राहुल गांधी ने साल 2004 में चुनावी राजनीति में कदम रखा और अमेठी लोकसभा क्षेत्र से अपने पिता राजीव गांधी की विरासत को संभालने का जिम्मा उठाया. (javedakhtar90)
19 जून, 1970 को राहुल गांधी की पैदाइश के अगले ही साल उनकी दादी व तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 'गरीबी हटाओ' का नारा दिया. अब 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले जब कांग्रेस की कमान राहुल गांधी संभाल रहे हैं तो उन्होंने 48 साल बाद गरीबी पर आखिरी प्रहार नारा देते हुए देश की 20 फीसदी गरीबी जनता को आर्थिक मदद देने का वादा किया है.
दादी इंदिरा गांधी और पिता राजीव गांधी के रूप में अपने घर में दो प्रधानमंत्री देखने वाले राहुल गांधी अब खुद देश के सर्वोच्च कुर्सी के लिए सबसे बड़ी सियासी जंग लड़ रहे हैं, जहां उनका मुकाबला मौजूदा राजनीति के सबसे मजबूत नेता माने जाने वाले नरेंद्र मोदी से है. हालांकि, संघर्ष और चुनौतियों को राहुल गांधी ने बचपन से ही देखा है और इसका जिक्र वो सार्वजनिक मंचों से भी करते रहे हैं. 1984 में राहुल गांधी की दादी इंदिरा गांधी का उनके ही सुरक्षाकर्मी ने मर्डर कर दिया. इसके बाद 1991 में उनके पिता व पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एक चुनावी सभा के दौरान आत्मघाती बम धमाके में हत्या कर दी गई. इस तरह राहुल गांधी ने कम उम्र से घर में मुश्किल वक्त देखा. राहुल गांधी ने अपना बचपन दिल्ली और उत्तराखंड के देहरादून में बिताया. राहुल गांधी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा दिल्ली के सेंट कोलंबिया स्कूल से की और इसके बाद वो 1981 से 1983 तक देहरादून के मशहूर दून स्कूल में पढ़े. इसके अगले ही साल 1984 में उनकी दादी इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई.राहुल गांधी ने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की और उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी चले गए. अपने पिता राजीव गांधी की हत्या के बाद सुरक्षा कारणों के चलते राहुल अपनी ग्रेजुएश के दूसरे साल की पढ़ाई के लिए फ्लोरिडा के रोलिन्स कॉलेज चले गए. राहुल गांधी ने 1994 में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. इसके एक साल बाद उन्होंने ट्रिनिटी कॉलेज कैम्ब्रिज से एम. फिल किया.राहुल गांधी ने अपने प्रोफेशन की शुरुआत लंदन स्थित एक मैनेजमेंट कंस्लटेंसी फर्म मॉनिटर ग्रुप के साथ की. राजनीति में आने से पहले वो दूसरे फील्ड में अपना करीयर बनाने को लेकर काफी संजीदा थे. राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी भी अपने परिवार को राजनीति से अलग रखना चाहती थीं. साल 2002 में राहुल गांधी भारत लौट आए और मुंबई में उन्होंने अपनी तकनीकी सलाहकार संस्था स्थापित की, जहां उन्होंने निदेशक के तौर पर अपनी टीम का नेतृत्व किया.राहुल गांधी ने साल 2004 में चुनावी राजनीति में कदम रखा और अमेठी लोकसभा क्षेत्र से अपने पिता राजीव गांधी की विरासत को संभालने का जिम्मा उठाया. बीजेपी का शाइनिंग इंडिया नारा इस चुनाव में पूरी तरह फेल हो गया और अमेठी सीट से राहुल गांधी ने अपने पहले चुनाव में 66 फीसदी वोट पाते हुए जीत दर्ज की. राहुल गांधी ने बहुजन समाज पार्टी के चंद्र प्रकाश मिश्रा को 2 लाख 90 हजार से ज्यादा मतों से हराया. 2009 के लोकसभा चुनाव में उनका ग्राफ और ज्यादा बढ़ा और राहुल गांधी ने इस चुनाव में 72 फीसदी वोट हासिल करते हुए बहुजन समाज पार्टी के अपने प्रतिद्वंदी आशीष शुक्ला को करीब 3 लाख 70 हजार मतों से मात दी. हालांकि, 2014 में जब मोदी लहर चली तो राहुल गांधी की जीत का अंतर सिमट गया और उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी स्मृति ईरानी को 1 लाख 7 हजार मतों से हराया. राहुल गांधी को इस चुनाव में महज 47 फीसदी वोट ही मिल सके और स्मृति ईरानी ने 34 फीसदी वोट पाए. इससे पहले 2007 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए एक उच्च स्तर के कांग्रेस अभियान में उन्हें प्रमुख व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया. हालांकि पार्टी को इस चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जिसके चलते राहुल को काफी आलोचना भी झेलना पड़ी. राहुल को 24 सितंबर 2007 में पार्टी सचिवालय के एक फेरबदल में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति का महासचिव नियुक्त किया गया. 2007 के विधानसभा चुनाव में फेल होने के बाद 2009 में राहुल गांधी को खूब वाहवाही मिली, जब यूपी में पार्टी ने 21 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की. इस तरह पार्टी में राहुल गांधी का कद बढ़ता चला गया.19 जनवरी 2013 को जयपुर चिंतन शिविर में राहुल गांधी को कांग्रेस में बड़ा पद देते हुए पार्टी उपाध्यक्ष बनाया गया. इसके साथ ही राहुल गांधी अधिकृत तौर पर पार्टी में नंबर दो की हैसियत वाले नेता बन गए. इसके बाद उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया, जिसके लिए आज भी विरोधी उन्हें निशाने पर लेते हैं. सितंबर 2013 में राहुल गांधी ने मनमोहन सिंह सरकार द्वारा लाए सजायाफ्ता नेताओं को संरक्षण देने वाले अध्यादेश को पूरी तरह से न सिर्फ बकवास कर दिया बल्कि प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह कहा कि यह अध्यादेश फाड़कर फेंक देना चाहिए. दागी सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों को बचाने वाला वह अध्यादेश राहुल गांधी ने फाड़ दिया, जिसका नतीजा ये हुआ कि नेताओं को संरक्षण नहीं मिल सका और 2014 के लोकसभा चुनाव में आरजेडी नेता लालू प्रसाद यादव चुनाव नहीं लड़ सके. हालांकि, 2014 में कांग्रेस सिर्फ 44 सीटों पर सिमटकर रह गई. लेकिन अब कांग्रेस पार्टी का ग्राफ बढ़ा है और इसका श्रेय राहुल गांधी को गया है. राहुल गांधी ने दिसंबर 2017 में कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में पार्टी की कमान संभाली. इससे ठीक पहले उन्होंने गुजरात विधानसभा चुनाव में जमकर चुनाव प्रचार किया और कांग्रेस के लिए उत्साहजनक नतीजे आए. इसके बाद जब 2018 में कर्नाटक में चुनाव हुए तो पार्टी यहां जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाने में कामयाब रही. 2018 के आखिर में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस ने सरकार बनाई, जिसने कांग्रेस में जान फूंकने का काम किया और इसका भी पूरा श्रेय राहुल को दिया गया. अब राहुल के सामने 2019 लोकसभा चुनाव की चुनौती है और इस रण में उनका साथ देने के लिए उनकी बहन प्रियंका गांधी भी मैदान में उतर आई हैं.
United States Latest News, United States Headlines
Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.
बिहार में कांग्रेस 9 सीटों पर लड़ेगी चुनाव, राहुल-तेजस्वी की मुलाकात में लगेगी मुहर : सूत्रबिहार में महागठबंधन (Bihar) के बीच अब तक सीटों का बंटवारा नहीं हो सका है. पहले कांग्रेस 11 सीटों पर अड़ी थी, लेकिन अब सूत्रों के हवाले से ख़बर है कि कांग्रेस से 9 सीटों पर बात बन गई है. हालांकि कांग्रेस एक और सीट पर ज़ोर दे रही है. तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की मुलाक़ात में डील पर फ़ाइनल मुहर लग जाएगी और फिर सीट बंटवारे का एलान कर दिया जाएगा.
Read more »
जम्मू: CRPF कैंप में गोलीबारी में 3 जवान मरेउधमपुर में बुधवार रात में सीआरपीएफ़ कैंप में गोलीबारी में तीन जवानों की मौत हुई.
Read more »
फरवरी में अल्टो की सबसे ज्यादा 24751 यूनिट बिकीं, टॉप-6 में सभी मारुति की गाड़ियांAlto best selling PV model in Feb; Maruti makes clean sweep of top six spots | स्विफ्ट का दूसरा नंबर, पिछले महीने इसकी 18224 यूनिट बिकीं टॉप-10 में ह्युंडई की 3 और टाटा मोटर्स की सिर्फ 1 कार
Read more »
1971 में इंदिरा और अब 2019 में राहुल गांधी ने खेला सबसे बड़ा चुनावी दांव - Amarujala1971 में इंदिरा और अब 2019 में राहुल गांधी ने खेला सबसे बड़ा चुनावी दांव RahulGandhi INCIndia LoksabhaElections2019 votekaro वोटकरो Mahasangram2019
Read more »
शत्रुघ्न सिन्हा ने की राहुल गांधी की तारीफ, कहा- मास्टर ऑफ सिचुएशन का मास्टरस्ट्रोक-Navbharat Timesलोकसभा चुनाव 2019 न्यूज़: पटना साहिब से बीजेपी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की दिल खोलकर तारीफ की। उन्होंने राहुल गांधी को मास्टर ऑफ सिचुएशन बताया और उनकी न्यूनतम आय गारंटी योजना को मास्टरस्ट्रोक कहा।
Read more »
यूपी: बीजेपी की नई लिस्ट में इनका कटा पत्ता, मेनका-वरुण गांधी की सीटें बदलींबीजेपी ने अपने वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को कानपुर से टिकट नहीं दिया है. उनकी जगह यूपी सरकार के मंत्री सत्यदेव सिंह पचौरी को टिकट दिया गया है. कुशीनगर सीट से भी मौजूदा सांसद राजेश पांडेय का टिकट काट दिया गया है, उनकी जगह योगी आदित्यनाथ के करीबी माने जाने वाले विजय दुबे को मौका दिया गया है.
Read more »
