Bottle Gourd Cultivation: गन्ने की कटाई के बाद किसान लौकी की किस्म अर्का बहार और पूसा नवीन उगा सकते हैं. किसानों को कम दिनों में अच्छा मुनाफा मिलेगा. खास बात यह है कि यह किस्म 400 से 450 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देती है.
इन दिनों गन्ने की कटाई हो रही है. कुछ किसान गन्ने की कटाई के बाद पेड़ी की फसल लेते हैं. जबकि कुछ किसानों के खेत गन्ने की कटाई के बाद खाली हो जाते हैं. ऐसे में इन खाली खेतों में किसान हरी सब्जियां उगा लें, तो वह अच्छा मुनाफा ले सकते हैं.
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि फरवरी का महीना लौकी की अगेती फसल लगाने के लिए बेहद ही उपयुक्त होता है. अगेती लौकी तेजी के साथ ग्रोथ करती है. लेकिन लौकी लगाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान भी रखना चाहिए. लौकी की फसल लगाते समय किस्म का ध्यान रखना भी जरूरी है. खेत की अंतिम जुताई करने से पहले गोबर की सड़ी हुई खाद का इस्तेमाल जरूर करें. गोबर की सड़ी हुई खाद को खेत में अच्छी तरह से बिखेर कर अंतिम जुताई कर दें. गोबर की खाद से मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा बढ़ेगी. लौकी की बेल तेजी के साथ बढ़ेगी और किसानों को अच्छा उत्पादन मिलेगा. खास बात यह है कि रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं करना होगा. लौकी की फसल लगाते समय उन्नत किस्म का चुनाव करना चाहिए. लौकी की किस्म अर्का बहार और पूसा नवीन जो कि किसानों को उच्च उत्पादन देने के लिए जानी जाती हैं. इन दो किस्म को अगर किसान इन दिनों लगा देते हैं तो उनको अच्छा मुनाफा मिलेगा. खास बात यह है कि अर्का बहार को किसान दोनों सीजन में उगा सकते हैं. लौकी की फसल से अगर किसान अच्छा उत्पादन लेना चाहते हैं तो वह जाल बनाकर लौकी की फसल उगा लें तो उनको ज्यादा मुनाफा होगा. जाल पर लौकी की बेल लगाने से रोग कम आते हैं और पैदा होने वाली उपज की गुणवत्ता अच्छी होती है. जिसकी वजह से किसानों को बाजार में अच्छा भाव मिलता है. अर्का बहार लौकी की एक लोकप्रिय किस्म है, जिसे उच्च उपज और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जाना जाता है. यह किस्म प्रति हेक्टेयर 400 से 450 क्विंटल तक उत्पादन दे सकती है. ये लौकी मध्यम आकार की होती है. इनका वजन लगभग 1 किलोग्राम तक होता है. छिलका हरा और चमकदार होता है. खास बात यह है कि यह किस्म दोनों सीजन में उगाई जा सकती है. यह 50 से 60 दिनों में उपज देने के लिए तैयार हो जाती है. लौकी की पूसा नवीन किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित किया गया है. यह अपनी उच्च उपज और बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती है. यह किस्म प्रति हेक्टेयर 320 क्विंटल तक उत्पादन दे सकती है. पूसा नवीन चूर्णिल और मृदुरोमिल आसिता जैसी बीमारियों के प्रति काफी हद तक प्रतिरोधी है. इसके फल बेलनाकार, सीधे और लगभग 550 ग्राम के होते हैं.
लौकी की सबसे ज्यादा उत्पादन देने वाली किस्म गन्ने के बाद कौन सी फसल लगाएं फरवरी महीने में कौन सी सब्जी लगा सकते हैं लोकल 18 How To Plant Gourd Crop The Highest Yielding Variety Of Gourd Which Crop To Plant After Sugarcane Which Vegetable Can Be Planted In The Month Of Fe Local 18
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