मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह की अदावत किसी से छुपी नहीं है। लेकिन इस अदावत को लेकर ओम प्रकाश राजभर ने बड़ा खुलासा कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह सब आपस में मिले हुए हैं। एक किस का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि साबरमती जेल में बंद बृजेश सिंह के पास मुख्तार अंसारी का फोन आया था। तब वो वहां मौजूद...
अभय सिंह राठौड़, लखनऊ: उत्तर प्रदेश की जरायम की दुनिया में माफिया डॉन मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह की दुश्मनी किसी से छुपी नहीं है दोनों माफिया एक दूसरे के जानी दुश्मन थे। दावा किया जाता है कि साल 2001 में बृजेश सिंह ने मुख्तार अंसारी पर हमला करा दिया था। इसमें मुख्तार तो बच गए लेकिन उनके दो गनर की मौत हो गई थी। इस हमले के बाद दोनों माफियाओं की दुश्मनी और बढ़ गई थी। इस तरह दोनों माफियाओं की दुश्मनी की कहानियां कई अखबार और टीवी चैनल पर चलने वाले शो से पटे पड़े हुए है। जिसमें इन दोनों माफियाओं की अदावत का जिक्र किया गया है कि कैसे दोनों एक-दूसरे की जान लेने को बेताब थे। इनकी अदावत के किस्से इतने डरावने है कि इनके किस्से सुनकर किसी की भी आम इंसान की रूह कांप जाए। इसी बीच दोनों माफियाओं से संबंध होने का दावा करने वाले सुभासपा मुखिया ओम प्रकाश राजभर ने मुख्तार-बृजेश की अदावत पर बड़ा खुलासा कर दिया है।सुभासपा मुखिया व कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि यह सब लोग आपस में मिले हैं। इनको लेकर बाहरी दुनिया में जो कहानी चलती थी, वो सिर्फ एक पब्लिसिटी थी। इससे खौफ पैदा करके ये लोग अपना धंधा चलाते थे। एक निजी चैनल के इंटरव्यू में ओम प्रकाश राजभर ने एक किस्से का जिक्र किया है। उसमें ओपी राजभर ने बताया कि उस समय बृजेश सिंह साबरमती जेल में बंद थे। 2009 के चुनाव के समय राजनाथ सिंह ने उनको दो सीट देने की बात कही थी। राजनाथ सिंह ने ओपी राजभर से कहा कि एक सीट पर बृजेश सिंह को लड़ा देना और दूसरी सीट पर तुम लड़ जाना। राजनाथ सिंह ने दिया टास्कराजनाथ सिंह ने ओपी राजभर को बृजेश सिंह को चंदौली से लड़ाने के लिए राजी करने का टास्क दिया था। ओपी राजभर ने बताया कि राजनाथ सिंह के कहने पर हम तीन-चार लोग साबरमती जेल बृजेश सिंह से मिलने चले गए थे। वहां राजनाथ सिंह भी आ गए थे। उस दौरान राजनाथ सिंह ने बृजेश सिंह से कहा कि मोदी जी वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे। इसलिए आप चंदौली से लड़ जाइये और ओपी राजभर को घोषी से लड़ा देंगे। इसबात पर बृजेश सिंह तैयार नहीं हुए तो राजनाथ सिंह वहां से चले गए थे।अचानक आया मुख्तार का फोनसुभासपा मुखिया ओपी राजभर ने बताया कि राजनाथ सिंह के जाने के बाद हम बृजेश सिंह से बात ही कर रहे थे कि तभी मुख्तार अंसारी का फोन बृजेश सिंह के पास आ गया। मुख्तार ने बृजेश से पूछा कि क्या ओम प्रकाश जी वहां पहुंचे है। इसपर बृजेश सिंह ने कहा कि ओम प्रकाश राजभर यही बैठे हैं, और ये कहते हुए बृजेश ने हमें फोन थमा दिया। ओपी राजभर ने बताया कि बातचीत के दौरान मुख्तार अंसारी ने हमसे कहा कि भैया वहां क्यों चले गए हैं, हमसे कह दिए होते तो हम बृजेश से फोन करके बोल देते।गंदा है पर धंधा है येओपी राजभर ने कहा कि बृजेश के पास मुख्तार का फोन आता देख मैं बिल्कुल हैरान रह गया था। मैं सोच रहा था कि बाहर इन लोगों को लेकर क्या-क्या चर्चाएं चलती हैं। इस बात को लेकर जब हमने बृजेश सिंह से पूछा तब बृजेश सिंह ने बताया कि अगर हम लोगों की इतनी पब्लिसिटी ना हो तो हम लोगों को कौन रंगदारी टैक्स देगा। हम लोगों को कौन पहचानेगा। ओपी राजभर ने कहा कि बृजेश सिंह से गुप्त दोस्ती की बात मुख्तार अंसारी से भी की थी। तब मुख्तार ने भी बृजेश की तरह मुख्तार अंसारी ने भी जवाब दिया था। राजभर ने अपने इंटरव्यू में बताया कि जब दोनों लोगों से उनकी गुप्त दोस्ती की बात की तब जाकर एहसास हुआ कि बाहर जो बातें होती हैं, वो सिर्फ कमाने का एक धंधा है।'जरायम की दुनिया में भी सभी एक'सुभाषपा मुखिया और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने दावा करते हुए कहा कि यह लोग ऐसा करके अपना बिजनेस करते हैं। इतना ही नहीं, राजभर ने यह भी दावा किया कि जो ठेका-पट्टा मुख्तार को नहीं मिलता था, वो बृजेश सिंह ले लेते थे। बृजेश के ठेके में मुख्तार के लोग भी काम करते थे। इसी तरह मुख्तार अंसारी के ठेके-पट्टे में बृजेश सिंह के लोग काम करते थे। ओपी राजभर ने कहा कि यह सब लोग अंदर से एक थे। बाहर जो सुनने को मिलता था। वो सिर्फ एक मात्र पब्लिसिटी थी। कैबिनेट मंत्री ने नेताओं का उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे नेतानगरी में सभी एक हैं, वैसे ही जरायम की दुनिया में भी सभी एक हैं। सबकी एक-दूसरे से सेटिंग रहती है।.
अभय सिंह राठौड़, लखनऊ: उत्तर प्रदेश की जरायम की दुनिया में माफिया डॉन मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह की दुश्मनी किसी से छुपी नहीं है दोनों माफिया एक दूसरे के जानी दुश्मन थे। दावा किया जाता है कि साल 2001 में बृजेश सिंह ने मुख्तार अंसारी पर हमला करा दिया था। इसमें मुख्तार तो बच गए लेकिन उनके दो गनर की मौत हो गई थी। इस हमले के बाद दोनों माफियाओं की दुश्मनी और बढ़ गई थी। इस तरह दोनों माफियाओं की दुश्मनी की कहानियां कई अखबार और टीवी चैनल पर चलने वाले शो से पटे पड़े हुए है। जिसमें इन दोनों माफियाओं की अदावत का जिक्र किया गया है कि कैसे दोनों एक-दूसरे की जान लेने को बेताब थे। इनकी अदावत के किस्से इतने डरावने है कि इनके किस्से सुनकर किसी की भी आम इंसान की रूह कांप जाए। इसी बीच दोनों माफियाओं से संबंध होने का दावा करने वाले सुभासपा मुखिया ओम प्रकाश राजभर ने मुख्तार-बृजेश की अदावत पर बड़ा खुलासा कर दिया है।सुभासपा मुखिया व कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि यह सब लोग आपस में मिले हैं। इनको लेकर बाहरी दुनिया में जो कहानी चलती थी, वो सिर्फ एक पब्लिसिटी थी। इससे खौफ पैदा करके ये लोग अपना धंधा चलाते थे। एक निजी चैनल के इंटरव्यू में ओम प्रकाश राजभर ने एक किस्से का जिक्र किया है। उसमें ओपी राजभर ने बताया कि उस समय बृजेश सिंह साबरमती जेल में बंद थे। 2009 के चुनाव के समय राजनाथ सिंह ने उनको दो सीट देने की बात कही थी। राजनाथ सिंह ने ओपी राजभर से कहा कि एक सीट पर बृजेश सिंह को लड़ा देना और दूसरी सीट पर तुम लड़ जाना। राजनाथ सिंह ने दिया टास्कराजनाथ सिंह ने ओपी राजभर को बृजेश सिंह को चंदौली से लड़ाने के लिए राजी करने का टास्क दिया था। ओपी राजभर ने बताया कि राजनाथ सिंह के कहने पर हम तीन-चार लोग साबरमती जेल बृजेश सिंह से मिलने चले गए थे। वहां राजनाथ सिंह भी आ गए थे। उस दौरान राजनाथ सिंह ने बृजेश सिंह से कहा कि मोदी जी वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे। इसलिए आप चंदौली से लड़ जाइये और ओपी राजभर को घोषी से लड़ा देंगे। इसबात पर बृजेश सिंह तैयार नहीं हुए तो राजनाथ सिंह वहां से चले गए थे।अचानक आया मुख्तार का फोनसुभासपा मुखिया ओपी राजभर ने बताया कि राजनाथ सिंह के जाने के बाद हम बृजेश सिंह से बात ही कर रहे थे कि तभी मुख्तार अंसारी का फोन बृजेश सिंह के पास आ गया। मुख्तार ने बृजेश से पूछा कि क्या ओम प्रकाश जी वहां पहुंचे है। इसपर बृजेश सिंह ने कहा कि ओम प्रकाश राजभर यही बैठे हैं, और ये कहते हुए बृजेश ने हमें फोन थमा दिया। ओपी राजभर ने बताया कि बातचीत के दौरान मुख्तार अंसारी ने हमसे कहा कि भैया वहां क्यों चले गए हैं, हमसे कह दिए होते तो हम बृजेश से फोन करके बोल देते।गंदा है पर धंधा है येओपी राजभर ने कहा कि बृजेश के पास मुख्तार का फोन आता देख मैं बिल्कुल हैरान रह गया था। मैं सोच रहा था कि बाहर इन लोगों को लेकर क्या-क्या चर्चाएं चलती हैं। इस बात को लेकर जब हमने बृजेश सिंह से पूछा तब बृजेश सिंह ने बताया कि अगर हम लोगों की इतनी पब्लिसिटी ना हो तो हम लोगों को कौन रंगदारी टैक्स देगा। हम लोगों को कौन पहचानेगा। ओपी राजभर ने कहा कि बृजेश सिंह से गुप्त दोस्ती की बात मुख्तार अंसारी से भी की थी। तब मुख्तार ने भी बृजेश की तरह मुख्तार अंसारी ने भी जवाब दिया था। राजभर ने अपने इंटरव्यू में बताया कि जब दोनों लोगों से उनकी गुप्त दोस्ती की बात की तब जाकर एहसास हुआ कि बाहर जो बातें होती हैं, वो सिर्फ कमाने का एक धंधा है।'जरायम की दुनिया में भी सभी एक'सुभाषपा मुखिया और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने दावा करते हुए कहा कि यह लोग ऐसा करके अपना बिजनेस करते हैं। इतना ही नहीं, राजभर ने यह भी दावा किया कि जो ठेका-पट्टा मुख्तार को नहीं मिलता था, वो बृजेश सिंह ले लेते थे। बृजेश के ठेके में मुख्तार के लोग भी काम करते थे। इसी तरह मुख्तार अंसारी के ठेके-पट्टे में बृजेश सिंह के लोग काम करते थे। ओपी राजभर ने कहा कि यह सब लोग अंदर से एक थे। बाहर जो सुनने को मिलता था। वो सिर्फ एक मात्र पब्लिसिटी थी। कैबिनेट मंत्री ने नेताओं का उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे नेतानगरी में सभी एक हैं, वैसे ही जरायम की दुनिया में भी सभी एक हैं। सबकी एक-दूसरे से सेटिंग रहती है।
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