चुनाव आयोग ने बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के मानदेय में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। शनिवार शाम आयोग की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, बीएलओ का मानदेय 6000 रुपये से बढ़ाकर 12000 रुपये कर
चुनाव आयोग ने बूथ स्तरीय अधिकारियों के मानदेय में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। शनिवार शाम आयोग की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, बीएलओ का मानदेय 6000 रुपये से बढ़ाकर 12000 रुपये कर दिया है। इसी के साथ बीएलओ पर्यवेक्षकों का मानदेय भी 12000 रुपये से बढ़ाकर 18000 रुपये कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने बूथ स्तरीय अधिकारियों , बीएलओ सुपरवाइजर के अलावा सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के मानदेय को भी बढ़ाने की घोषणा की है। चुनाव आयोग की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि शुद्ध निर्वाचन सूची लोकतंत्र की आधारशिला है। चुनावी प्रक्रिया में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी , बीएलओ सुपरवाइजर और बीएलओ अत्यधिक मेहनत करते हैं और निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्वाचन सूची तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन सभी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने बीएलओ के वार्षिक मानदेय को दोगुना करने और बीएलओ सुपरवाइजरों के मानदेय में वृद्धि करने का निर्णय लिया है। मानदेय में पिछला संशोधन वर्ष 2015 में किया गया था। सबसे अहम बात यह है कि पहली बार एईआरओ को 25,000 रुपये और ईआरओ को 30,000 रुपये प्रतिवर्ष सम्मान राशि देने का फैसला लिया गया है, जबकि पहले इन पदों पर कोई अलग से मानदेय नहीं था। संशोधित मानदेय: क्रम संख्या पदनाम 2015 से प्रचलित मानदेय अब संशोधित मानदेय 1 बूथ स्तरीय अधिकारियों 6000 रुपये 12000 रुपये 2 निर्वाचन सूची संशोधन हेतु बीएलओ के लिए प्रोत्साहन 1000 रुपये 2000 रुपये 3 बीएलओ सुपरवाइजर 12000 रुपये 18000 रुपये 4 एईआरओ शून्य 25000 रुपये 5 ईआरओ शून्य 30000 रुपये इसके अतिरिक्त आयोग ने बिहार से प्राप्त विशेष आग्रह के आधार पर विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए बीएलओ को 6,000 रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि को भी स्वीकृति प्रदान की है।चुनाव आयोग के अनुसार यह कदम फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने और मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।.
चुनाव आयोग ने बूथ स्तरीय अधिकारियों के मानदेय में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। शनिवार शाम आयोग की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, बीएलओ का मानदेय 6000 रुपये से बढ़ाकर 12000 रुपये कर दिया है। इसी के साथ बीएलओ पर्यवेक्षकों का मानदेय भी 12000 रुपये से बढ़ाकर 18000 रुपये कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने बूथ स्तरीय अधिकारियों , बीएलओ सुपरवाइजर के अलावा सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के मानदेय को भी बढ़ाने की घोषणा की है। चुनाव आयोग की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि शुद्ध निर्वाचन सूची लोकतंत्र की आधारशिला है। चुनावी प्रक्रिया में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी , बीएलओ सुपरवाइजर और बीएलओ अत्यधिक मेहनत करते हैं और निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्वाचन सूची तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन सभी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने बीएलओ के वार्षिक मानदेय को दोगुना करने और बीएलओ सुपरवाइजरों के मानदेय में वृद्धि करने का निर्णय लिया है। मानदेय में पिछला संशोधन वर्ष 2015 में किया गया था। सबसे अहम बात यह है कि पहली बार एईआरओ को 25,000 रुपये और ईआरओ को 30,000 रुपये प्रतिवर्ष सम्मान राशि देने का फैसला लिया गया है, जबकि पहले इन पदों पर कोई अलग से मानदेय नहीं था। संशोधित मानदेय: क्रम संख्या पदनाम 2015 से प्रचलित मानदेय अब संशोधित मानदेय 1 बूथ स्तरीय अधिकारियों 6000 रुपये 12000 रुपये 2 निर्वाचन सूची संशोधन हेतु बीएलओ के लिए प्रोत्साहन 1000 रुपये 2000 रुपये 3 बीएलओ सुपरवाइजर 12000 रुपये 18000 रुपये 4 एईआरओ शून्य 25000 रुपये 5 ईआरओ शून्य 30000 रुपये इसके अतिरिक्त आयोग ने बिहार से प्राप्त विशेष आग्रह के आधार पर विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए बीएलओ को 6,000 रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि को भी स्वीकृति प्रदान की है।चुनाव आयोग के अनुसार यह कदम फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने और मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
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