ऑनलाइन शॉपिंग करते समय यह पता करना मुश्किल होता है कि सामान किस देश में बना है। लेकिन जल्दी ही यह समस्या दूर होने वाली है। सरकार ने इस बारे में एक प्रस्ताव रखा है। इसके मुताबिक ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म्स के लिए 'कंट्री ऑफ ओरिजिन' का फिल्टर देना अनिवार्य हो...
नई दिल्ली: भारत में ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म्स के लिए 'कंट्री ऑफ ओरिजिन' का फिल्टर देना अनिवार्य हो जाएगा। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इसे लेकर एक नया प्रस्ताव रखा है। इस कदम का मकसद ऑनलाइन बाजार में और ज्यादा पारदर्शिता लाना है। यह बदलाव इसलिए किया जा रहा है ताकि ग्राहक ऑनलाइन शॉपिंग करते समय आसानी से जान सके कि कोई प्रोडक्ट किस देश का है और सोच-समझकर खरीदारी का फैसला ले सके।मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि नए नियमों के ड्राफ्ट के मुताबिक, विदेश से मंगाकर सामान बेचने वाली हर ई-कॉमर्स कंपनी को अपने प्रोडक्ट्स के साथ 'कंट्री ऑफ ओरिजिन' का एक ऐसा फिल्टर देना होगा, जिससे ग्राहक आसानी से प्रोडक्ट्स को खोज कर सके और इसे छांट सकें। इस फीचर से ग्राहकों का ढेर सारे प्रोडक्ट्स के बीच ऐसी जानकारी ढूंढने में लगने वाला समय बचेगा।हमारी आरामतलबी है ई-कॉमर्स की ताकत, छोटे कारोबारियों को हो रहा बड़ा नुकसानवोकल फॉर लोकलइन नियमों के ड्राफ्ट को विभाग की वेबसाइट पर डाल दिया गया है और सभी संबंधित पक्षों से 22 नवंबर तक अपनी राय और सुझाव मांगे गए हैं। यह बदलाव सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'वोकल फॉर लोकल' अभियानों को भी सीधे तौर पर बढ़ावा देगा, क्योंकि इससे 'मेड इन इंडिया' प्रोडक्ट्स आसानी से खोजे जा सकेंगे। उम्मीद है कि इससे भारतीय निर्माताओं को बराबरी का मौका मिलेगा। देसी प्रोडक्ट्स को भी विदेशी सामानों के बराबर विजिबिलिटी मिलेगी और ग्राहक देश में बने सामान को खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे।मंत्रालय के मुताबिक, 'कंट्री ऑफ ओरिजिन' फिल्टर से अधिकारियों को भी यह निगरानी करने में मदद मिलेगी कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। वे हर लिस्टिंग को मैनुअली चेक किए बिना प्रोडक्ट की जानकारी को वेरिफाई कर पाएंगे और नियमों के उल्लंघन को आसानी से पकड़ सकेंगे। मंत्रालय ने कहा कि यह प्रस्ताव ग्राहक-हितैषी और प्रतिस्पर्धी ई-कॉमर्स माहौल बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।.
नई दिल्ली: भारत में ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म्स के लिए 'कंट्री ऑफ ओरिजिन' का फिल्टर देना अनिवार्य हो जाएगा। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इसे लेकर एक नया प्रस्ताव रखा है। इस कदम का मकसद ऑनलाइन बाजार में और ज्यादा पारदर्शिता लाना है। यह बदलाव इसलिए किया जा रहा है ताकि ग्राहक ऑनलाइन शॉपिंग करते समय आसानी से जान सके कि कोई प्रोडक्ट किस देश का है और सोच-समझकर खरीदारी का फैसला ले सके।मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि नए नियमों के ड्राफ्ट के मुताबिक, विदेश से मंगाकर सामान बेचने वाली हर ई-कॉमर्स कंपनी को अपने प्रोडक्ट्स के साथ 'कंट्री ऑफ ओरिजिन' का एक ऐसा फिल्टर देना होगा, जिससे ग्राहक आसानी से प्रोडक्ट्स को खोज कर सके और इसे छांट सकें। इस फीचर से ग्राहकों का ढेर सारे प्रोडक्ट्स के बीच ऐसी जानकारी ढूंढने में लगने वाला समय बचेगा।हमारी आरामतलबी है ई-कॉमर्स की ताकत, छोटे कारोबारियों को हो रहा बड़ा नुकसानवोकल फॉर लोकलइन नियमों के ड्राफ्ट को विभाग की वेबसाइट पर डाल दिया गया है और सभी संबंधित पक्षों से 22 नवंबर तक अपनी राय और सुझाव मांगे गए हैं। यह बदलाव सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'वोकल फॉर लोकल' अभियानों को भी सीधे तौर पर बढ़ावा देगा, क्योंकि इससे 'मेड इन इंडिया' प्रोडक्ट्स आसानी से खोजे जा सकेंगे। उम्मीद है कि इससे भारतीय निर्माताओं को बराबरी का मौका मिलेगा। देसी प्रोडक्ट्स को भी विदेशी सामानों के बराबर विजिबिलिटी मिलेगी और ग्राहक देश में बने सामान को खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे।मंत्रालय के मुताबिक, 'कंट्री ऑफ ओरिजिन' फिल्टर से अधिकारियों को भी यह निगरानी करने में मदद मिलेगी कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। वे हर लिस्टिंग को मैनुअली चेक किए बिना प्रोडक्ट की जानकारी को वेरिफाई कर पाएंगे और नियमों के उल्लंघन को आसानी से पकड़ सकेंगे। मंत्रालय ने कहा कि यह प्रस्ताव ग्राहक-हितैषी और प्रतिस्पर्धी ई-कॉमर्स माहौल बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
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