सिब्बल की डिनर के बाद भी क्यों चुप हैं लालू, नमक का हक कितनी ईमानदारी से अदा करेंगे विपक्षी नेता?
सत्ताधारी बीजेपी के सामने बिखरा विपक्ष अचानक से कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल के घर पर हुए डिनर के बाद सुर्खियों में है। इस डिनर के बाद सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि क्या सच में विपक्षी नेता इस बात को लेकर गंभीर हैं कि वह एकजुट होकर बीजेपी के खिलाफ उतरने को तैयार हैं। कुछ लोग इस डिनर की तुलना 2004 में सोनिया गांधी ओर से बुलाई गई डिनर डिप्लोमेसी से भी कर रहे हैं। ऐसे में इस बात को समझना बेहद जरूरी है कि क्या वास्तव में कपिल सिब्बल के घर पर डिनर करने जुटे विभिन्न विपक्षी दलों के नेता बीजेपी को हराने की खातिर एकजुट रहने को तैयार हैं। या फिर सिब्बल का यह भोज 2018 में सोनिया गांधी की ओर से दिए गए डिनर की तरह साबित होगा।कांग्रेस के पूर्व सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के घर पर सोमवार देर शाम दी गई डिनर पार्टी में कुल 17 विपक्षी दल के 45 नेता शामिल हुए। शामिल होने वाले दलों में कांग्रेस के अलावा, टीएमसी, एनसीपी, टीडीपी, आरजेडी, टीआरएस, बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस, अकाली दल, डीएमके, शिवसेना, सपा, सीपीएम, सीपीआई, आप, नेशनल कॉन्फ्रेंस, आरएलडी जैसे दल शामिल थे। डिनर में पहुंचने वाले प्रमुख नेताओं में कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद, पी चिदंबरम, आनंद शर्मा, पृथ्वीराज चव्हाण, संदीप दीक्षित, मनीष तिवारी, भूपिंदर सिंह हुड्डा, शशि थरूर, सुभाष चोपड़ा व अरविंदर सिंह लवली, एनसीपी के शरद पवार व प्रफुल्ल पटेल, आरजेडी के लालू प्रसाद यादव व मनोज झा, सपा के अखिलेश यादव व रामगोपाल यादव, टीएमसी के डेरेक ओ ब्रॉयन, डीएमके के तिरुचि शिवा, वाईएसआर कांग्रेस के अयोध्या रामी रेड्डी, सीपीआई के डी राजा, सीपीएम के सीताराम येचुरी, शिवसेना के संजय राउत, आप के संजय सिंह, बीजेडी के पिनाकी मिश्र, टीडीपी के जयदेव गाला, अकाली दल के नरेश गुजराल, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला शामिल थे।2004 के डिनर से कितना अलग है सिब्बल का भोज साल 2004 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने विपक्षी नेताओं को डिनर पर बुलाया था। इसी डिनर में सोनिया गांधी ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की नींव रखी थी। इस डिनर के बाद आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने पान चबाते हुए कहा था कि वह इस बार क्वीन मेकर बनने जा रहे हैं। इस डिनर की खास बात यह थी कि इसमें उस समय के लगभग सभी विपक्षी दलों के प्रमुख चेहरे पहुंचे थे। सभी नेताओं ने आम सहमति बनाकर चुनाव में उतरे और सफलता भी हासिल की थी। ठीक इसी तर्ज पर सोनिया गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 17 विपक्षी दलों के नेताओं को अपने आवास पर डिनर पर बुलाया था। डिनर से ठीक पहले सोनिया गांधी ने विपक्षी पार्टियों से अपील करते हुए कहा था कि वह राष्ट्र के हित में अपने छोटे-मोटे मतभेद भुला दें और एक मंच पर आ जाएं। लेकिन यह डिनर पार्टी पूरी तरह फेल साबित हुई। क्योंकि इसमें विपक्ष की अहम ताकत ममता बनर्जी शामिल नहीं हुई थीं। इसके अलावा लालू यादव जेल में होने के चलते यहां नहीं पहुंच पाए थे। कई और अहम विपक्षी दलों के नेता इस डिनर में नहीं पहुंच पाए थे। इतना ही नहीं डिनर के बाद अलग-अलग दलों के नेताओं ने अलग-अलग बयान दिए। किसी के बयान से ये स्पष्ट नहीं हो पाया था कि वे किसी एक चेहरे को आगे कर चुनाव में उतरने को तैयार हैं। इसी बिखराव नतीजा रहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भी एनडीए प्रचंड बहुमत हासिल करने में सफल रही।जहां तक कपिल सिब्बल के डिनर भोज का सवाल है तो यहां गौर करने वाली बात यह है कि इस इसमें सोनिया गांधी के परिवार का कोई सदस्य शामिल नहीं हुआ। इस डिनर को देखकर ऐसा लगा जैसे कांग्रेस के अंदर वरिष्ठ नेताओं की बनी टोली G-23 ने इस डिनर का आयोजन कराया था। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि अन्य विपक्षी दल किसपर यकीन करें सोनिया गांधी के नेतृत्व पर या कांग्रेस के अंदर बने G-23 टोली पर। अगर ये भी मान लिया जाए कि G-23 ही कांग्रेस नेतृत्व अपने हाथों में लेने जा रही है कि यहां ये भी तो स्पष्ट नहीं है कि आखिर इस गुट का नेतृत्व कौन कर रहा है।कपिल सिब्बल के घर पर हुई डिनर के बाद किसी भी विपक्षी नेता ने मीडिया में आकर कोई ऐसा बयान नहीं दिया जिससे कि वे अपने मंसूबे को जनता तक पहुंचा सकें। आलम यह दिखा कि इस डिनर में शामिल होने पहुंचे लालू यादव, शरद यादव, संजय राउत, डेरेक ओ ब्रॉयन जैसे बोलक्कड़ नेता भी मीडिया के कैमरों से नजरें बचाते हुए दिखे। कुल मिलाकर ये भी कहा जा सकता है कि विपक्षी नेता डिनर में पहुंचे तो जरूर लेकिन संकोची और सहमे हुए कदमों के साथ।इतना ही नहीं डिनर के दौरान हुई बातचीत में तमाम विपक्षी नेताओं ने कांग्रेस के सीनियर नेता अहमद पटेल को याद किया। कई नेताओं ने कहा कि पटेल ऐसे नेता थे, जो न सिर्फ सब तक पहुंचने की कोशिश करते थे, बल्कि सबकी पहुंच में रहते थे। कई नेताओं ने उनकी कमी का जिक्र करते हुए विपक्ष में तालमेल के अभाव का भी जिक्र किया। यानी इस डिनर के बाद भी स्पष्ट नहीं हो पाया कि विपक्ष की अगुवाई करने वाला चेहरा कौन होगा।इस डिनर के क्या मायने समझे देश की जनता? 17 विपक्षी दलों के नेताओं के डिनर में शामिल होने के बाद भी कोई निष्कर्ष नहीं निकलने पर देश की जनता क्या समझे। सिर्फ इतना भर कह देने से कि बीजेपी को हराने के लिए विपक्षी दलों के सामने एकजुट होने के अलावा कोई विकल्प नहीं है से क्या जनता उनपर भरोसा करने को तैयार होगी? डिनर से इतर देखें तो विपक्षी ताकत का चेहरा बनने के लिए ममता बनर्जी, शरद पवार, एमके स्टालिन समेत कई चेहरे अपनी दावेदारी पहले से ही दिखा रहे हैं। वहीं बीजेपी के सहयोगी नीतीश कुमार ने भी हाल के दिनों में कुछ ऐसे फैसले लिए हैं जिससे वे भी बीजेपी के खिलाफ अपनी दावेदारी करने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे में जनता के सामने अभी भी क्लियरिटी नहीं है कि वह विपक्षी ताकतों पर कितना यकीन करे।देश-दुनिया की खबरें, आपके शहर का हाल, एजुकेशन और बिज़नेस अपडेट्स, फिल्म और खेल की दुनिया की हलचल, वायरल न्यूज़ और धर्म-कर्म.
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