आर्मेनिया की लंबे समय से अजरबैजान से तनातनी चल रही है। इस संघर्ष में अजरबैजान को पाकिस्तान-तुर्की से मदद मिली है तो आर्मेनिया को भारत से हथियार मिल रहे हैं।
येरेवन: भारत और पाकिस्तान के बीच मई में हुए चार दिन के संघर्ष के दौरान दोनों के लड़ाकू विमानों के बीच मुकाबला देखने के मिला था। एक ओर भारत के पास रूस और फ्रांस के जेट सुखोई और राफेल थे तो पाकिस्तान के पास चीन से मिले J-10C और JF-17 थंडर विमान थे। इसी तरह का संघर्ष आने वाले समय में काकेशस में दिखने का अंदेशा है, जहां आर्मेनिया और अजरबैजान आमने-सामने हैं। अजरबैजान को पाकिस्तान से JF-17 थंडर मिलने जा रहे हैं तो आर्मेनिया की नजर भारत से Su-30MKI लेने पर है, जो रूसी Su-30 का भारतीय संस्करण है। ब्रह्मोस मिसाइल के साथ Su-30MKI बेहद खतरनाक हो जाता है।पाकिस्तान ने हाल ही में अजरबैजान के साथ 40 JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के लिए 4.
6 अरब डॉलर के रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। JF-17 थंडर एक एकल इंजन वाला बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है, जिसे पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त रूप से बनाया है। अजरबैजान में 40 JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों का शामिल होना उसकी वायु सेना की ताकत में वृद्धि करेगा।आर्मेनिया ने भी शुरू की कोशिशअजरबैजान की जेट खरीद को देखते हुए अर्मेनियाई वायु सेना अपग्रेड होने की आवश्यकता महसूस कर रही है। आर्मेनिया के पास फिलहाल बहुत सीमित संख्या में लड़ाकू विमान हैं। अर्मेनियाई वायु सेना में अधिकांश 10-15 Su-25 फ्रॉगफुट हैं।आर्मेनिया को पुराने सहयोगी रूस से जेट नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में Su-30 लड़ाकू विमानों के लिए आर्मेनिया ने भारत से संपर्क किया है। अजरबैजान से पाकिस्तान के 40 JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों के सौदे के बाद आर्मेनिया ने भारत से 8-12 Su-30MKI लड़ाकू विमान खरीद पर चर्चा तेज कर दी है। भारत सुखोई से लाइसेंस प्राप्त एचएएल संयंत्र में Su-30MKI लड़ाकू विमानों का निर्माण करता है। भारत दुनिया के सबसे बड़े Su-30 बेड़ों में से एक है। भारतीय वायु सेना करीब 260 Su-30 उड़ाती है।Su-30MKIs आर्मेनिया के लिए क्यों उपयुक्तभारत से Su-30MKIs खरीदना आर्मेनिया के लिए समझदारी भरा हो सकता है। सबसे पहली बात- भारत आर्मेनिया का एक विश्वसनीय रक्षा साझेदार है। 2020 में अजरबैजान के साथ युद्ध के बाद से उसकी सबसे ज्यादा मदद करने वाले देश भारत और फ्रांस हैं। फ्रांस से आर्मेनिया राफेल खरीद सकता है लेकिन इसकी 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर की भारी कीमत एक बाधा बन सकती है। ऐसे में भारत से जेट लेना ज्यादा बेहतर होगा। दूसरी बात यहा है कि भारत ना केवल दुनिया में सबसे बड़े Su-30 बेड़ों में से एक का संचालन करता है, बल्कि नई दिल्ली लाइसेंस के तहत इनका घरेलू स्तर पर निर्माण भी करता है। ऐसे में भारत आर्मेनिया को इन लड़ाकू विमानों के रखरखाव और मरम्मत की सुविधा प्रदान कर सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत आर्मेनिया को रूस से पहले ही खरीदे गए चार Su-30SM के लिए हथियारों का पैकेज और अपग्रेड भी प्रदान कर सकता है।जेट के साथ ब्रह्मोस मिसाइलपिछले कुछ वर्षों में भारत ने Su-30MKI में कई स्वदेशी हथियारों को इंटीग्रेट किया है। इसमें Su-30 के साथ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को जोड़ना शामिल है। यह मिसाइल हाल ही में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में उपयोगिता साबित कर चुकी है। इसके अलावा सुखोई-30 विमानों को एंटी-रेडिएशन मिसाइलों, स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड, एईएसए रडार और हाई बैंड जैमर पॉड्स से इंटीग्रेट किया गया है। इससे ये JF-17 थंडर पर भारी पड़ सकते हैं।Su-30 दोहरे इंजन वाला भारी लड़ाकू विमान है। Su-30MKI, JF-17 के एकल RD-93 इंजन की तुलना में अधिक गतिशीलता प्रदान करता है। इससे हवाई युद्ध में बेहतर त्वरण, चढ़ाई दर और चपलता प्राप्त होती है। Su-30MKI का अधिकतम टेकऑफ भार 38,800 किलोग्राम है। यह इसे JF-17 की 13,500 किलोग्राम की सीमा और 4,600 किलोग्राम की तुलना में भारी पेलोड ले जाने में समक्षम बनाता है, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल भी शामिल हैं।अजरबैजान-आर्मेनिया संघर्षअजरबैजान के साथ आर्मेनिया लंबे समय से चल रहे संघर्ष में उलझा हुआ है। 2020 से अजरबैजान और आर्मेनिया तीन युद्ध लड़ चुके हैं। सितंबर 2020 में फिर 2022 में और फिर 2023 में लड़ाई हुई। इसके परिणामस्वरूप अजरबैजान ने नागोर्नो-काराबाख गलियारे पर नियंत्रण बढ़ाया। इसके बाद से सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण है।दोनों देशों में जांगेजुर गलियारे का मुद्दा है, जो अजरबैजान को उसके नखचिवन एक्सक्लेव से जोड़ने वाला एक प्रस्तावित मार्ग है, जो आर्मेनिया के स्यूनिक प्रांत को दरकिनार करता है। इन मुद्दों का मतलब है कि स्थिति किसी भी क्षण अस्थिर हो सकती है। ऐसे में दोनों ही देश अपने हथियारों का जखीरा बढ़ाने में लगे हुए हैं।
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