तेहरान पर हमले कर रहा वाशिंगटन अब पीछे हटने की तैयारी कर रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान इस बात के संकेत दे रहे हैं. अब वह जीत के बजाय बिना समझौते के तेहरान पर हमले को रोकने की बात कह रहे हैं.
"अमेरिका-इजरायल के बीच अब युद्ध 33 वें दिन में पहुंच चुका है. इस दौरान दोनों ओर से हमले अभी भी जारी है. इस बीच ट्रंप का बयान सामने आया है कि अमेरिकी सेना तेहरान से खुद ब खुद एक दो से तीन हफ्तों में वापस चली जाएगी.
ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन अब ईरान के साथ जंग में अधिक समय तक शामिल नहीं रहने वाला है. इसके लिए तेहरान को कोई समझौता करने की आवश्यकता नहीं है. ट्रंप का ये बयान उनके पुराने बयानों से बिल्कुल उलट है, जहां ट्रंप यह कह रहे थे कि हमने जंग जीत ली है. इस बयान ने संकेत दिया है कि अमेरिका अब पीछे हटने की तैयारी कर रहे हैं. कल यानि शुक्रवार को ट्रंप सुबह 6.30 बजे बड़ा ऐलान कर सकते हैं. Advertisment अमेरिका की किसी भी धमकी की परवाह नहीं रक्षा विशेषज्ञों राजेश पवार का कहना है कि ट्रंप के इस बयान से पता चलता है कि ईरान अब अमेरिका पर हावी हो रहा है. उसे अमेरिका की किसी भी धमकी परवाह नहीं है. हाल ही में ट्रंप ने ईरान में जमीनी कार्रवाई को लेकर कई हजार सैनिकों को भेजने पर बयान दिया था. उनका कहना था कि अब जमीनी कार्रवाई करके हम युद्ध को समाप्त कर देंगे. इसके बाद ईरान के हमले काफी तेज हो गए. उसने धमकी दी कि अब हमले अमेरिका की बड़ी कंपनियों पर भी किए जाएंगे. इससे यूएस की दिग्गज कंपनियों में हड़कंप मच चुका है. यहां पर कर्मचारियों को दफ्तार खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है. अमेरिका की दिग्गज कंपनियों पर हमला IRGC ने साफ कहा कि अगर ईरान से जुड़े किसी भी व्यक्ति या नेतृत्व पर अटैक किया जाता है तो इसका अमेरिका को करारा जवाब मिलेगा. अमेरिका से जुड़ी बड़ी कंपनियों को निशाना बनाया जाएगा. इस दौरान IRGC ने कई वैश्विक टेक और इंडस्ट्रियल कंपनियों के नाम भी सामने रखे. इसमें Microsoft, Apple, Google, Meta, Intel, Tesla और Boeing जैसी दिग्गज कंपनियों को शामिल किया गया. खुद अपना युद्ध लड़ें: ट्रंप ईरान ने कड़ा रुख अपना रखा है. अब वह झुकने को तैयार नहीं है. उसने स्ट्रेट आफ होर्मुज का भी रास्ता रोक रखा है. इसके न खुलने से पूरी दुनिया पर तेल संकट छा गया है. खासकर यूरोपीय देशों में ईंधन की किल्लत देखी जा रही है. रास्ते के बंद होने पर हाल में ट्रंप ने भी अपने हथियार डाल दिए. उन्होंने कहा, जिस देश को समुद्री रास्ते के बंद होने से समस्या हो रही है, वह खुद इस युद्ध में कूदे और अपने लिए रास्ता बनाए. इससे पहले ट्रंप का कहना था कि वह जल्द होर्मुज पर बड़े हमले करके उसे खोल देंगे. अब वह अपनी बात से पलट रहे हैं कि अगर तेल लेना है तो खुद युद्ध में उतरना पड़ेगा. नाटो ने खड़े किए हाथ ट्रंप के पीछे हटने का बड़ा कारण नाटो सेना का साथ न देना है. फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान के साथ अन्य देशों ने इस युद्ध का विरोध किया है. वे किसी भी हालत में ट्रंप का साथ नहीं देना चाहते हैं. इस पर भी ट्रंप कई नाटो को कागजी शेर कह चुके हैं. ट्रंप का कहना है कि आगे जब इन्हें हमारी जरूरत होगी तो हम इनका साथ नहीं देंगे. ऐसे में देखा जाए तो अमेरिका इस युद्ध से पीछे हटने की तैयारी में जुट गया है. अब तक अमेरिका को इस युद्ध में तीन लाख करोड़ डॉलर का नुकसान हो चुका है. खाड़ी देशों में अमेरिका के कई सैन्य बेस तबाह हो चुके हैं. ये भी पढ़ें: जल्द खत्म होगा अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध? राष्ट्रपति ट्रंप ने जंग को लेकर किया ये बड़ा एलान"
