संत बिहारीदास की सबसे प्रमुख पहचान भक्तमाल की कथा से जुड़ी है। इस कारण उन्हें अक्सर 'भक्तमाली श्री बिहारीदास जी महाराज' कहा जाता है।
ज्योति शर्मा, मथुरा: वृंदावन धाम के प्रसिद्ध रसिक संत श्रीबिहारीदास महाराज कुंज आश्रम पहुंचे। यहां पहुंचते ही उन्होंने प्रेमानंद महाराज को साष्टांग प्रणाम किया। प्रेमानंद महाराज ने भी उनको ऐसा ही सम्मान दिया। दोनों संतों में काफी देर तक आध्यात्मिक चर्चा हुई। संवाद के दौरान श्रीबिहारीदास की सुनाई गई राम की चौपाई को सुनकर प्रेमानंद महाराज भावुक हो गए।श्रीबिहारीदास को मुख्य रूप से उनकी गहरी भगवत-भक्ति और विशेष रूप से भक्तमाल की कथा के निरंतर वाचन के लिए जाना जाता है। संत समाज में उनकी विशेष पहचान है। भक्तमाल कथा से है प्रमुख पहचान भक्तमाली संत: उनकी सबसे प्रमुख पहचान भक्तमाल की कथा से जुड़ी है, जिस कारण उन्हें अक्सर 'भक्तमाली श्री बिहारीदास जी महाराज' कहा जाता है। वह भक्तों और संतों के चरित्रों का वर्णन करने वाली इस कथा को प्रतिदिन बांके बिहारी मंदिर के पास स्थित राधा कृपा आश्रम में सुनाते हैं, जिसे सुनने के लिए दूर-दूर से संत और श्रद्धालु आते हैं। हरिदास संप्रदाय से जुड़ाव: उन्हें श्री हरिदास संप्रदाय के रसिकाचार्यों में से एक माना जाता है, जो वृंदावन में श्री राधा-कृष्ण की निकुंज लीला और माधुर्य भक्ति पर जोर देता है। सरल स्वभाव: उनकी कथाओं और मुलाकातों में उनका सरल, भगवत-प्रेमी और विनम्र स्वभाव झलकता है।दोनों संतों में हुआ आध्यात्मिक सत्संगदोनों संतों की मुलाकात अत्यंत भावपूर्ण रही, जहां दोनों ने एक-दूसरे को आदरपूर्वक प्रणाम किया। इस भेंट का मुख्य विषय भक्तमाली कथा रहा, जिस पर दोनों के बीच गहन संवाद हुआ।365 दिन भक्तमाली कथा का आयोजनबिहारीदास महाराज ने प्रेमानंद महाराज को बताया कि बांके बिहारी मंदिर के समीप स्थित राधा कृपा आश्रम में निरंतर 365 दिन भक्तमाली कथा का आयोजन होता है, जिसका संत समाज हर दिन श्रवण करता है। उन्होंने संतों की कथा के प्रति निष्ठा बताते हुए कहा कि अगर एक भी दिन कथा सुनने को न मिले तो संत कहते हैं कि हम पर बुलडोजर चला दो।इस पर संत प्रेमानंद महाराज जी ने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा, 'हमको लगा कि शायद राम जुआई में नहीं होती। लेकिन बहुत अच्छा है, भक्त और भगवान की जय हो।' उन्होंने श्रीमथुरादास की कथा में भी ऐसा ही सुख मिलने की बात कही।श्रीजी का मंदिर तैयार होने की दी सूचनामुलाकात के दौरान बिहारीदास ने प्रेमानंद महाराज को सूचित किया कि उनके द्वारा श्रीजी का मंदिर तैयार हो गया है, जिसकी नींव में उन्होंने पांच ईंटें रखी थीं। उन्होंने प्रेमानंद जी को मंदिर दर्शन के लिए 10 मिनट के लिए आकर किशोरी जी को देखने का निमंत्रण भी दिया। शिष्य ने अष्टसखी की भाव चौपाई सुनाईसंवाद के दौरान, श्रीबिहारीदास द्वारा सुनाई गई राम की चौपाई को सुनकर प्रेमानंद महाराज भावुक हो गए। इस दौरान उनके साथ आए एक शिष्य ने अष्टसखी की भाव चौपाई सुनाई, जिसने प्रेमानंद महाराज को भाव-विभोर कर दिया।.
ज्योति शर्मा, मथुरा: वृंदावन धाम के प्रसिद्ध रसिक संत श्रीबिहारीदास महाराज कुंज आश्रम पहुंचे। यहां पहुंचते ही उन्होंने प्रेमानंद महाराज को साष्टांग प्रणाम किया। प्रेमानंद महाराज ने भी उनको ऐसा ही सम्मान दिया। दोनों संतों में काफी देर तक आध्यात्मिक चर्चा हुई। संवाद के दौरान श्रीबिहारीदास की सुनाई गई राम की चौपाई को सुनकर प्रेमानंद महाराज भावुक हो गए।श्रीबिहारीदास को मुख्य रूप से उनकी गहरी भगवत-भक्ति और विशेष रूप से भक्तमाल की कथा के निरंतर वाचन के लिए जाना जाता है। संत समाज में उनकी विशेष पहचान है। भक्तमाल कथा से है प्रमुख पहचान भक्तमाली संत: उनकी सबसे प्रमुख पहचान भक्तमाल की कथा से जुड़ी है, जिस कारण उन्हें अक्सर 'भक्तमाली श्री बिहारीदास जी महाराज' कहा जाता है। वह भक्तों और संतों के चरित्रों का वर्णन करने वाली इस कथा को प्रतिदिन बांके बिहारी मंदिर के पास स्थित राधा कृपा आश्रम में सुनाते हैं, जिसे सुनने के लिए दूर-दूर से संत और श्रद्धालु आते हैं। हरिदास संप्रदाय से जुड़ाव: उन्हें श्री हरिदास संप्रदाय के रसिकाचार्यों में से एक माना जाता है, जो वृंदावन में श्री राधा-कृष्ण की निकुंज लीला और माधुर्य भक्ति पर जोर देता है। सरल स्वभाव: उनकी कथाओं और मुलाकातों में उनका सरल, भगवत-प्रेमी और विनम्र स्वभाव झलकता है।दोनों संतों में हुआ आध्यात्मिक सत्संगदोनों संतों की मुलाकात अत्यंत भावपूर्ण रही, जहां दोनों ने एक-दूसरे को आदरपूर्वक प्रणाम किया। इस भेंट का मुख्य विषय भक्तमाली कथा रहा, जिस पर दोनों के बीच गहन संवाद हुआ।365 दिन भक्तमाली कथा का आयोजनबिहारीदास महाराज ने प्रेमानंद महाराज को बताया कि बांके बिहारी मंदिर के समीप स्थित राधा कृपा आश्रम में निरंतर 365 दिन भक्तमाली कथा का आयोजन होता है, जिसका संत समाज हर दिन श्रवण करता है। उन्होंने संतों की कथा के प्रति निष्ठा बताते हुए कहा कि अगर एक भी दिन कथा सुनने को न मिले तो संत कहते हैं कि हम पर बुलडोजर चला दो।इस पर संत प्रेमानंद महाराज जी ने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा, 'हमको लगा कि शायद राम जुआई में नहीं होती। लेकिन बहुत अच्छा है, भक्त और भगवान की जय हो।' उन्होंने श्रीमथुरादास की कथा में भी ऐसा ही सुख मिलने की बात कही।श्रीजी का मंदिर तैयार होने की दी सूचनामुलाकात के दौरान बिहारीदास ने प्रेमानंद महाराज को सूचित किया कि उनके द्वारा श्रीजी का मंदिर तैयार हो गया है, जिसकी नींव में उन्होंने पांच ईंटें रखी थीं। उन्होंने प्रेमानंद जी को मंदिर दर्शन के लिए 10 मिनट के लिए आकर किशोरी जी को देखने का निमंत्रण भी दिया। शिष्य ने अष्टसखी की भाव चौपाई सुनाईसंवाद के दौरान, श्रीबिहारीदास द्वारा सुनाई गई राम की चौपाई को सुनकर प्रेमानंद महाराज भावुक हो गए। इस दौरान उनके साथ आए एक शिष्य ने अष्टसखी की भाव चौपाई सुनाई, जिसने प्रेमानंद महाराज को भाव-विभोर कर दिया।
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