FDI Rules: भारत सरकार ने एफडीआई से जुड़े नियमों में कुछ बदलाव किया है। इन नियमों के मुताबिक चीन की कंपनियों के लिए भी भारत में निवेश से जुड़े नियम बदल गए हैं।
नई दिल्ली: प्रेस नोट 3 के नियमों में बदलाव करते हुए भारत की थल सीमा से जुड़े देशों से फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट की राह आसान बनाने की मंजूरी पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट मीटिंग में मंगलवार को दी गई थी। इस बारे में बुधवार को कॉमर्स मिनिस्ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि चीन, हॉन्गकॉन्ग या भारत के पड़ोसी देशों में रजिस्टर्ड कंपनियों के मामले में नियम नरम नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ऑटोमैटिक रूट से एफडीआई की मंजूरी की रियायत केवल उन विदेशी कंपनियों के लिए होगी, जिनमें चीन सहित भारत के पड़ोसी देशों के लोगों की हिस्सेदारी 10% तक ही हो। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही विभिन्न सेक्टरों में एफडीआई के लिए जो सीमाएं हैं, उनका पालन होगा।'सस्ते माल' का टैग हटाएगा चीन, बना लिया तरक्की का प्लान, भारत की क्या स्थिति?क्या है नियम?अप्रैल 2020 में प्रेस नोट 3 की व्यवस्था लागू होने के बाद से यह नियम था कि किसी भी ऐसी विदेशी कंपनी के FDI प्रस्ताव को ऑटोमैटिक के बजाय शीर्ष सरकारी स्तर से मंजूरी की जरूरत होती थी, जिसमें चीन सहित भारतीय थल सीमा से जुड़े किसी भी देश के नागरिक के पास एक भी शेयर हो।डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड के जॉइंट सेक्रेटरी जय प्रकाश शिवहरे ने कहा कि थल सीमा से जुड़े पड़ोसियों के निवेशकों के लिए सभी प्रतिबंध अब भी लागू हैं। वहां के निवेशकों या इकाइयों के लिए कोई छूट नहीं दी गई है। छूट इन देशों से बाहर की विदेशी कंपनियों के मामले में है, जिनमें इन देशों के बेनेफिशियल ओनर्स के पास हिस्सेदारी 10% से कम हो और उनके पास कंपनी का कंट्रोल न हो।नीति आयोग ने की थी सिफारिशसाल 2025 में नीति आयोग ने चीन के निवेश के लिए नियम आसान करने का सुझाव दिया था। इसमें कहा गया था कि 24 फीसदी तक के एफडीआई के लिए जरूरी मंजूरी की जरूरत नहीं हो सकती है।यह सुझाव तब आया जब हाल के महीनों में भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार के संकेत दिखे। इसमें मंत्रियों के दौरे, अधिकारियों के बीच बातचीत और सीधी उड़ानें और टूरिज्म फ्लो बहाल करने की दिशा में प्रगति शामिल है। बॉर्डर के मुद्दों पर बातचीत तेज करने की कोशिशों ने भी रिश्तों में नरमी लाने में मदद की है।.
नई दिल्ली: प्रेस नोट 3 के नियमों में बदलाव करते हुए भारत की थल सीमा से जुड़े देशों से फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट की राह आसान बनाने की मंजूरी पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट मीटिंग में मंगलवार को दी गई थी। इस बारे में बुधवार को कॉमर्स मिनिस्ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि चीन, हॉन्गकॉन्ग या भारत के पड़ोसी देशों में रजिस्टर्ड कंपनियों के मामले में नियम नरम नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ऑटोमैटिक रूट से एफडीआई की मंजूरी की रियायत केवल उन विदेशी कंपनियों के लिए होगी, जिनमें चीन सहित भारत के पड़ोसी देशों के लोगों की हिस्सेदारी 10% तक ही हो। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही विभिन्न सेक्टरों में एफडीआई के लिए जो सीमाएं हैं, उनका पालन होगा।'सस्ते माल' का टैग हटाएगा चीन, बना लिया तरक्की का प्लान, भारत की क्या स्थिति?क्या है नियम?अप्रैल 2020 में प्रेस नोट 3 की व्यवस्था लागू होने के बाद से यह नियम था कि किसी भी ऐसी विदेशी कंपनी के FDI प्रस्ताव को ऑटोमैटिक के बजाय शीर्ष सरकारी स्तर से मंजूरी की जरूरत होती थी, जिसमें चीन सहित भारतीय थल सीमा से जुड़े किसी भी देश के नागरिक के पास एक भी शेयर हो।डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड के जॉइंट सेक्रेटरी जय प्रकाश शिवहरे ने कहा कि थल सीमा से जुड़े पड़ोसियों के निवेशकों के लिए सभी प्रतिबंध अब भी लागू हैं। वहां के निवेशकों या इकाइयों के लिए कोई छूट नहीं दी गई है। छूट इन देशों से बाहर की विदेशी कंपनियों के मामले में है, जिनमें इन देशों के बेनेफिशियल ओनर्स के पास हिस्सेदारी 10% से कम हो और उनके पास कंपनी का कंट्रोल न हो।नीति आयोग ने की थी सिफारिशसाल 2025 में नीति आयोग ने चीन के निवेश के लिए नियम आसान करने का सुझाव दिया था। इसमें कहा गया था कि 24 फीसदी तक के एफडीआई के लिए जरूरी मंजूरी की जरूरत नहीं हो सकती है।यह सुझाव तब आया जब हाल के महीनों में भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार के संकेत दिखे। इसमें मंत्रियों के दौरे, अधिकारियों के बीच बातचीत और सीधी उड़ानें और टूरिज्म फ्लो बहाल करने की दिशा में प्रगति शामिल है। बॉर्डर के मुद्दों पर बातचीत तेज करने की कोशिशों ने भी रिश्तों में नरमी लाने में मदद की है।
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