जिस बम ने पाक के बालाकोट में जैश को तबाह किया, चीन भी उससे घबराता है!
फाइटर प्लेन से गिराने के बाद अगर SPICE-2000 बम गलत दिशा में जा रहा हो तो भी फिर से उसका रास्ता बदला जा सकता है.26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को तबाह करने के बाद एक नाम जो बार-बार सामने आ रहा है, वो है मिराज से बरसाए गए स्पाइस-2000 बम.
बता दें कि इसे भारतीय वायुसेना का पसंदीदा हथियार माना जाता है और खुद वायुसेना मानती है कि इस बम की मौजूदगी से उन्हें पाक-चीन बॉर्डर पर शांति बनाए रखने में काफी मदद मिलती रही है. आज हम आपको बता रहे हैं कि स्पाइस-2000 किस तरह से हवा में काम करता है और कैसे हमेशा सही टारगेट को तबाह कर देता है...असल में स्पाइस-2000 की खासियत यह है कि यह सिर्फ एक सामान्य बम नहीं होकर 'गाइडेंस किट' है जो किसी भी स्टैंडर्स वारहेड या बम से जुड़ी होती है. इस हथियार के दो हिस्से होते हैं. पहला हिस्सा स्टैंडर्स वारहेड के अगले हिस्से से जोड़ा जाता है जबकि दूसरा बम के पिछले हिस्से से जोड़ा जाता है. किट के पहले भाग की नोक पर एक कैमरा लगा होता है जो टार्गेट को आइडेंटिफाई करता है. जबकि दूसरे भाग में एक डेटा चिप होती है, जो स्पाइस-2000 को बम छोड़ने का सही वक्त बताती है. SPICE की फुल फॉर्म ही- Smart, Precise Impact, Cost-Effective बताई जाती है.बता दें कि मिशन से पहले टागरेट को लेकर रोडमैप बनाया जाता है. टार्गेट को तबाह करने के लिए किस उंचाई से किस वक़्त बम गिराया जाएगा और उसे किस दिशा में हिट करना होगा इससे संबंधित एक प्लान बनाकर मेमरी चिप में एड कर दिया जाता है. इस डेटा में GPS, टारगेट की सही तस्वीर और टागरेट से जुड़ी तमाम जानकारियां होती हैं जिससे बम को सही दिशा में छोड़ा जाए और टारगेट तक पहुंचाया जाए.बता दें कि फाइटर प्लेन से गिराने के बाद अगर बम गलत दिशा में जा रहा हो तो भी उसका रास्ता बदला जा सकता है. मिशन के दौरान एक बार फाइटर जेट पूर्व निर्धारित स्थान और ऊंचाई पर पहुंच जाता है तो वहां से वो इन स्मार्ट बमों को गिरा देता है. SPICE-2000 ऑनबोर्ड कंप्यूटर द्वारा मेमोरी चिप में स्टोरेज डेटा की मदद से टारगेट पर दागा जाता है. किट में लगे कैमरे की मदद से टारगेट की लाइव तस्वीरें खींची जाती हैं, तस्वीरों से ये पता चलता है कि बम किधर जा रहा है, अगर बम टागरेट से अलग दिशा में जाता है तो तुरंत ऑनबोर्ड कंप्यूटर की मदद से ऑपरेट कर उसे सही दिशा में भेज दिया जाता है. इसलिए इस स्पाइस 2000 बम को टागरेट तक पहुंचाना आसान होता है.बालाकोट से भी इस तरह की ख़बरें सामने आई थीं कि बम ने टारगेट को हिट नहीं किया है लेकिन स्पाइस 2000 की खासियत यही है कि GPS की मदद से बम की आधे रास्ते में भी दिशा बदली जा सकती है. इसलिए बालाकोट में मिराज से छोड़े गए बम का सही टारगेट पर गिरने की पूरी संभावना है. क्योंकि बम को ऑनबोर्ड कंप्यूटर की मदद से आखिरी वक्त तक ऑपरेट किया जाता है. भारत जो स्पाइस 2000 इस्तेमाल करता है वारहेड के साथ उनका वज़न 900 किलो तक होता है.इजरायल निर्मित स्पाइस बम सबसे बड़ा बम है, जिसका इस्तेमाल भारतीय वायु सेना करती है. इजरायल की फर्म राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड द्वारा निर्मित, 2000-पौंड सटीक निर्देशित बमों का उपयोग फ्रांसीसी मूल के मिराज 2000 किया जाता है. स्पाइस 2000 को 'डीकैपिटेटिंग वेपन' कहा जाता है जो सटीक हमले के जरिए दुश्मन के अड्डे को खत्म करने के लिए डिजाइन किया गया है. स्पाइस 2000 की ग्लाइडिंग रेंज 60 किलोमीटर तक है.
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