13 सावधानियां, खरीदते ह...

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जरूरत की खबर- इमर्शन रॉड से बच्ची की मौत: जानें इसका रिस्क, इस्तेमाल के दौरान बरतें 13 सावधानियां, खरीदते ह...
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UP Hathras 3 Year Old Girl Water Heating Rod Death Case Explained; Follow Immersion Rod Precautions, Safety Tips Details On Dainik Bhaskar.

जानें इसका रिस्क, इस्तेमाल के दौरान बरतें 13 सावधानियां, खरीदते हुए 8 बातें ध्यान रखेंमें नहाने से लेकर बर्तन और कपड़े धोने तक, हर काम के लिए हल्के गर्म पानी की जरूरत होती है। इसके लिए बहुत से लोग अपने घरों में इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि यह गीजर की तुलना में बेहद सस्ता होता है। हालांकि इमर्शन रॉड के इस्तेमाल में थोड़ी-सी लापरवाही भी खतरनाक साबित हो सकती है। हाल ही में यूपी के हाथरस जिले के नगला चौबे गांव में इमर्शन रॉड से करंट लगने से 3 साल की बच्ची की मौत हो गई। खेलते समय बच्ची ने रॉड के तारों को खींच लिया था, जिससे उसे जोर का झटका लगा। अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। इसके पहले देवरिया में इमर्शन रॉड से पानी गर्म करते समय करंट की चपेट में आने से महिला की मौत हो गई थी। हर साल सर्दियों में ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जहां इमर्शन रॉड के गलत इस्तेमाल से लोगों की जान चली जाती है। हालांकि कुछ जरूरी सावधानियां बरतकर इसके खतरे से बचा जा सकता है।इमर्शन रॉड से किस तरह के खतरे हो सकते हैं?एक्सपर्ट: शशिकांत उपाध्याय, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर, अहमदाबादइमर्शन रॉड एक पोर्टेबल इलेक्ट्रिक वाटर हीटर है, जो स्टेनलेस स्टील या कॉपर के हीटिंग एलिमेंट से बना होता है। यह एक लंबे छड़ जैसा होता है, जिसका एक सिरा प्लग से जुड़ता है और दूसरा पानी में डुबोया जाता है। जब इसे 220V के घरेलू सॉकेट में प्लग इन किया जाता है तो हीटिंग कॉइल में करंट बहने लगता है, जो रेजिस्टेंस के कारण गर्म हो जाता है। मार्केट में 500-1500 रुपए में उपलब्ध ये रॉड 1000-1500 वाट की पावर से पानी को 5-10 मिनट में गर्म कर देता है। लेकिन याद रखें, यह रॉड पानी में ही काम करता है। हवा में छोड़ने से ओवरहीटिंग हो सकती है।इसका सबसे बड़ा खतरा इलेक्ट्रिक शॉक है। अगर रॉड डैमेज हो या गीली सतह पर यूज हो तो करंट लग सकता है, जो हार्ट अटैक या मौत का कारण बनता है। ओवरहीटिंग से बर्न इंजरी हो सकती है। इसके अलावा रॉड को बिना पानी के चलाने पर हीटिंग कॉइल जल सकती है। मेटल की बाल्टी में इस्तेमाल करने पर करंट लग सकता है। नीचे दिए ग्राफिक से इसके संभावित खतरों को समझिए-इमर्शन रॉड के इस्तेमाल के दौरान कुछ छोटी-छोटी सावधानियां बरतकर हादसों से बचा जा सकता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-अगर गलती से किसी को करंट लग जाए तो सबसे पहले बिजली का मेन स्विच बंद करें। कभी भी व्यक्ति को सीधे हाथ लगाकर छुड़ाने की कोशिश न करें। इसके लिए लकड़ी की छड़ी या प्लास्टिक पाइप का इस्तेमाल करें। अगर व्यक्ति बेहोश है या सांस नहीं ले रहा है तो तुरंत सीपीआर दें और एम्बुलेंस बुलाएं। करंट के झटके से दिल की धड़कन रुक सकती है, इसलिए तुरंत मेडिकल हेल्प लेना जरूरी है। जल्दी एक्शन से जान बच सकती है।इमर्शन रॉड खरीदते समय केवल सस्ती कीमत देखकर फैसला न लें। सुरक्षा, टिकाऊपन और क्वालिटी सबसे अहम हैं। इसलिए खरीदने से पहले कुछ चीजों की जांच जरूर करें।यह सुरक्षा मानकों का प्रतीक है। ISI मार्क वाले रॉड शॉकप्रूफ होते हैं और इलेक्ट्रिक सेफ्टी की गारंटी देते हैं।वायर बहुत पतली या ढीली न हो। खराब वायरिंग से शॉर्ट सर्किट और करंट का रिस्क बढ़ता है।घरेलू जरूरतों के लिए 1000 से 1500 वॉट तक की रॉड पर्याप्त रहती है। इससे बिजली की खपत भी ज्यादा नहीं होती है।कॉपर या स्टेनलेस स्टील से बनी रॉड सबसे टिकाऊ और सुरक्षित होती है। आयरन रॉड जल्दी जंग खा जाती है।इससे आसानी से पता चलता है कि रॉड चालू है या नहीं, जिससे ओवरहीटिंग या जलने का खतरा कम होता है।हमेशा थ्री-पिन प्लग और वाटरप्रूफ हैंडल वाली रॉड चुनें। ये सुरक्षा के लिहाज से जरूरी हैं।कम-से-कम 1–2 साल की वारंटी वाली रॉड लें। सस्ते या बिना ब्रांड वाले रॉड न खरीदें क्योंकि इनमें वायरिंग कमजोर होती है और करंट लगने का जोखिम ज्यादा रहता है।अमेजन या फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजर रिव्यू देखकर समझें कि प्रोडक्ट कितना भरोसेमंद है। ध्यान रखें थोड़ी सी सतर्कता आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।इमर्शन रॉड की सही मेंटेनेंस उसकी लाइफ और परफॉर्मेंस दोनों बढ़ाती है। हर 10-15 दिनों में रॉड की कॉइल पर जमी सफेद परत साफ करें। इसके लिए विनेगर या नींबू के रस का इस्तेमाल करें। इसमें 20 मिनट तक भिगोकर रखें, फिर ब्रश से साफ करें। रॉड को कभी भी गीली हालत में स्टोर न करें। वायर और प्लग की जांच करते रहें कि कहीं क्रैक या ढीलापन न हो।नहीं, कभी नहीं। इमर्शन रॉड ऑटो-कट नहीं होता, इसलिए उसे बिना निगरानी के छोड़ना बेहद खतरनाक है।बिल्कुल नहीं। पहले रॉड को पानी में पूरी तरह डुबोएं। इसके बाद ही स्विच ऑन करें और पानी का टेम्परेचर देखने से पहले प्लग निकालें।नहीं, मेटल बिजली को आसानी से पास होने देता है। इससे करंट लगने का खतरा होता है।हां, लेकिन सावधानी के साथ। अगर रॉड ज्यादा गर्म हो गया तो बाल्टी पिघल सकती है या कॉइल जल सकती है।बाल्टी कम-से-कम 300mm गहरी होनी चाहिए और पानी का स्तर हमेशा रॉड पर दिए मैक्स लेवल मार्क से ऊपर नहीं जाना चाहिए।सबसे पहले देखें कि हीटिंग कॉइल पर स्केल या जंग तो नहीं जमी है। जरूरत हो तो उसे साफ करें या पुराना हो गया हो तो रॉड बदल दें।इमर्शन रॉड एक विंटर सीजन में इस्तेमाल कर सकते हैं। दूसरे सीजन में इस्तेमाल से पहले एक बार टेक्नीशियन से चेक कराना जरूरी है।जरूरत की खबर- सर्दियों में जल्दी सूखते नहीं कपड़े: बढ़ता फंगल इन्फेक्शन, हाइपोथर्मिया का रिस्क, ठंड में कपड़े सुखाने के 15 हैक्स सर्दियों में कपड़े सुखाना मुश्किल काम है। इन मौसम में धूप कम निकलती है, हवा में नमी रहती है और दिन छोटे हो जाते हैं। ऐसे में धोए हुए कपड़े कई बार आधे गीले रह जाते हैं और उनमें बदबू या फंगस लगने लगती है।फ्रूट ड्रिंक्स पर ORS का लेबल, FSSAI सख्त, खरीदते हुए लेबल पढ़ें, 6 बातें ध्यान रखेंइन 11 संकेतों से पहचानें, स्वस्थ रहने के लिए डाइट में शामिल करें ये चीजेंसर्दियों में सेहत का रखें ख्याल, डॉक्टर से जानें बचाव की 15 जरूरी टिप्सप्रयागराज में कंगना रनोट के कार्यक्रम में भीड़ बेकाबूसीकर में 24 घंटे बाद फिर बढ़ेगी सर्दीकंगना रनोट और क्रिकेटर सुरेश रैना आज प्रयागराज में2 दिनों बाद बढ़ेगी ठंड, 3 डिग्री तक गिरेगा पाराउत्तर-पश्चिमी हवाओं से झारखंड में मौसम शुष्क.

जानें इसका रिस्क, इस्तेमाल के दौरान बरतें 13 सावधानियां, खरीदते हुए 8 बातें ध्यान रखेंमें नहाने से लेकर बर्तन और कपड़े धोने तक, हर काम के लिए हल्के गर्म पानी की जरूरत होती है। इसके लिए बहुत से लोग अपने घरों में इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि यह गीजर की तुलना में बेहद सस्ता होता है। हालांकि इमर्शन रॉड के इस्तेमाल में थोड़ी-सी लापरवाही भी खतरनाक साबित हो सकती है। हाल ही में यूपी के हाथरस जिले के नगला चौबे गांव में इमर्शन रॉड से करंट लगने से 3 साल की बच्ची की मौत हो गई। खेलते समय बच्ची ने रॉड के तारों को खींच लिया था, जिससे उसे जोर का झटका लगा। अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। इसके पहले देवरिया में इमर्शन रॉड से पानी गर्म करते समय करंट की चपेट में आने से महिला की मौत हो गई थी। हर साल सर्दियों में ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जहां इमर्शन रॉड के गलत इस्तेमाल से लोगों की जान चली जाती है। हालांकि कुछ जरूरी सावधानियां बरतकर इसके खतरे से बचा जा सकता है।इमर्शन रॉड से किस तरह के खतरे हो सकते हैं?एक्सपर्ट: शशिकांत उपाध्याय, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर, अहमदाबादइमर्शन रॉड एक पोर्टेबल इलेक्ट्रिक वाटर हीटर है, जो स्टेनलेस स्टील या कॉपर के हीटिंग एलिमेंट से बना होता है। यह एक लंबे छड़ जैसा होता है, जिसका एक सिरा प्लग से जुड़ता है और दूसरा पानी में डुबोया जाता है। जब इसे 220V के घरेलू सॉकेट में प्लग इन किया जाता है तो हीटिंग कॉइल में करंट बहने लगता है, जो रेजिस्टेंस के कारण गर्म हो जाता है। मार्केट में 500-1500 रुपए में उपलब्ध ये रॉड 1000-1500 वाट की पावर से पानी को 5-10 मिनट में गर्म कर देता है। लेकिन याद रखें, यह रॉड पानी में ही काम करता है। हवा में छोड़ने से ओवरहीटिंग हो सकती है।इसका सबसे बड़ा खतरा इलेक्ट्रिक शॉक है। अगर रॉड डैमेज हो या गीली सतह पर यूज हो तो करंट लग सकता है, जो हार्ट अटैक या मौत का कारण बनता है। ओवरहीटिंग से बर्न इंजरी हो सकती है। इसके अलावा रॉड को बिना पानी के चलाने पर हीटिंग कॉइल जल सकती है। मेटल की बाल्टी में इस्तेमाल करने पर करंट लग सकता है। नीचे दिए ग्राफिक से इसके संभावित खतरों को समझिए-इमर्शन रॉड के इस्तेमाल के दौरान कुछ छोटी-छोटी सावधानियां बरतकर हादसों से बचा जा सकता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-अगर गलती से किसी को करंट लग जाए तो सबसे पहले बिजली का मेन स्विच बंद करें। कभी भी व्यक्ति को सीधे हाथ लगाकर छुड़ाने की कोशिश न करें। इसके लिए लकड़ी की छड़ी या प्लास्टिक पाइप का इस्तेमाल करें। अगर व्यक्ति बेहोश है या सांस नहीं ले रहा है तो तुरंत सीपीआर दें और एम्बुलेंस बुलाएं। करंट के झटके से दिल की धड़कन रुक सकती है, इसलिए तुरंत मेडिकल हेल्प लेना जरूरी है। जल्दी एक्शन से जान बच सकती है।इमर्शन रॉड खरीदते समय केवल सस्ती कीमत देखकर फैसला न लें। सुरक्षा, टिकाऊपन और क्वालिटी सबसे अहम हैं। इसलिए खरीदने से पहले कुछ चीजों की जांच जरूर करें।यह सुरक्षा मानकों का प्रतीक है। ISI मार्क वाले रॉड शॉकप्रूफ होते हैं और इलेक्ट्रिक सेफ्टी की गारंटी देते हैं।वायर बहुत पतली या ढीली न हो। खराब वायरिंग से शॉर्ट सर्किट और करंट का रिस्क बढ़ता है।घरेलू जरूरतों के लिए 1000 से 1500 वॉट तक की रॉड पर्याप्त रहती है। इससे बिजली की खपत भी ज्यादा नहीं होती है।कॉपर या स्टेनलेस स्टील से बनी रॉड सबसे टिकाऊ और सुरक्षित होती है। आयरन रॉड जल्दी जंग खा जाती है।इससे आसानी से पता चलता है कि रॉड चालू है या नहीं, जिससे ओवरहीटिंग या जलने का खतरा कम होता है।हमेशा थ्री-पिन प्लग और वाटरप्रूफ हैंडल वाली रॉड चुनें। ये सुरक्षा के लिहाज से जरूरी हैं।कम-से-कम 1–2 साल की वारंटी वाली रॉड लें। सस्ते या बिना ब्रांड वाले रॉड न खरीदें क्योंकि इनमें वायरिंग कमजोर होती है और करंट लगने का जोखिम ज्यादा रहता है।अमेजन या फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजर रिव्यू देखकर समझें कि प्रोडक्ट कितना भरोसेमंद है। ध्यान रखें थोड़ी सी सतर्कता आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।इमर्शन रॉड की सही मेंटेनेंस उसकी लाइफ और परफॉर्मेंस दोनों बढ़ाती है। हर 10-15 दिनों में रॉड की कॉइल पर जमी सफेद परत साफ करें। इसके लिए विनेगर या नींबू के रस का इस्तेमाल करें। इसमें 20 मिनट तक भिगोकर रखें, फिर ब्रश से साफ करें। रॉड को कभी भी गीली हालत में स्टोर न करें। वायर और प्लग की जांच करते रहें कि कहीं क्रैक या ढीलापन न हो।नहीं, कभी नहीं। इमर्शन रॉड ऑटो-कट नहीं होता, इसलिए उसे बिना निगरानी के छोड़ना बेहद खतरनाक है।बिल्कुल नहीं। पहले रॉड को पानी में पूरी तरह डुबोएं। इसके बाद ही स्विच ऑन करें और पानी का टेम्परेचर देखने से पहले प्लग निकालें।नहीं, मेटल बिजली को आसानी से पास होने देता है। इससे करंट लगने का खतरा होता है।हां, लेकिन सावधानी के साथ। अगर रॉड ज्यादा गर्म हो गया तो बाल्टी पिघल सकती है या कॉइल जल सकती है।बाल्टी कम-से-कम 300mm गहरी होनी चाहिए और पानी का स्तर हमेशा रॉड पर दिए मैक्स लेवल मार्क से ऊपर नहीं जाना चाहिए।सबसे पहले देखें कि हीटिंग कॉइल पर स्केल या जंग तो नहीं जमी है। जरूरत हो तो उसे साफ करें या पुराना हो गया हो तो रॉड बदल दें।इमर्शन रॉड एक विंटर सीजन में इस्तेमाल कर सकते हैं। दूसरे सीजन में इस्तेमाल से पहले एक बार टेक्नीशियन से चेक कराना जरूरी है।जरूरत की खबर- सर्दियों में जल्दी सूखते नहीं कपड़े: बढ़ता फंगल इन्फेक्शन, हाइपोथर्मिया का रिस्क, ठंड में कपड़े सुखाने के 15 हैक्स सर्दियों में कपड़े सुखाना मुश्किल काम है। इन मौसम में धूप कम निकलती है, हवा में नमी रहती है और दिन छोटे हो जाते हैं। ऐसे में धोए हुए कपड़े कई बार आधे गीले रह जाते हैं और उनमें बदबू या फंगस लगने लगती है।फ्रूट ड्रिंक्स पर ORS का लेबल, FSSAI सख्त, खरीदते हुए लेबल पढ़ें, 6 बातें ध्यान रखेंइन 11 संकेतों से पहचानें, स्वस्थ रहने के लिए डाइट में शामिल करें ये चीजेंसर्दियों में सेहत का रखें ख्याल, डॉक्टर से जानें बचाव की 15 जरूरी टिप्सप्रयागराज में कंगना रनोट के कार्यक्रम में भीड़ बेकाबूसीकर में 24 घंटे बाद फिर बढ़ेगी सर्दीकंगना रनोट और क्रिकेटर सुरेश रैना आज प्रयागराज में2 दिनों बाद बढ़ेगी ठंड, 3 डिग्री तक गिरेगा पाराउत्तर-पश्चिमी हवाओं से झारखंड में मौसम शुष्क

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