Bharatiya Janata Party (BJP) North East States Election Winning Strategy Explained; Follow PM Narendra Modi Assam Visit, Assam Election 2026, Himanta Biswa Sarma, Congress BJP Latest News On Dainik Bhaskar.
2014 से पहले नॉर्थ ईस्ट के 8 राज्यों में से किसी भी राज्य में BJP की सरकार नहीं थी। कुल मिलाकर 9 विधायक और महज 4 सांसद थे। त्रिपुरा, सिक्किम और मिजोरम में तो BJP के पास एक भी सीट नहीं थी।आज नॉर्थ ईस्ट के 6 राज्यों में BJP सत्ता में है। चार राज्यों में उसका मुख्यमंत्री है। कुल 197 विधायक और 13 सांसद हैं। यानी, 2014 के मुकाबले 22 गुना ज्यादा विधायक और तीन गुना ज्यादा सांसद हैं।आखिर बीजेपी ने नॉर्थ-ईस्ट में इतना बड़ा उलटफेर कैसे किया? जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में…साल 2014, जून-जुलाई का महीना… कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद श्रीनगर में छुट्टियां बिता रहे थे। दोपहर 12 बजे, दिल्ली से अहमद पटेल ने आजाद को फोन किया- ‘मैडम आपसे बात करना चाहती हैं।’आजाद ने जवाब दिया- श्रीनगर में हूं।आजाद- नहीं उसकी कोई जरूरत नहीं है। यहां से हर घंटे दिल्ली के लिए प्लेन है।सोनिया- असम में बहुत बड़ा संकट आ गया है। हिमंता बिस्व सरमा ने 40-50 विधायकों के साथ बगावत कर दी है। मैंने सुना है कि वो आपके करीब हैं। आप फोन करके बोलिए कि अभी वो अपना प्लान होल्ड पर रखें। राज्यपाल भी आपके करीबी हैं, उन्हें भी बोलिए कि अभी कुछ फैसला नहीं लें। अक्टूबर 2019 में संसद के सेंट्रल हॉल में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ गुलाम नबी आजाद। 2022 में आजाद ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर खुद की पार्टी बना ली।सोनिया आजाद से बोलीं- आप असम जाइए और वहां लीडर चुनिए। आजाद- मैडम मैं वहां जाने से पहले यहीं पर एक्सरसाइज करना चाहता हूं। वहां जाकर अपने मन से किसी को मुख्यमंत्री बना दूंगा, तो आप कहोगे कि इसको नहीं बनाना था।आजाद- कोई प्लान लीक नहीं होगा। मैं इंदिराजी के जमाने से यही काम करता आ रहा हूं। इसके बाद आजाद ने हिमंता बिस्व सरमा को फोन किया और कहा कि वे अलग-अलग जहाजों से अपने विधायकों को लेकर दिल्ली पहुंचें। सरमा के साथ 40-50 विधायक दिल्ली पहुंचे। उन्हें दिल्ली में अलग-अलग होटलों में रखा गया। किसी को कहीं बयान देने से सख्त मना किया गया। आजाद ने असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से कहा कि आपके समर्थन में जो विधायक हैं, उन्हें दिल्ली भेजिए। गोगोई ने 7 विधायकों को दिल्ली भेजा। 10 विधायक और दिल्ली आए, जिनका कहना था कि वे आलाकमान का फैसला मानेंगे। 2001 में पहली बार विधायक बनने के बाद हिमंत बिस्वा सरमा और असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ।सोनिया आजाद से बोलीं- ठीक है…आप असम जाइए और वहां जो नेता चुना जाए, उसे सीएम बनाइए।राहुल गांधी ने आजाद से कहा - मुझे पता चला है कि आप असम के मुख्यमंत्री को बदलने वाले हैं?इसके बाद आजाद, राहुल गांधी से मिलने उनके घर पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि राहुल के साथ तरुण गोगोई और उनके बेटे गौरव गोगोई बैठे हैं।आजाद- मैं क्यों तंग करूंगा। मुझे जो काम दिया गया, वो कर रहा हूं। हिमंता के पास बहुमत है। आप सोचकर बताइएगा क्या करना है।राहुल- जाने दो उसे RSS में।2016 में असम के नगांव में चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी, तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और उनके बेटे गौरव गोगोई। हिमंता बिस्व सरमा, नॉर्थ-ईस्ट में कांग्रेस का बड़ा चेहरा थे। वे पूर्व सीएम तरुण गोगोई के करीबी माने जाते थे। 2001 से 2011 तक हिमंता लगातार 3 बार कांग्रेस से विधायक रहे। गोगोई ने कैबिनेट में उन्हें अहम मंत्रालय दिए थे। हिमंता और तरुण गोगोई के रिश्तों में दरार की शुरुआत हुई 2013 में, जब तरुण ने बेटे गौरव की पॉलिटिकल लॉन्चिंग की। 2014 में गौरव को कलियाबोर से लोकसभा का टिकट मिला और वे जीत भी गए। यहां से सरकार के कामकाज में भी गौरव की भूमिका रहने लगी। कहा जाता है कि 2014 से पहले ही हिमंता बिस्व सरमा, बीजेपी नेता राम माधव के संपर्क में थे। RSS से बीजेपी में आने वाले राम माधव तब असम के प्रभारी थे।हिमंता बोले- बात करने के बजाय कुत्ते से खेलते रहे राहुल गांधी बीजेपी में शामिल होने के बाद एक टीवी इंटरव्यू में हिमंता बिस्व सरमा ने बताया- '2014 की बात है। असम में क्राइसिस को लेकर मैं दिल्ली में राहुल गांधी से मिला। मेरे साथ असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और कांग्रेस नेता सीपी जोशी भी थे। थोड़ी देर बाद सीपी जोशी और गोगोई के बीच बहस हो गई, लेकिन राहुल ने उन पर ध्यान नहीं दिया। वे अपने कुत्ते के साथ खेलते रहे। इसी बीच कुत्ते ने टेबल पर प्लेट में रखे बिस्किट को जूठा कर दिया। मुझे लगा कि राहुल किसी को आवाज देकर बुलाएंगे और प्लेट चेंज करवाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लोग उसी प्लेट से बिस्किट खाते रहे और उन्हें देखकर राहुल हंसते रहे। ये हम सब का अपमान था। उसी दिन मैं बीजेपी के राम माधव से मिला और फिर जो हुआ सबको पता है।' 2016 में असम विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के अगले दिन हिमंता बिस्व सरमा, सर्बानंद सोनोवाल और राम माधव। साल 2015 और तारीख 21 जुलाई। असम के बीजेपी नेता सर्बानंद सोनोवाल और केंद्रीय राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने एक बुकलेट जारी कर बताया कि लुईस बर्जर घोटाले में हिमंता बिस्व सरमा मुख्य संदिग्ध हैं। दरअसल, ED ने दावा किया था कि 2010 में वाटर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए असम और गोवा में भारतीय अधिकारियों को फर्जी कंपनियों ने रिश्वत दी है। कहा जाता है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के अगले दिन यानी 22 जुलाई को हिमंता की बीजेपी जॉइन करने वाले थे, लेकिन घोटाले में नाम आने के बाद जॉइनिंग टाल दी गई। असम के बीजेपी अध्यक्ष रहे सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने एक मीडिया इंटरव्यू में बताया- ‘सर्बानंद सोनोवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मैं, हिमंता के साथ दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिला और उन्हें बताया कि आरोप झूठे हैं। शाह ने कहा कि ये तो गलत हुआ। अब गलती सुधारिए।’यहीं से उस पटकथा की शुरुआत हुई, जिसने बीजेपी को नॉर्थ-ईस्ट में कामयाबी दिलवाई…2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने नॉर्थ-ईस्ट में तीन बड़े मुद्दों को उठाया था- बांग्लादेशी मुस्लिम को घुसपैठिया बताकर बाहर भेजना, नेहरू-गांधी परिवार पर नॉर्थ-ईस्ट से भेदभाव का आरोप और करप्शन। इस चुनाव में बीजेपी को असम की 14 में से 7 सीटें और 36.
6% वोट मिले। 2009 के लोकसभा चुनाव से 2 ज्यादा सीटें और करीब 20% ज्यादा वोट। एक सीट अरुणाचल प्रदेश में भी जीती। लेकिन बाकी के 6 राज्यों में बीजेपी का खाता तक नहीं खुला। पहली बार बीजेपी को नॉर्थ-ईस्ट में 25 में से 8 लोकसभा सीटें मिलीं। वहीं आम चुनावों के साथ अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में विधानसभा चुनाव भी हुए। अरुणाचल में बीजेपी को 11 सीटें और 33% वोट मिले। जबकि सिक्किम में उसे कोई सीट नहीं मिली। करीब डेढ़ साल बाद 2016 में असम विधानसभा चुनाव हुए। 29 जनवरी 2016 को बीजेपी ने पुराने चेहरे को तवज्जो देते हुए सर्बानंद सोनोवाल को सीएम फेस बनाया। इसके अलावा बीजेपी ने बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट यानी BPF और असम गणपरिषद के साथ अलायंस किया। BPF असम की बोडो जनजाति के अलग राज्य बोडोलैंड की मांग से निकली थी।19 मई को नतीजे आए तो 126 सीटों में से 60 पर बीजेपी और 26 सीटों पर उसके सहयोगियों को जीत मिलीं। जबकि कांग्रेस 26 सीटों पर सिमट गई। पहली बार नॉर्थ-ईस्ट के किसी राज्य में बीजेपी की सरकार बनी। सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। 2021 में भी असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी को लगातार दूसरी बार बहुमत मिला। हालांकि, इस बार पार्टी ने चेहरा बदल दिया और हिमंता बिस्व सरमा मुख्यमंत्री बने।नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी- उसकी बाहरी पार्टी की पहचान। RSS लंबे समय से वहां काम कर रहा था, उसके बाद भी बीजेपी के पास मजबूत कैडर नहीं था। इसकी काट निकालने के लिए 26 मई 2016 को नॉर्थ-ईस्ट की स्थानीय पार्टियों को मिलाकर एक नया गठबंधन ‘नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस’ यानी, NEDA बना। हिमंता बिस्व सरमा को NEDA का संयोजक बनाया गया। बीजेपी के साथ नागा पीपुल्स फ्रंट, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल, असम गण परिषद, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट जैसी स्थानीय पार्टियां इसमें शामिल हुईं। सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और असम के मुख्यमंत्री इसके फाउंडिंग मेंबर बने। सितंबर 2017 में NEDA की मीटिंग के दौरान अमित शाह, सर्बानंद सोनोवाल, हिमंता बिस्व सरमा समेत कई नॉर्थ-ईस्ट नेता।2014 के असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 11 सीटें मिलीं। दो साल बाद सितंबर 2016 में कांग्रेस के 43 विधायक ‘पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल’ में शामिल हो गए। फिर दिसंबर 2016 में इस पार्टी के 33 विधायक बीजेपी में चले गए। इस तरह अरुणाचल में बीजेपी की सरकार बन गई। पेमा खांडू मुख्यमंत्री बने, जो पहले कांग्रेस से पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में और फिर बीजेपी में आए थे। 2019 के विधानसभा में बीजेपी ने 60 सीटों में से 41 सीटें जीतकर दोबारा सरकार बनाई। पेमा खांडू एक बार फिर से राज्य के मुख्यमंत्री बने। 2024 में बीजेपी ने 46 सीटें जीतीं और पेमा खांडू सीएम बने।मणिपुर: कांग्रेस बड़ी पार्टी बनी, लेकिन सरकार बीजेपी ने बनाई 2017 में मणिपुर में चुनाव हुए। 60 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस को 28 और बीजेपी को 21 सीटें मिलीं। 2011 के बाद पहली बार बीजेपी का मणिपुर में खाता खुला। पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 34% वोट शेयर बढ़ा। बीजेपी ने नेशनल पीपुल्स पार्टी, नागा पीपुल्स फ्रंट और लोक जनशक्ति पार्टी के साथ मिलकर मणिपुर में सरकार बनाई। एन वीरेन सिंह मुख्यमंत्री बने, जो 2016 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। 2021 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 32 सीटें जीतकर दोबारा सरकार बनाई। वीरेन सिंह को फिर से मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा होने लगी। वीरेन सिंह पर स्थिति न संभाल पाने के आरोप लगे। ऐसे में 9 फरवरी 2025 को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और राष्ट्रपति शासन लग गया। एक साल बाद 4 फरवरी 2026 को बीजेपी के युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर के मुख्यमंत्री बने।2018 में त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव हुए। 3 मार्च को जब नतीजे आए, तो 60 में से 35 सीटें जीतकर बीजेपी ने न सिर्फ त्रिपुरा में पहली बार खाता खोला, बल्कि अपने दम पर सरकार बनाई। लेफ्ट का 25 साल पुराना किला ध्वस्त हो गया। बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष बिप्लव देब मुख्यमंत्री बने, लेकिन 4 साल बाद मई 2022 में उन्हें हटाकर माणिक साहा को सीएम बनाया गया। साहा 2016 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे। 2023 विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने 32 सीटें जीतकर यहां वापसी की। हालांकि, पिछले चुनाव के मुकाबले उसकी 3 सीटें कम हो गईं। वोट शेयर भी करीब 4% कम हुआ।सिक्किम: अकेले चुनाव लड़ा, लेकिन खाता नहीं खुला 2019 के विधानसभा चुनाव में सिक्किम विधानसभा चुनाव में बीजेपी को कुल 5700 वोट मिले। एक भी सीट नहीं जीती, लेकिन बाद में बीजेपी के पास 12 विधायक हो गए और सरकार में भी रही। दरअसल, चुनाव के बाद 3 विधायकों को इस्तीफा देना पड़ा, क्योंकि वे दो-दो सीटों से लड़े थे। इन पर उपचुनाव हुए, तो 2 सीटें बीजेपी ने जीत लीं। वहीं सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के 15 में से 10 विधायक बीजेपी में चले गए। यानी सिक्किम में बीजेपी के 12 विधायक हो गए और वह गठबंधन की सरकार में शामिल हो गई।नगालैंड: पांच साल में 11 विधायक बढ़े, गठबंधन की सरकार का हिस्सा 2018 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व सीएम केएल चिशी बीजेपी में शामिल हो गए। उनके साथ 12 नेता भी बीजेपी में गए। बीजेपी ने नागा पीपुल्स फ्रंट के साथ गठबंधन तोड़ा और नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के साथ चुनाव में उतर गई। तब बीजेपी को 12 सीटें मिलीं, यानी पिछले चुनाव से 11 ज्यादा। 2023 विधानसभा में भी बीजेपी को 12 सीटें मिलीं और इस बार भी वो गठबंधन की सरकार में शामिल हुई।2018 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी 39 सीटों पर लड़ी और एक सीट ही जीत सकी। यहां पहली बार बीजेपी का खाता खुला। पिछले चुनाव के मुकाबले उसका वोट शेयर भी करीब 8% बढ़ गया। 2023 चुनाव में बीजेपी को दो सीटें मिलीं। फिलहाल वो यहां विपक्ष में है।मेघालय में बीजेपी को 2018 और 2013 दोनों ही विधानसभा चुनावों 2-2 सीटें मिलीं। दोनों ही बार वो गठबंधन की सरकार में शामिल हुई।2014 में जब बीजेपी नरेंद्र मोदी के चेहरे पर लोकसभा चुनाव में उतरी, तब नॉर्थ-ईस्ट में उसने बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। लगभग हर रैली में मोदी ने इसका जिक्र किया। 24 फरवरी 2014 को असम के रामनगर की रैली में मोदी ने कहा- ‘कांग्रेस सरकार ने डिटेंशन सेंटर के नाम पर मानवाधिकारों का हनन किया। घुसपैठिए आपके अधिकार छीन रहे हैं। असम के नौजवान बेरोजगार हैं और बाहरी रोजी रोटी कमा रहे हैं। ये अन्याय है कि नहीं। दिल्ली में सरकार बना दीजिए, न्याय मिलने की शुरुआत हो जाएगी। सारे डिटेंशन सेंटर खत्म कर दूंगा।’ असम के साथ ही पूरे नॉर्थ-ईस्ट में मूल निवासी बनाम बाहरी का मुद्दा लंबे अरसे से रहा है। 1980 के दशक में इसको लेकर असम में खूब हिंसा हुई और 2 हजार से ज्यादा बांग्लादेशी प्रवासी मारे गए थे। 15 अगस्त 1985 को प्रधानमंत्री राजीव गांधी और छात्र संगठन आसू के बीच समझौता हुआ, जिसे असम अकॉर्ड कहा जाता है। इसके बाद नागरिकता कानून में बदलाव किया गया। जो लोग मार्च 1971 के बाद असम आए, उन्हें अवैध प्रवासी माना गया। 1980 के दशक से ही बीजेपी बांग्लादेशी प्रवासियों को बाहर भेजने की मांग करती रही है। हालांकि, बाद में बीजेपी ने अपना स्टैंड बदला और बांग्लादेशी हिंदुओं को नागरिकता देने और बांग्लादेशी मुस्लिमों को घुसपैठिया बताकर बाहर भेजने की मांग करने लगी।2. हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण नॉर्थ-ईस्ट के 8 राज्यों में से 4 राज्य- त्रिपुरा, असम, सिक्किम और मणिपुर हिंदू बहुल हैं। जबकि नगालैंड, मेघालय और मिजोरम में 80% से ज्यादा आबादी ईसाई है। असम में 34% मुस्लिम हैं, जो नॉर्थ-ईस्ट के अन्य राज्यों के मुकाबले बहुत ज्यादा है। पूरे नॉर्थ-ईस्ट में 37% हिंदू, 42.3% ईसाई और 7.7% मुस्लिम आबादी है। बीजेपी के बड़े नेता नॉर्थ-ईस्ट में हिंदू-मुस्लिम मुद्दा उछालते रहे हैं। 2021 में हिमंता बिस्व सरमा ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था- 'मुझे मियां वोट्स नहीं चाहिए। मैं उनके पास वोट मांगने नहीं जाऊंगा और वे भी मेरे पास नहीं आएंगे।' बांग्लादेशी मुस्लिम प्रवासियों को घुसपैठिया बताकर बाहर भेजने की बात हो या हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसा करके बीजेपी नॉर्थ-ईस्ट में पोलराइजेशन को मुद्दा बनाने में कामयाब रही है। 24 फरवरी 2014 को असम के रामनगर की चुनावी रैली में नरेंद्र मोदी ने कहा- ‘दुनिया के किसी देश में हिंदुओं को खदेड़ दिया जाएगा, तो उसके लिए एक ही जगह बची है, वो यहीं चला आएगा। हम नहीं चाहते कि बांग्लादेशी हिंदुओं का बोझ अकेले, असम उठाए। पूरे हिंदुस्तान को इसका बोझ उठाना चाहिए।’नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी की कामयाबी के पीछे दूसरी पार्टियों के बड़े नेताओं का अहम रोल है। असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा, मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, त्रिपुरा के सीएम माणिक साहा और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू सभी पहले कांग्रेसी या स्थानीय पार्टियों के बड़े नेता थे। इसके अलावा दूसरी पार्टियों से बड़ी संख्या में विधायक और नेता बीजेपी में शामिल हुए। 2015 में हिमंता अपने साथ 10 से ज्यादा विधायक लेकर बीजेपी में आए थे। 2016 में पेमा खांडू 33 विधायक लेकर बीजेपी में शामिल हुए। सिक्किम में तो बीजेपी ने स्थानीय पार्टी के 15 में से 10 विधायकों को पार्टी में शामिल करा लिया। इतना ही नहीं, नॉर्थ-ईस्ट के हर राज्य में बीजेपी का किसी न किसी पार्टी के साथ गठबंधन जरूर है।आम तौर पर नॉर्थ-ईस्ट के लोग उसी पार्टी को प्राथमिकता देते हैं, जिनकी केंद्र में सरकार होती है। नॉर्थ-ईस्ट में लंबे समय से राजनीति को कवर कर रहे बिश्वेंदु भट्टाचार्य बताते हैं, 'नॉर्थ-ईस्ट में ज्यादातर दल छोटे-छोटे हैं। बड़े खर्चे के लिए सरकार के फंड और ग्रांट पर निर्भर रहना इनकी मजबूरी है। केंद्र सरकार में काबिज होने के बाद इन दलों को बीजेपी ने लुभाया, राज्य में उनकी सरकार बनी, तो उन्हें पद मिलेगा, मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। यहां के स्थानीय नेता ट्राइबल बेल्ट में जाकर बोलते थे, यदि कमल पर वोट दिया, तो हम मंत्री बनेंगे, आपका बेटा ये बनेगा। बीजेपी को इसका बहुत फायदा भी मिला।'नॉर्थ इंडिया में बीजेपी और संघ बीफ का खूब विरोध करते हैं, लेकिन नॉर्थ-ईस्ट में वे ऐसा नहीं करते। 2023 विधानसभा चुनाव से पहले नगालैंड के बीजेपी नेता और डिप्टी सीएम यानथुंगो पैटन ने कहा, नगालैंड में बीफ मुख्य भोजन है। बीजेपी, कांग्रेस या कोई भी नेशनल पार्टी हमारे खानपान में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। बीफ खाना नगालैंड के साथ ही पूरे नॉर्थ-ईस्ट में कोई इश्यू नहीं है।2014 से 2024 के बीच 10 साल में पीएम मोदी ने करीब 70 बार नॉर्थ-ईस्ट जा चुके हैं। मार्च 2024 में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि वे बतौर प्रधानमंत्री 70 बार नॉर्थ-ईस्ट जा चुके हैं। उनके मंत्री 10 सालों में 680 बार नॉर्थ-ईस्ट जा चुके हैं। अभी तक सभी प्रधानमंत्री मिलकर जितनी बार नॉर्थ-ईस्ट गए होंगे, उससे कई गुना ज्यादा बार मैं अकेले गया हूं।असम में फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश, 2.43 लाख नाम हटे: राज्य में अब 2.49 करोड़ वोटर; बंगाल में फाइनल लिस्ट की तारीख 14 दिन बढ़ी चुनाव आयोग ने मंगलवार को असम में हुए स्पेशल रिवीजन 2026 के तहत फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी। EC के मुताबिक, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की तुलना में 2.43 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। अब राज्य में कुल 2,49,58,139 वोटर्स रजिस्टर्ड हैं।राजस्थान में फिर बारिश की संभावनासीकर में सर्दी बढ़ी,2 दिन में 8 डिग्री गिरा पाराहरियाणा के 8 शहरों में न्यूनतम तापमान 10° से ऊपरदिन में बढ़ी गर्मी, जगदलपुर में पारा 32 डिग्री पार16 फरवरी तक साफ रहेगा मौसम-17 से बूंदाबांदीहरियाणा में VIP और VVIP फ्लाइट्स पर बढ़ाई सख्ती
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