ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव कहीं तीसरे विश्व युद्ध की आहट तो नहीं ?
के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी कि यदि वह कोई हिमाकत करता है तो उसे इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा. अमेरिका ने ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते पर भी प्रतिबंध लगा दिए है, लेकिन ईरान खुले तौर पर यह कह रहा है कि अगर अन्य देश भी इस प्रतिबंध का समर्थन करते हैं तो वह अपनी परमाणु संबंधी गतिविधियां फिर से शुरू कर देगा.
दोनों ही तरफ से तलवारें खिंच चुकी है. वाशिंगटन ने पिछले सप्ताह खाड़ी में युद्धपोत और युद्धक विमान तैनात कर दिए हैं. उधर रूहानी ने कहा, 'अमेरिका द्वारा नए सिरे से लगाए गए प्रतिबंधों से देश की आर्थिक स्थिति 1980-88 में पड़ोसी देश इराक से युद्ध के दौरान हुई स्थिति से बदतर हो गई है. लेकिन तब युद्ध के समय हमें अपने बैंकों, तेल की बिक्री या आयात और निर्यात में कोई समस्या नहीं थी और तब सिर्फ हथियार खरीद पर प्रतिबंध लगा था." रूहानी ने प्रतिबंधों का सामना करने के लिए राजनीतिक रूप से एक होने का आवाह्न किया. उन्होंने कहा,"वर्तमान में दुश्मनों का दवाब हमारी क्रांति के इतिहास में अभूतपूर्व है..लेकिन मैं निराश नहीं हूं और मुझे भविष्य की उम्मीद है और मैं मानता हूं कि हम एक होकर इस कठिन परिस्थिति से आगे निकल जाएंगे."अमेरिका-ईरान के तनाव ने 2015 में हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते पर प्रश्न चिह्न लगा दिए हैं, जिस पर तेहरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्यों और जर्मनी के साथ हस्ताक्षर किए थे. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2018 में खुद इस समझौते को तोड़कर ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगा दिए थे. ईरान ने संकेत दिए हैं कि अगर अन्य सदस्य देश भी अमेरिकी प्रतिबंधों का समर्थन करते हैं तो वह अपनी परमाणु हथियार संबंधी गतिविधियां फिर से शुरू कर देगा. यूरोपीय शक्तियों का कहना है कि वे समझौते पर कायम हैं, लेकिन वे इस समझौते को खत्म करने से रोकने के तेहरान की किसी चेतावनी को अस्वीकार करते हैं.ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनी ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका के साथ कोई युद्ध नहीं होने जा रहा. यह जानकारी उनकी अधिकारिक वेबसाइट पर दी गई है. सरकारी अधिकारियों को दिए एक भाषण में खामेनी ने कहा कि तेहरान और अमेरिका के बीच जो हुआ वह एक सैन्य मुठभेड़ के बजाय संकल्प का परीक्षण था. खामेनी डॉट आइआर वेबसाइट ने उनके हवाले से कहा है कि कोई युद्ध नहीं होने जा रहा है. ना तो हम और ना ही वह युद्ध चाहता है. वे जानते हैं कि यह उनके हित में नहीं है.अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भी मंगलवार को कहा कि अमेरिका ईरान से युद्ध नहीं चाहता. हालांकि उन्होंने कहा कि तेहरान पर दबाव बनाकर रखा जाएगा.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को उस खबर को खारिज कर दिया कि वह ईरान पर दबाव बनाने के लिए 1,20,000 सैनिकों को भेजने पर विचार कर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने भविष्य में सैनिकों को भेजने से इनकार नहीं किया. ट्रंप ने कहा, ‘‘मुझे लगता है यह फर्जी खबर है.’’ न्यूयार्क टाइम्स में एक खबर आयी थी कि व्हाइट हाउस ईरान की सरकार पर दबाव बढ़ाने की अपनी मुहिम के तहत 1,20,000 सैनिकों को उस क्षेत्र में भेजने पर विचार कर रहा है . ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ क्या मुझे ऐसा करना चाहिये ? लेकिन अभी हमने इसके लिए योजना नहीं बनायी है. ’’ उन्होंने कहा, ‘‘उम्मीद है कि हम इस पर योजना नहीं बना रहे . अगर हमने ऐसा किया तो कहीं अधिक सैनिक भेजेंगे.’’
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