चीन ने अपने लगभग 200 पुराने शेनयांग J-6 लड़ाकू विमानों को अटैक ड्रोन में बदल दिया है। इन्हें ताइवान स्ट्रेट के पास छह एयर बेस पर तैनात किया गया है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीन ने कथित तौर पर अपने लगभग 200 पुराने सुपरसोनिक शेनयांग J-6 लड़ाकू विमानों को अटैक ड्रोन में बदल दिया है और उन्हें ताइवान स्ट्रेट के पास छह एयर बेस पर तैनात कर दिया है। इस बात का दावा अमेरिका स्थित मिशेल इंस्टीट्यूट फॉर एयरोस्पेस स्टडीज के एक अध्ययन में किया गया है। इंस्टीट्यूट की फरवरी की रिपोर्ट China Airpower Tracker में शामिल सैटेलाइट तस्वीरों में J-6 जैसे दिखने वाले विमान दिखाई देते हैं। ये ऐसे जेट हैं जो मूल रूप से 1960 के दशक में चीनी वायु सेना में शामिल हुए थे। इन विमानों के ड्रोन में बदले जाने की खबरों के बाद इन्हें फुजियान प्रांत के पांच और गुआंगदोंग प्रांत के एक अड्डे पर देखा गया है। क्रूज मिसाइलों की तरह काम करेगा ये प्लेफॉर्म वर्जीनिया के आर्लिंगटन स्थित मिशेल इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो और रिपोर्ट के लेखक जे.
माइकल डाहम के अनुसार, ताइवान पर चीन के संभावित हमले की स्थिति में इन बदले हुए ड्रोन विमानों को हमले के शुरुआती चरण में ही तैनात किया जा सकता है, जो सीधे निर्धारित लक्ष्यों की ओर उड़ान भरेंगे। उन्होंने आगे कहा कि ये प्लेटफॉर्म, स्वायत्त या रिमोट से संचालित होने वाले सिस्टम के बजाय पारंपरिक मानवरहित हवाई वाहनों की तुलना में क्रूज मिसाइलों की तरह ज्यादा काम करेंगे। किसके खिलाफ होगा इसका इस्तेमाल? अमेरिका के पूर्व नौसेना खुफिया अधिकारी डाहम ने रॉयटर्स को बताया, इनका इस्तेमाल ताइवान, अमेरिका या सहयोगी सेनाओं के ठिकानों पर बड़ी संख्या में हमला करने के लिए किया जाएगा, जिससे हवाई सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ताइवान स्ट्रेट के सबसे करीब मौजूद हवाई अड्डे किसी भी संघर्ष की स्थिति में ताइवान और उसके सहयोगियों के जवाबी हमलों की चपेट में आ सकते हैं। डाहम ने कहा, इसके पीछे का मकसद पीपल्स लिबरेशन आर्मी के किसी भी ऑपरेशन के शुरुआती कुछ घंटों के भीतर ही इन सभी ड्रोनों को एक साथ लॉन्च कर देना है। शेनयांग J-6 के ड्रोन संस्करण को दिया गया J-6W नाम ताइवान पर जबरदस्ती कब्जा करने के लिए चीन सैन्य ड्रोनों में भारी निवेश कर रहा है। चीन का वैश्विक कमर्शियल ड्रोन बाजार पर पूरी तरह से दबदबा है और वह अब सैन्य ड्रोन तकनीकों में भी भारी निवेश कर रहा है। उसका कहना है कि वह ऐसी क्षमताएं विकसित कर रहा है, जिनकी जरूरत पड़ने पर ताइवान पर जबरदस्ती कब्जा करने के लिए जरूरत होगी। बीजिंग ताइवान को अपने ही क्षेत्र का हिस्सा मानता है और उसने इस पर अपना नियंत्रण स्थापित करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से कभी भी इनकार नहीं किया है। वहीं, ताइवान इन दावों को सिरे से खारिज करता है और उसका कहना है कि इस द्वीप का भविष्य तय करने का अधिकार केवल यहां के लोगों को ही है। चीन कब करेगा ताइवान पर हमला? इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने यह आकलन किया था कि चीन फिलहाल 2027 में ताइवान पर हमला करने की कोई योजना नहीं बना रहा है। यह आकलन पेंटागन की हाल ही में जारी हुई अपनी वार्षिक रिपोर्ट के बिल्कुल विपरीत है। पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया था कि बीजिंग का लक्ष्य उस वर्ष तक ताइवान को लेकर होने वाले किसी भी युद्ध को लड़ने और जीतने की क्षमता विकसित कर लेना है। ताइवान की क्या है तैयारी? ताइवान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि ऐसे ड्रोनों का मुख्य मकसद किसी हमले की शुरुआती लहर में ताइवान के एयर डिफेंस सिस्टम को थकाना होगा। अधिकारी ने आगे कहा कि इन्हें रोकना एक लागत-दक्षता की दुविधा पैदा करेगा, क्योंकि दूर से ही अपेक्षाकृत कम लागत वाले लक्ष्यों को बेअसर करने के लिए महंगी मिसाइलों की जरूरत पड़ सकती है। इस हफ्ते संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट में ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने अगली पीढ़ी के काउंटर-ड्रोन सिस्टम को हासिल करने की प्रक्रिया तेज करने की योजनाओं की रूपरेखा पेश की। ताइपे के राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा अनुसंधान संस्थान ने पहले ऐसे ड्रोन की तैनाती को असममित युद्ध का एक ऐसा रूप बताया था जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चीन विकसित कर रहा नए ड्रोन चीन मानवरहित हवाई वाहनों की एक नई पीढ़ी भी विकसित कर रहा है, जिसमें एक स्टेल्थ अटैक ड्रोन भी शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ड्रोन किसी विमानवाहक पोत से भी संचालित हो सकता है। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि बीजिंग पहले से ही छद्म अभियानों में UAVs का परीक्षण कर रहा है। इसे ताइवान पर संभावित आक्रमण के लिए की जा रही रिहर्सल के तौर पर देखा जा सकता है। दो इंजन वाला Shenyang J-6 असल में 1950 के दशक के Mikoyan-Gurevich MiG-19 से बनाया गया था। यूनाइटेड स्टेट्स एयर फोर्स एयर यूनिवर्सिटी के अनुसार, यह विमान सोवियत-डिजाइन किए गए दूसरे मॉडलों के साथ मिलकर 1990 के दशक के मध्य तक चीन के फाइटर बेड़े की रीढ़ बना रहा। पिछले साल सितंबर में पीएलए एयर फोर्स ने पूर्वोत्तर चीन के Changchun Air Show में ऐसे ही एक बदले हुए जेट को दिखाया। यह भी पढ़ें: ईरान युद्ध से 5 सीख: अमेरिका, भारत और अन्य देशों के मुकाबले चीन अपनी मिसाइल रक्षा प्रणाली को कर रहा मजबूत
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