क्या आप जानते हैं कि आप गलत तरीके से चिकन बनाते हैं? जी हां, वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि लोग जिस तरीके से चिकन बनाते हैं या उसकी तैयारी करते हैं उससे कई खतरनाक बीमारियां होने का खतरा होता है, साथ ही उन्होंने सही तरीका बताया है-
पूरी दुनिया में चिकन खाया जाता है और खूब पसंद किया जाता है। अक्सर ऐसा कहा जाता है कि चिकन को पकाने से पहले धोना जरूरी होता है। जाहिर है सभी लोग मानते हैं कि पानी से धोने से चिकन पर लगी गंदगी, खून और बैक्टीरिया हट जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप जाने-अनजाने में अब तक गलती करते आ रहे हैं।हेल्थ एक्सपर्ट और कई देशों के फूड सेफ्टी विभागों ने साफ-साफ कहा है कि कच्चा चिकन धोना न सिर्फ बेकार है बल्कि बेहद खतरनाक भी है। ऐसा करने से चिकन पर मौजूद बैक्टीरिया पानी के छींटों के साथ पूरे किचन में फैल सकते हैं और फूड पॉइजनिंग का रिस्क कई गुना बढ़ जाता है। ऑस्ट्रेलिया की फूड सेफ्टी इंफॉर्मेशन काउंसिल ने चिकन को धोना पूरी तरह से एक मिथ यानी गलत धारणा बताया है। एक्सपर्ट बताते हैं कि चिकन धोने का कोई वैज्ञानिक फायदा नहीं है क्योंकि बैक्टीरिया चिकन की सतह पर बहुत मजबूती से चिपके रहते हैं और इन्हें सिर्फ पकाने की तेज गर्मी ही खत्म कर सकती है। उल्टा, चिकन धोने से छोटे-छोटे पानी के छींटे उड़कर बैक्टीरिया को और अधिक सतहों पर फैला देते हैं, जिससे बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।99% लोग कर रहे गलती CDC और USDA जैसे बड़े हेल्थ संगठनों ने कई बार चेतावनी जारी की है कि कच्चा चिकन धोना बहुत जोखिम भरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब चिकन धोते समय पानी स्प्लैश होकर दूर तक उड़ता है, तो उसके साथ बैक्टीरिया भी फैल जाते हैं, जो बाद में खाने या हाथों के जरिए पेट में चले जाते हैं और बीमारी पैदा कर देते हैं। एक सर्वे में पाया गया कि लगभग 99% लोग चिकन पकाने से पहले उसे बहते पानी में धोते हैं।चिकन धोने के नुकसान लोग इस गलतफहमी में रहते हैं कि धोने से चिकन साफ हो जाएगा, लेकिन असल में इसका उल्टा प्रभाव होता है। पानी के छींटे इतनी तेजी से इधर-उधर फैलते हैं कि बैक्टीरिया सिर्फ सिंक तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि किचन के काउंटर, बर्तन, सब्जियों और यहां तक कि आपके हाथों तक पहुंच जाते हैं। यह बैक्टीरिया आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन ये गंभीर इंफेक्शन पैदा कर सकते हैं।सैल्मोनेला बक्टेरिया का खतरा यह अमेरिका में सबसे आम बैक्टीरिया है और अनुमान है कि हर 25 में से 1 चिकन पैकेट में यह पाया जाता है। यह बैक्टीरिया गंभीर दस्त, उल्टी, पेट दर्द और तेज बुखार पैदा कर सकता है। हर साल अमेरिका में लगभग 10 लाख से अधिक लोग इससे बीमार होते हैं, 26500 अस्पताल में भर्ती होते हैं और लगभग 420 की मौत हो जाती है।ई.
कोलाई और लिस्टेरिया बैक्टीरिया का भी रिस्क यह बैक्टीरिया हर साल 2.6 लाख लोगों को प्रभावित करता है। यह पेट में तेज ऐंठन, रक्त वाले दस्त और डिहाइड्रेशन पैदा कर सकता है। लिस्टेरिया बैक्टीरिया भले ही कम पाया जाता है लेकिन यह खासकर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।कैंपिलोबैक्टर बैक्टीरिया का रिस्क यह बैक्टीरिया तेज बुखार, खूनी दस्त, उल्टी और कमजोरी का कारण बनता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ये बैक्टीरिया एक बार फैल जाएं तो इन्हें साफ करना बेहद मुश्किल हो जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार ये बैक्टीरिया सतहों पर कुछ घंटों से लेकर कई हफ्तों तक जिंदा रह सकते हैं। इन्हें सिर्फ अल्कोहल बेस्ड क्लीनर या ब्लीच ही पूरी तरह खत्म कर सकते हैं। सिर्फ पानी से धोने या हल्का पोछा लगाने से ये खत्म नहीं होते।चिकन बनाने का सही तरीका USDA सहित सभी हेल्थ एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि चिकन को बिना धोए सीधे पकाया जाए क्योंकि 165°F की गर्मी सभी बैक्टीरिया को खत्म कर देती है। सब्जियां और सलाद पहले काट लें ताकि कच्चे चिकन के संपर्क से संक्रमण का खतरा न रहे। किचन की सतहों को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करें। अगर चिकन पर हल्की गंदगी दिखे तो उसे बहते पानी में धोने के बजाय केवल गीले पेपर टॉवल से पोंछ लें। चिकन छूने के बाद 20 सेकंड तक हाथ धोना जरूरी है। वहीं पोल्ट्री को 165°F , बीफ-पोर्क-लैम्ब स्टेक को 145°F और कीमे वाले मांस को 160°F पर पकाने से बैक्टीरिया पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं और खाना 100% सुरक्षित बनता है। डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है।
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