Japan China Conflict: जापान ने टाइप 12 मिसाइल को खुद बनाया है और दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहली बार है जब जापान ने एक बार फिर से विनाशक हथियारों को बनाना शुरू कर दिया है। ये काफी खतरनाक मिसाइल है और इसे चीन के खिलाफ तैनात किया गया है।
टोक्यो: ईरान युद्ध के बीच जापान से एक बड़ी खबर आई है। जापान ने चीन से लगती सीमा के पास अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों को तैनात कर दिया है। सबसे हैरानी की बात ये है कि मिसाइलों की तैनाती आधी रात को की गई है। जापानी अधिकारियों ने बताया है कि मिसाइल के लॉन्चर सोमवार सुबह कुमामोटो प्रांत में एक आर्मी कैंप में पहुंचाए गये हैं। जिस मिसाइल को तैनात किया गया है उसका नाम टाइप-12 है और ये लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल है।रिपोर्ट के मुताबिक अपग्रेडेड टाइप-12 जमीन से जहाज पर मार करने वाली मिसाइलें मार्च के आखिर तक 'कैम्प केंगन' में ऑपरेशनल हो जाएंगी। समाचार एजेंसी AP ने जापान के चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी मिनोरू किहारा के हवाले से इस रिपोर्ट की पुष्टि की है। इसका मतलब है कि जापान समंदर में चीनी युद्धपोतों के अलावा मुख्य भूमि चीन तक हमला करने की क्षमता हासिल कर चुका है।जापान ने चीन के करीब क्यों मिसाइलों की तैनाती की?हैरानी की बात ये है कि मिसाइल लॉन्चर और उससे जुड़े दूसरे इक्विपमेंट ले जाने वाली आर्मी की गाड़ियां आधी रात के बाद पहुंचीं और इसे एक बहुत ही सीक्रेट ऑपरेशन बताया गया है। सरकार ने इसे इतना गुप्त रखा कि स्थानीय प्रशासन को भी इसकी भनक नहीं लगने दी। लेकिन भनक लगते ही जापान सरकार के इस फैसले की स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया और दर्जनों लोग कैंप के बाहर जमा हो गये। वो मिसाइलों की तैनाती का विरोध कर रहे थे। वो मिसाइलों की तैनाती रोकने जैसे नारे लगा रहे थे। कुमामोटो के गवर्नर ताकाशी किमुरा ने उसके बात बताया है कि स्थायीन प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं दी हई तो बहुत निराशाजनक है। Type-12 लैंड-टू-शिप मिसाइल क्या है?जापान ने इस मिसाइल को खुद बनाया है और दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहली बार है जब जापान ने एक बार फिर से विनाशक हथियारों को बनाना शुरू कर दिया है। ये काफी खतरनाक मिसाइल है और इसे चीन के खिलाफ तैनात किया गया है। जापान और चीन के संबंध लगातार बिगड़ रहे हैं। ताइवान को लेकर दोनों देश आमने सामने हैं। चीन ने पिछले साल जापान का 'सिर काटने' की धमकी दी थी।इस मिसाइल को मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज नाम की एक कंपनी ने बनाई है। टाइप-12 मिसाइल की रेंज लगभग 1,000 किलोमीटर है। एक और हैरानी की बात ये है कि पहले इस मिसाइल की रेंज सिर्फ 200 किलोमीटर थी। लेकिन अचानकर से इसके रेंज को बढ़ाकर 1000 किलोमीटक कर दिया गया है। अचानक इसके रेंज को बढ़ाना और चीन की जमीन पर मार करने की क्षमता डेवलप करना दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते तनाव को दिखाता है।चीन को उसी की भाषा में कैसे जवाब दे रहा जापान?चीन ने पिछले कुछ सालों में जापान को चारों तरफ से घेरना शुरू कर दिया है। सेनकाकू द्वीप को लेकर दोनों देशों में गहरा विवाद है। इसके बाद जापान ने दूसरे विश्वयुद्ध के बाद एक बार फिर से अपनी सेना बनाने का ऐलान कर दिया। जापान ने हथियारों के उत्पादन से लेकर सेना बनाने के लिए 400 अरब डॉलर का बजट बनाया है। वहीं इस मिसाइल को इस साल के आखिर में 'शिज़ुओका के कैंप फूजी' भी तैनात किया जाएगा। जापान ने ओकिनावा, इशिगाकी और मियाको समेत दक्षिण-पश्चिमी आइलैंड पर अमेरिकी PAC-3 इंटरसेप्टर और मिडरेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइलों की तैनाती की है। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने पिछले महीने कहा था कि मार्च 2031 तक ताइवान के पूर्व में योनागुनी आइलैंड पर मिडरेंज सरफेस टू एयर मिसाइलों की तैनाती की जाएगी। यानि जो जापान आमतौर पर अपनी रक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर रहा है उसने चीन और उत्तर कोरिया के बढ़ते खतरों को देखते हुए अब पलटवार करने की क्षमता विकसित करनी शुरू कर दी है।.
टोक्यो: ईरान युद्ध के बीच जापान से एक बड़ी खबर आई है। जापान ने चीन से लगती सीमा के पास अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों को तैनात कर दिया है। सबसे हैरानी की बात ये है कि मिसाइलों की तैनाती आधी रात को की गई है। जापानी अधिकारियों ने बताया है कि मिसाइल के लॉन्चर सोमवार सुबह कुमामोटो प्रांत में एक आर्मी कैंप में पहुंचाए गये हैं। जिस मिसाइल को तैनात किया गया है उसका नाम टाइप-12 है और ये लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल है।रिपोर्ट के मुताबिक अपग्रेडेड टाइप-12 जमीन से जहाज पर मार करने वाली मिसाइलें मार्च के आखिर तक 'कैम्प केंगन' में ऑपरेशनल हो जाएंगी। समाचार एजेंसी AP ने जापान के चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी मिनोरू किहारा के हवाले से इस रिपोर्ट की पुष्टि की है। इसका मतलब है कि जापान समंदर में चीनी युद्धपोतों के अलावा मुख्य भूमि चीन तक हमला करने की क्षमता हासिल कर चुका है।जापान ने चीन के करीब क्यों मिसाइलों की तैनाती की?हैरानी की बात ये है कि मिसाइल लॉन्चर और उससे जुड़े दूसरे इक्विपमेंट ले जाने वाली आर्मी की गाड़ियां आधी रात के बाद पहुंचीं और इसे एक बहुत ही सीक्रेट ऑपरेशन बताया गया है। सरकार ने इसे इतना गुप्त रखा कि स्थानीय प्रशासन को भी इसकी भनक नहीं लगने दी। लेकिन भनक लगते ही जापान सरकार के इस फैसले की स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया और दर्जनों लोग कैंप के बाहर जमा हो गये। वो मिसाइलों की तैनाती का विरोध कर रहे थे। वो मिसाइलों की तैनाती रोकने जैसे नारे लगा रहे थे। कुमामोटो के गवर्नर ताकाशी किमुरा ने उसके बात बताया है कि स्थायीन प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं दी हई तो बहुत निराशाजनक है। Type-12 लैंड-टू-शिप मिसाइल क्या है?जापान ने इस मिसाइल को खुद बनाया है और दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहली बार है जब जापान ने एक बार फिर से विनाशक हथियारों को बनाना शुरू कर दिया है। ये काफी खतरनाक मिसाइल है और इसे चीन के खिलाफ तैनात किया गया है। जापान और चीन के संबंध लगातार बिगड़ रहे हैं। ताइवान को लेकर दोनों देश आमने सामने हैं। चीन ने पिछले साल जापान का 'सिर काटने' की धमकी दी थी।इस मिसाइल को मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज नाम की एक कंपनी ने बनाई है। टाइप-12 मिसाइल की रेंज लगभग 1,000 किलोमीटर है। एक और हैरानी की बात ये है कि पहले इस मिसाइल की रेंज सिर्फ 200 किलोमीटर थी। लेकिन अचानकर से इसके रेंज को बढ़ाकर 1000 किलोमीटक कर दिया गया है। अचानक इसके रेंज को बढ़ाना और चीन की जमीन पर मार करने की क्षमता डेवलप करना दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते तनाव को दिखाता है।चीन को उसी की भाषा में कैसे जवाब दे रहा जापान?चीन ने पिछले कुछ सालों में जापान को चारों तरफ से घेरना शुरू कर दिया है। सेनकाकू द्वीप को लेकर दोनों देशों में गहरा विवाद है। इसके बाद जापान ने दूसरे विश्वयुद्ध के बाद एक बार फिर से अपनी सेना बनाने का ऐलान कर दिया। जापान ने हथियारों के उत्पादन से लेकर सेना बनाने के लिए 400 अरब डॉलर का बजट बनाया है। वहीं इस मिसाइल को इस साल के आखिर में 'शिज़ुओका के कैंप फूजी' भी तैनात किया जाएगा। जापान ने ओकिनावा, इशिगाकी और मियाको समेत दक्षिण-पश्चिमी आइलैंड पर अमेरिकी PAC-3 इंटरसेप्टर और मिडरेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइलों की तैनाती की है। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने पिछले महीने कहा था कि मार्च 2031 तक ताइवान के पूर्व में योनागुनी आइलैंड पर मिडरेंज सरफेस टू एयर मिसाइलों की तैनाती की जाएगी। यानि जो जापान आमतौर पर अपनी रक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर रहा है उसने चीन और उत्तर कोरिया के बढ़ते खतरों को देखते हुए अब पलटवार करने की क्षमता विकसित करनी शुरू कर दी है।
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