जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर तीखी नोकझोंक, नेकां और भाजपा आमने-सामने

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर तीखी नोकझोंक, नेकां और भाजपा आमने-सामने
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और भाजपा विधायकों के बीच तीखी बहस हुई।

राज्य ब्यूरो, जागरण जम्मू। विधानसभा में मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में सरकारी जमीनों पर कब्जों को लेकर सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और भाजपा के विधायकों के बीच जमकर तकरार हुई। जहां सत्ताधारी और उसके समर्थक दल कब्जों को नियमित करने पर एक सुर में बोले, वहीं भाजपा ने अतिक्रमण से सख्ती से निपटने पर जोर देते हुए कब्जाधारकों से किराया वसूलने को कहा। सदन में नेशनल कान्फ्रेंस के विधायक हसनैन मसूदी द्वारा सरकारी जमीनों पर बने निजी स्कूलों की जमीन नियमित करने का निजी प्रस्ताव बहस का मुद्दा बन गया। इसके जवाब में शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने यह कहकर प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया कि सरकारी जमीनों पर बने निजी स्कूलों के मामलों पर सरकार गौर कर रही है। उन्हें इन जमीनों से एकदम हटाया नहीं जा सकता है। हमने उन्हें फिर एक साल की एक्सटेंशन दी है। इससे पहले भाजपा के विधायक राजीव जसरोटिया व पवन गुप्ता ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि प्रदेश में कुछ साल पहले रोशनी योजना के तहत सरकारी जमीनों पर कब्जों को नियमित करने के प्रयास हुए थे। रोशनी योजना से 25 हजार करोड़ रुपये एकत्र कर बिजली पैदा करने के झूठे सपने दिखाए गए। न्यायालय ने इस योजना को असंवैधानिक करार देते हुए स्पष्ट किया था कि सरकारी किसी लोगों में सरकारी जमीने नहीं बांट सकती है। वहीं, कांग्रेस के निजामुद्दीन बट ने कहा कि 50 साल से लोगों के कब्जे से जमीन को छुड़ाना उचित नहीं है। नेकां के मीर सैफुल्लाह ने कहा कि सरकारी जमीनों पर घर, दुकानें बनाने वाले उचित लोगों को राहत देना जरूरी है।.

राज्य ब्यूरो, जागरण जम्मू। विधानसभा में मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में सरकारी जमीनों पर कब्जों को लेकर सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और भाजपा के विधायकों के बीच जमकर तकरार हुई। जहां सत्ताधारी और उसके समर्थक दल कब्जों को नियमित करने पर एक सुर में बोले, वहीं भाजपा ने अतिक्रमण से सख्ती से निपटने पर जोर देते हुए कब्जाधारकों से किराया वसूलने को कहा। सदन में नेशनल कान्फ्रेंस के विधायक हसनैन मसूदी द्वारा सरकारी जमीनों पर बने निजी स्कूलों की जमीन नियमित करने का निजी प्रस्ताव बहस का मुद्दा बन गया। इसके जवाब में शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने यह कहकर प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया कि सरकारी जमीनों पर बने निजी स्कूलों के मामलों पर सरकार गौर कर रही है। उन्हें इन जमीनों से एकदम हटाया नहीं जा सकता है। हमने उन्हें फिर एक साल की एक्सटेंशन दी है। इससे पहले भाजपा के विधायक राजीव जसरोटिया व पवन गुप्ता ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि प्रदेश में कुछ साल पहले रोशनी योजना के तहत सरकारी जमीनों पर कब्जों को नियमित करने के प्रयास हुए थे। रोशनी योजना से 25 हजार करोड़ रुपये एकत्र कर बिजली पैदा करने के झूठे सपने दिखाए गए। न्यायालय ने इस योजना को असंवैधानिक करार देते हुए स्पष्ट किया था कि सरकारी किसी लोगों में सरकारी जमीने नहीं बांट सकती है। वहीं, कांग्रेस के निजामुद्दीन बट ने कहा कि 50 साल से लोगों के कब्जे से जमीन को छुड़ाना उचित नहीं है। नेकां के मीर सैफुल्लाह ने कहा कि सरकारी जमीनों पर घर, दुकानें बनाने वाले उचित लोगों को राहत देना जरूरी है।

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