पश्चिमी दिल्ली के निर्माणाधीन बिजवासन रेलवे टर्मिनल पर यात्रियों को विमानों की आवाजाही का नजारा दिखेगा। रेलवे टर्मिनल के वेटिंग हॉल में एयरपोर्ट की ओर शीशे लगाए जाएंगे, जिससे यात्री बसों और रनवे पर विमानों को देख सकेंगे। एयरपोर्ट की थीम पर बन रहे इस टर्मिनल का वेटिंग एरिया प्रथम तल पर होगा और सभी प्लेटफार्मों से जुड़ा होगा। यह टर्मिनल परिवहन के...
गौतम कुमार मिश्रा, पश्चिमी दिल्ली। पश्चिम का द्वार कहे जाने वाले निर्माणाधीन बिजवासन रेलवे टर्मिनल पर यात्रियों को न सिर्फ रेल व बसों की आवाजाही के साथ विमानों की आवाजाही का भी नजारा दिखेगा। रोमांचित करने वाले इस दृश्य को यात्री देख सकें, इसके लिए रेलवे टर्मिनल के यात्री वेटिंग हॉल की एयरपोर्ट की ओर की दीवार पर शीशे लगाए जाएंगे। इस शीशे के दीवार से यात्रियों को टर्मिनल से सटे सड़क पर बसों की आवाजाही दिखेगी और इस सड़क से सटी चारदीवारी के ठीक उस पर रनवे पर दौड़ रहे विमानों का रोमांचित करने वाला दृश्य दिखेगा। फिलहाल रेलवे टर्मिनल का निर्माण कार्य जोरशोर से चल रहा है। एयरपोर्ट की थीम पर हो रहा निर्माण एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 से नजदीक इस रेलवे टर्मिनल का निर्माण दिल्ली के अन्य रेलवे टर्मिनल से कुछ अलग है। दिल्ली के अन्य रेलवे टर्मिनल में यात्रियों के लिए बनाया गया वेटिंग हॉल किसी एक एक प्लेटफार्म या टर्मिनल की मुख्य इमारत से जुड़ा होता है। लेकिन बिजवासन में जो टर्मिनल की मुख्य इमारत बन रही है, उसे रेलवे लाइन के ठीक उपर ऐसे बनाया गया है, जिससे सभी प्लेटफार्म आपस में जुड़े होंगे। यह वेटिंग एरिया भूतल पर न होकर प्रथम तल पर बनाया गया है। नीचे आने के लिए प्रत्येक प्लेटफार्म पर लिफ्ट के साथ सीढ़ी भी बनाई गई है। यह वेटिंग हॉल प्रत्येक प्लेटफार्म से जुड़ा है। इस वेटिंग हॉल की छत को सहारा देने के लिए जो लोहे के पीलर लगाए गए हैं, वे ठीक एयरपोर्ट के फोरकोर्ट एरिया में लगे पीलरों की तरह नजर आते हैं। इनका रंग भी एयरपोर्ट की तरह सफेद रखा गया है। वेटिंग हॉल की छत की ऊंचाई फर्श से बहुत अधिक नहीं है। करीब 15 मीटर यह ऊंची है। ऐसा इसलिए है क्योंकि रनवे के अत्यंत नजदीक होने के कारण इसकी ऊंचाई अधिक नहीं की जा सकती है। वेटिंग हॉल पूरी तरह वातानाकूलित होगा। यहां पंखे की कोई जरुरत नहीं होगी। परिवहन के सभी साधनों से जुड़ा है यह टर्मिनल बिजवासन रेलवे टर्मिनल से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर द्वारका अंतरराज्यीय बस टर्मिनल का निर्माण होना है। यहां से पश्चिमी भारत की ओर जाने वाली बसों की आवाजाही होगी। फिलहॉल रेलवे टर्मिनल दो मुख्य सड़कों के बीच है। एक तरफ द्वारका से गुरुग्राम को जोड़ने वाला मार्ग है। जो यूईआर व द्वारका एक्सप्रेसवे सीधे जुड़ा है। दूसरी सड़क एयरपोर्ट की दीवार से सटी है, जो एयरपोर्ट के परिधिय इलाके में बसे गांवों को गुरूग्राम या पश्चिमी दिल्ली से जोड़ती है। मेट्रो स्टेशन भी रेलवे टर्मिनल से एक किलोमीटर से भी कम की दूरी है। यह भी पढ़ें- Year Ender 2025: थोड़ा है, बहुत की जरूरत है.
.., दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुधार की दरकार वहीं, आइजीआइ एयरपोर्ट की बात करें तो नजदीकी मेट्रो स्टेशन एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन का हिस्सा है। इस स्टेशन के ठीक बाद टर्मिनल 3 मेट्रो स्टेशन है।
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