ईरान ने भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर दिया भरोसा, होर्मुज जलडमरूमध्य पर स्पष्टीकरण

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ईरान ने भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर दिया भरोसा, होर्मुज जलडमरूमध्य पर स्पष्टीकरण
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ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फताली ने होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने बताया कि कुछ जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिया जा चुका है और जलडमरूमध्य सभी के लिए बंद नहीं है, केवल हमलावर देशों के जहाजों को छोड़कर। जहाजों की आवाजाही में देरी के पीछे क्षेत्र में बढ़ते तनाव और बाहरी हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया गया है।

" भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फताली ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारत ीय जहाजों की मौजूदगी और उनकी सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान भारत ीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए प्रतिबद्ध है.

जब उनसे पूछा गया कि फिलहाल वहां कितने भारतीय जहाज मौजूद हैं और उन्हें भारत की ओर आने के लिए कब क्लीयरेंस मिलेगा, तो उन्होंने कहा कि उनके पास जहाजों की सटीक संख्या की जानकारी तो नहीं है, लेकिन जिन मामलों की रिपोर्ट मिली है, उन पर लगातार फॉलोअप लिया जा रहा है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि कुछ भारतीय जहाजों को पहले ही सेफ पैसेज दे दिया गया है और वे अपनी यात्रा पर आगे बढ चुके हैं.Advertisment आवाजाही में देरी के कारणों का खुलासा राजदूत डॉ. फताली ने जहाजों के ट्रांजिट में होने वाली देरी के कारणों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि जहाजों की आवाजाही में जो भी रुकावट या देरी आ रही है, वह ईरान की ओर से जानबूझकर पैदा नहीं की गई है. बल्कि, यह उन स्थितियों की वजह से है जो ईरान के विरोधियों ने इस क्षेत्र को अस्थिर करने के लिए पैदा की हैं. उन्होंने संकेत दिया कि क्षेत्र में बढते तनाव और विरोधी ताकतों की गतिविधियों के कारण समुद्री रास्तों के ऑपरेशन में कुछ दिक्कतें आ रही हैं, जिसे सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं. ईरान का मानना है कि इस जलमार्ग की सुरक्षा उनके लिए प्राथमिकता है, लेकिन बाहरी हस्तक्षेप इसमें बाधा डाल रहा है हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद नहीं है ईरानी राजदूत ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया गया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह जलमार्ग सभी के लिए बंद नहीं है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए यह रास्ता खुला है, लेकिन कुछ देशों पर ईरान ने सख्ती बरती है. उन्होंने कहा कि केवल हमलावर देशों के जहाजों को ही यहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी जा रही है. राजदूत ने साफ तौर पर अमेरिका और इजरायल का नाम लेते हुए कहा कि इन देशों के जहाजों के साथ-साथ उन देशों के जहाजों को भी रोका जा रहा है जो ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई में शामिल हैं. इंटरनेशनल लॉ और सेफ नेविगेशन पर ईरान का रुख डॉ. फताली ने अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए कहा कि जो देश आक्रामकता या हमले में शामिल हैं, वे 'इनोसेंट पैसेज' के हकदार नहीं रह जाते हैं. इसीलिए उन्हें इस महत्वपूर्ण जलमार्ग का इस्तेमाल करने की परमिशन नहीं दी जा रही है. हालांकि, उन्होंने दूसरे देशों को बडी राहत देते हुए कहा कि जिन देशों ने ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया है या हमले का समर्थन नहीं किया है, वे हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सेफ नेविगेशन यानी सुरक्षित आवाजाही का लाभ उठा सकते हैं. भारत के संदर्भ में ईरान का यह रुख सकारात्मक है, जिससे व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद बढी है. ये भी पढ़ें- राष्ट्रपति ट्रंप से वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने होर्मुज स्‍ट्रेट को सुरक्षित और सुलभ बनाने पर द‍िया जोर"

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ईरान भारत होर्मुज जलडमरूमध्य जहाजों की सुरक्षा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

 

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