Uttarakhand Forest Fire Hearing Update.
उत्तराखंड के जंगलों में अप्रैल के पहले हफ्ते से आग लगी है। बुझाने के लिए हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया जा है। उत्तराखंड में जंगलों की आग मामले में बुधवार 8 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। अप्रैल के पहले हफ्ते से लगी आग से अब तक 11 जिले प्रभावित हैं। इसमें गढ़वाल मंडल के पौड़ी रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, टिहरी ज्यादा प्रभावित हैं और देहरादून का कुछ हिस्सा शामिल है। जबकि कुमाऊं मंडल का नैनीताल, चंपावत, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ ज्यादा प्रभावित हैं। जंगलों की आग में झुलसने से 5 लोगों की मौत हो चुकी है और चार लोग गंभीर रूप से घायल है। पिछले साल नवंबर से अब तक जंगलों में आग लगने की 998 घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें 1316 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। वन विभाग, फायर ब्रिगेड, पुलिस के साथ-साथ सेना के जवान रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे हुए हैं। आर्मी एरिया में आग पहुंचती देख एयरफोर्स के MI-17 हेलिकॉप्टर की मदद ली गई है। वहीं, रुद्रप्रयाग में 3 लोगों को जंगल में आग लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है।एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उत्तराखंड में 15 फरवरी से 15 जून यानी 4 महीने फायर सीजन होता है। मतलब फरवरी के मध्य से जंगलों में आग लगने की घटनाएं शुरू हो जाती हैं, जो अप्रैल में तेजी से बढ़ती हैं। बारिश शुरू होते ही ये 15 जून तक धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं। कुछ स्थानों पर आग लगने का कारण सर्दियों के मौसम में कम बारिश और बर्फबारी होना है। जंगलों में पर्याप्त नमी नहीं होने से गर्मियों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कम नमी की वजह से पेरूल के पत्तों में ज्यादा आग लगती है। पहाड़ों से पत्थर गिरने की वजह से भी आग की घटनाएं बढ़ती हैं। कुछ जगहों पर इंसान द्वारा भी आगजनी की घटनाएं होती हैं। जंगलों में हरी घास उगाने के लिए स्थानीय लोग भी आग की घटनाओं को अंजाम देते हैं। इन पर वन विभाग नजर रखता है।आग लगने पर क्या एक्शन लिया गया मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने काम में लापरवाही बरतने पर अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आग लगाने के मामलों में 383 केस दर्ज किए हैं। इसमें 315 अज्ञात लोगों के खिलाफ, जबकि 59 मामले नामजद दर्ज किए गए हैं। बार-बार इस आग की घटनाओं में लिप्त पाए जाने पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्यवाही की जाएगी। खेतों में फसल कटाई के बाद पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।प्रदेशभर में आग की घटनाओं को रोकने के लिए 1438 फायर क्रूज स्टेशन बनाए गए हैं, जिसमें तकरीबन 4000 फायर ब्रिगेड को तैनात किया गया है।आग बुझाने के लिए क्या किया जा रहा प्रदेशभर में 3700 कर्मचारियों को आग बुझाने के लिए लगाया गया है। 4 महीने के लिए फायर सीजन में वन मित्रों की तैनाती होती है। इसके अलावा पीआरडी, होमगार्ड, पीएससी, युवा और महिला मंगल दलों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की मदद ली जा रही है। आग बुझाने के लिए मुख्य रूप से झाप लोहे और स्टील के इस्तेमाल किए जाते हैं।लछमोली से आगे ददुआ गांव के जंगल में लगी आग को फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने बुझाया।ड्रग फैक्ट्री गणियादौली के पास जंगल में लगी आग पर फायर फाइटर्स ने काबू पाया।पुष्कर धामी कैबिनेट ने UCC रिपोर्ट को मंजूरी दी, कल उत्तराखंड विधानसभा में पेश होगा बिलउत्तराखंड में कमाया बेहिसाब पैसा, कुर्की की बारी आई तो पुलिस को मिले सिर्फ 3 मकान और फॉर्च्यूनरउत्तराखंड से UP आ रहा था बिट्टू; STF ने घेरा तो फायरिंग की; मुठभेड़ में लगी गोलीबादल सरकार में लुधियाना निगम कमिश्नर रह चुके; उत्तराखंड चीफ सेक्रेटरी पद से हुए रिटायर.
उत्तराखंड के जंगलों में अप्रैल के पहले हफ्ते से आग लगी है। बुझाने के लिए हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया जा है। उत्तराखंड में जंगलों की आग मामले में बुधवार 8 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। अप्रैल के पहले हफ्ते से लगी आग से अब तक 11 जिले प्रभावित हैं। इसमें गढ़वाल मंडल के पौड़ी रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, टिहरी ज्यादा प्रभावित हैं और देहरादून का कुछ हिस्सा शामिल है। जबकि कुमाऊं मंडल का नैनीताल, चंपावत, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ ज्यादा प्रभावित हैं। जंगलों की आग में झुलसने से 5 लोगों की मौत हो चुकी है और चार लोग गंभीर रूप से घायल है। पिछले साल नवंबर से अब तक जंगलों में आग लगने की 998 घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें 1316 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। वन विभाग, फायर ब्रिगेड, पुलिस के साथ-साथ सेना के जवान रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे हुए हैं। आर्मी एरिया में आग पहुंचती देख एयरफोर्स के MI-17 हेलिकॉप्टर की मदद ली गई है। वहीं, रुद्रप्रयाग में 3 लोगों को जंगल में आग लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है।एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उत्तराखंड में 15 फरवरी से 15 जून यानी 4 महीने फायर सीजन होता है। मतलब फरवरी के मध्य से जंगलों में आग लगने की घटनाएं शुरू हो जाती हैं, जो अप्रैल में तेजी से बढ़ती हैं। बारिश शुरू होते ही ये 15 जून तक धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं। कुछ स्थानों पर आग लगने का कारण सर्दियों के मौसम में कम बारिश और बर्फबारी होना है। जंगलों में पर्याप्त नमी नहीं होने से गर्मियों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कम नमी की वजह से पेरूल के पत्तों में ज्यादा आग लगती है। पहाड़ों से पत्थर गिरने की वजह से भी आग की घटनाएं बढ़ती हैं। कुछ जगहों पर इंसान द्वारा भी आगजनी की घटनाएं होती हैं। जंगलों में हरी घास उगाने के लिए स्थानीय लोग भी आग की घटनाओं को अंजाम देते हैं। इन पर वन विभाग नजर रखता है।आग लगने पर क्या एक्शन लिया गया मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने काम में लापरवाही बरतने पर अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आग लगाने के मामलों में 383 केस दर्ज किए हैं। इसमें 315 अज्ञात लोगों के खिलाफ, जबकि 59 मामले नामजद दर्ज किए गए हैं। बार-बार इस आग की घटनाओं में लिप्त पाए जाने पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्यवाही की जाएगी। खेतों में फसल कटाई के बाद पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।प्रदेशभर में आग की घटनाओं को रोकने के लिए 1438 फायर क्रूज स्टेशन बनाए गए हैं, जिसमें तकरीबन 4000 फायर ब्रिगेड को तैनात किया गया है।आग बुझाने के लिए क्या किया जा रहा प्रदेशभर में 3700 कर्मचारियों को आग बुझाने के लिए लगाया गया है। 4 महीने के लिए फायर सीजन में वन मित्रों की तैनाती होती है। इसके अलावा पीआरडी, होमगार्ड, पीएससी, युवा और महिला मंगल दलों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की मदद ली जा रही है। आग बुझाने के लिए मुख्य रूप से झाप लोहे और स्टील के इस्तेमाल किए जाते हैं।लछमोली से आगे ददुआ गांव के जंगल में लगी आग को फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने बुझाया।ड्रग फैक्ट्री गणियादौली के पास जंगल में लगी आग पर फायर फाइटर्स ने काबू पाया।पुष्कर धामी कैबिनेट ने UCC रिपोर्ट को मंजूरी दी, कल उत्तराखंड विधानसभा में पेश होगा बिलउत्तराखंड में कमाया बेहिसाब पैसा, कुर्की की बारी आई तो पुलिस को मिले सिर्फ 3 मकान और फॉर्च्यूनरउत्तराखंड से UP आ रहा था बिट्टू; STF ने घेरा तो फायरिंग की; मुठभेड़ में लगी गोलीबादल सरकार में लुधियाना निगम कमिश्नर रह चुके; उत्तराखंड चीफ सेक्रेटरी पद से हुए रिटायर
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