POK Protest news: ये बेसिक चीज़ जान लीजिये कि जिसको वो आज़ाद कश्मीर कहता है, वो वाला पूरा हिस्सा नहीं जो हमारे नक्शे में POK है. नक्शा तो सबने देखा है जम्मू कश्मीर का, उसमें पाकिस्तान की साइड वाला एक इलाका है, जो POK है.
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विद्रोह बड़ा हो गया है. वहां अवामी ऐक्शन कमिटी नाम के संगठन ने चक्का जाम कर दिया है और हालत इतनी खराब हो चुकी है कि पाकिस्तान ने इंटरनेट बंद कर दिया. मतलब पाकिस्तान वहां से आ रही खबरें दबाने में लग गया है.
जो खबरें आ रही हैं, हालात उससे कहीं ज्यादा खराब चल रहे हैं, लेकिन भारत में तो लोगों को उस इलाक़े के बारे में ज़्यादा आइडिया ही नहीं. ये तो सब कहते हैं कि POK वापस लेना है, POK वापस लेना है, लेकिन वो इलाका कौन सा है, वहां हो क्या रहा है, ये सब समझने की जरूरत है. पहले ये जान लीजिये कि पाकिस्तान ने अपने कब्ज़े वाला कश्मीर ही दो तोड़ दिया है दो हिस्सों में. अभी नहीं तोड़ा है, शुरू से ही तोड़ दिया था अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए. ये तो यहां पर पब्लिक जानती है कि पाकिस्तान अपने कब्ज़े वाले कश्मीर को आजाद कश्मीर कहता है. वो अलग बात है कि आजाद जैसी कोई चीज वहां है नहीं. पहले तो ये बेसिक चीज़ जान लीजिये कि जिसको वो आज़ाद कश्मीर कहता है, वो वाला पूरा हिस्सा नहीं जो हमारे नक्शे में POK है. नक्शा तो सबने देखा है जम्मू कश्मीर का, उसमें पाकिस्तान की साइड वाला एक इलाका है, जो POK है. POK के बारे में जानिए … मोटे तौर पर ये समझ लीजिये कि वो हिस्सा कितना बड़ा है. जो पूरा महाराजा हरि सिंह का जम्मू कश्मीर था, वो था मोटे तौर पर लगभग 2.25 sq.km. है. उसमें हमारे पास लगभग 1 लाख sq.km. से थोड़ा ज़्यादा हिस्सा है, तो बाकी बचा 1.25 लाख sq.km., क्या पूरा पाकिस्तान के कब्ज़े में है? लगभग 40,000 sq.km. तो चीन के कब्ज़े में है, इधर लद्दाख के साइड वाला अक्साई चिन. बाकी बचा 85,000 sq.km. यानी हमारे पास है 1 लाख sq.km. से थोड़ा ज्यादा, और पाकिस्तान के क़ब्ज़े में है 85,000 sq.km. ये 85,000 sq.km. है POK, लेकिन पाकिस्तान इस सारे 85,000 sq.km. को आज़ाद जम्मू कश्मीर नहीं कहता. अभी जो हमारे पास 1 लाख sq.km. है वो अब दो केंद्र शासित प्रदेशों में है, जम्मू कश्मीर और लद्दाख. जो लद्दाख के ऊपर वाला एरिया है, वो पाकिस्तान ने पहले ही अलग कर लिया था और वो है गिलगित-बाल्टिस्तान. उसके कब्ज़े में जो 85,000 sq.km. का हिस्सा है उसमें 72,000 sq.km. तो गिलगित-बाल्टिस्तान है और जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के बीच में एक छोटी-सी पट्टी है POK की, जिसको पाकिस्तान कहता है आज़ाद कश्मीर. छोटी सी पट्टी पर बपौती जमाता है पाकिस्तान 85,000 sq.km. में 72,000 sq.km. तो लद्दाख के ऊपर वाला इलाका गिलगित-बाल्टिस्तान ही है, यानी बाकी जो POK है जिसको पाकिस्तान आज़ाद जम्मू कश्मीर कहता है उसका एरिया है सिर्फ़ 13,000 sq. km. मतलब ये कि सबसे पहले तो दुनिया को और हमारे लोगों को भी ये जानने की ज़रूरत है कि पाकिस्तान जो दिखाने को कश्मीरियों की आज़ादी के साथ खड़ा होने के दावे करता रहता है उसने असल में उस हिस्से को ही एक छोटे से टुकड़े में काट कर अलग कर रखा है. ये जो आप नाम सुनते रहते हो ना मुज़फ़्फ़राबाद, मीरपुर, रावलाकोट, ये सब पब्लिक सोचती है कि उस बड़े से हिस्से में कहीं हैं जो POK है. जबकि ये तो यब उस संकरी-सी जमीन की पट्टी में हैं. ऊपर तो सारा 72,000 sq.km. का गिलगित-बाल्टिस्तान है. शुरू में ही यानी 1949 में पाकिस्तान ने उसको ये कहकर अलग कर दिया था कि यहां के लोगों ने तो महाराजा के ख़िलाफ़ विद्रोह कर दिया था और ये पाकिस्तान के साथ आ गए थे तो इनका कश्मीर से लेना-देना ही नहीं. तो क्या पाकिस्तान ने उसको अपने नक्शे में मिला लिया? नहीं? वो अलग ही रखा हुआ है उसने गिलगित-बाल्टिस्तान. मतलब कहने को जो वो आज़ाद कश्मीर की सरकार चलाता है उससे अलग रखा हुआ है, लेकिन वो पाकिस्तान में भी नहीं है. बस पाकिस्तान की केंद्र सरकार उसको डायरेक्ट कंट्रोल करती है. जिसका सीधा मतलब पाकिस्तान में ये है कि सेना कंट्रोल करती है. सौ बात की एक बात POK के विद्रोह को क्यों छिपा रहा है पाकिस्तान ?#saubaatkiekbaat | @kishoreajwani pic.twitter.com/EY3Tl0K2lF — News18 India September 29, 2025 यहां चलती है वर्दी की दहशतगर्दी ऐसा क्यों कर रखा है उसने? वो इसलिए क्योंकि था तो ये सारा महाराजा हरि सिंह की रियासत में. और दुनिया को ये कहानी सुनाता है पाकिस्तान कि इस इलाके पर विवाद है भारत से. पाकिस्तान दोनों बातें तो कर नहीं सकता कि विवादित इलाका भी बताए और अपने नक्शे में भी जोड़ ले, तो उसने इसकों ऐसे ही अपने कंट्रोल में छोड़ रखा है और इस इलाक़े में कश्मीरी नहीं है. यहां गिलगित के इलाक़े में जो लोग रहते हैं वो ज़्यादातर शिना लोग हैं उनका रहन-सहन मध्य एशिया के लोगों जैसा है. आगे वहां पहाड़ों के पार ताजिकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान ही तो हैं और शिना लोगों में ज़्यादातर शिया मुसलमान होते हैं. बाल्टिस्तान के इलाक़े में ज़्यादातर बाल्टी लोग रहते हैं, उनका रहन-सहन तिब्बत के लोगों जैसा है और शिनजियांग के लोगों जैसा है. वो भी ज़्यादातर शिया होते हैं और इधर कश्मीर वाले POK के इलाके में सुन्नी लोग ज़्यादा हैं. तो एक तो ये कर के पाकिस्तान ने शिया-सुन्नी इलाके भी अलग कर दिये, लेकिन उससे ज़्यादा अहम ये है कि गिलगित-बाल्टिस्तान का इलाका चीन के पास है. क्यों भड़के हुए हैं PoK के लोग? CPEC यानी वो चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडॉर वहीं से तो निकल रहा है और ये दोनों इलाक़े पाकिस्तान सरकार का एक मंत्रालय चलाता है. मतलब कहने को तो वहां लोकल सरकारें बनी हुई हैं, लेकिन वो सब पाकिस्तान सरकार की कठपुतलियां ही होती हैं. विद्रोह क्यों हो रहा है वो समझिये. वहां के कश्मीर वाले इलाक़े में एक डैम बनाया है पाकिस्तान ने मंगला डैम, वो बिजली बनाता है 1300MW, और एक डैम है गिलगित बाल्टिस्तान में, जिसका नाम है डायमर-भाशा डैम, वो है 4500MW का. वहां की नदियों पर डैम बनाए हुए हैं, लेकिन इस पूरे इलाक़े में 20-20 घंटे रोज़ बिजली कटती है. यानी 4-5 घंटे ही बिजली देता है पाकिस्तान और बिजली चली जाती है पाकिस्तान की ग्रिड में. यानी वहां से पूरे पाकिस्तान को बिजली जाती है, इन्हीं इलाक़ों को बिजली नहीं जाती जहां की नदियों से ये बिजली बनाई जाती है. पाकिस्तान की सरकार अपने उन प्रांतों को रॉयल्टी देती है जिनके संसाधन इस्तेमाल करती है. इन इलाक़ों को तो पाकिस्तान कहता है कि ये तो हमारे प्रांत हैं ही नहीं. उनकी बिजली भी ले लेता है और उसकी पेमेंट भी नहीं करता और उनको बिजली भी नहीं देता. फिर यहां CPEC बना रहा है पाकिस्तान, उसके लिए ज़मीने ली जाती हैं लेकिन लोग कहते हैं कि मुआवज़ा ही नहीं देती पाकिस्तान की सरकार. यहां पर यूरेनियम की खदानें बताई जाती हैं, कई क़ीमती पत्थरों की खदानें बताई जाती हैं, माइनिंग करती हैं पाकिस्तान की कंपनियां और लोकल लोगों को कोई पैसा नहीं देते. पैसा तो छोड़ो कहते हैं कि रोज़गार भी नहीं देते. मज़दूर भी पंजाबी लेकर आते हैं और ठेकेदार भी पंजाबी होते हैं. जंगल के जंगल काटे जा रहे हैं जिससे बाढ़ आ रही है हर साल लेकिन वो सब लकड़ी भी पाकिस्तान की उसकी कमाई भी पाकिस्तान की और ठेके भी पाकिस्तानियों के. जो आवाज़ उठाता है उसको आतंकी उठा के ले जाते हैं. ISI ने जो इस इलाक़े में आतंकी कैंप बना रखे हैं वो उसके डबल काम के आते हैं. यहीं से भारत में घुसपैठ करने की कोशिश करते हैं आतंकी और यहां पर लोकल लोगों को भी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ बोलने नहीं देते. मलाई खाए पाकिस्तान, झेलें PoK के लोग यहां से पाकिस्तान अरबों करोड़ों रुपये कमाता है, लेकिन सरकार का बजट बंट जाता है उन प्रांतों में जो उसके नक़्शे में हैं, यानी पंजाब, सिंध, ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा और बलूचिस्तान में. POK को मिलते हैं ग्रांट के नाम पर चंद टुकड़े. सड़कें नहीं बनाता, स्कूल नहीं बनाता, अस्पताल नहीं बनाता, पुल नहीं बनाता, कुछ नहीं बनाता, कोई रोज़गार नहीं. कहने को जो उसका आज़ाद कश्मीर का इलाक़ा है वहां इलेक्शन होते हैं और सरकार बनती है. लेकिन पाकिस्तान ने क्या कर रखा है कि POK के जिस इलाक़े को वो आज़ाद कश्मीर कहता है वहां के लिए एक कश्मीर काउंसिल बनाई हुई है. उस कश्मीर काउंसिल में कौन होता है? वो पकिस्तान का प्रधानमंत्री होता है और इस कश्मीर काउंसिल के पास होती है वीटो पावर. वहां की लोकल सरकार जो कहने तो तो इलेक्शन के बाद बनती है, उस लोकल सरकार के किसी भी फ़ैसले पर कश्मीर काउंसिल वीटो कर सकती है यानि फैसला पलट सकती है. गिलगित-बाल्टिस्तान में एक गवर्नर रखा हुआ जो पाकिस्तान अपॉयंट करता है, तो वहां की भी लोकल सरकार के ऊपर पाकिस्तान का अपना आदमी बैठा रहता है. इन सब वजहों से ही वहां अब विद्रोह हो गया है. इंटरनेट भी अगर बंद कर दिया है तो आप समझ लो वहां अंदर क्या हो रहा होगा और पाकिस्तान क्यों नहीं चाहता कि जो हो रहा है वो दुनिया को पता ना चले. अगर ग़ाज़ा और इज़राइल के नक़्शे सब समझ गए हो, रूस यूक्रेन के प्रांतों का पूरा इलाक़ा आपने समझ लिया तो ये तो जान लीजिये जो हमारा है. ये हमारा देश है, जो उनके क़ब्ज़े में है.
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