Wheat Cultivation: यहां गेंहू की बुवाई का सबसे बढ़िया समय है 15 से 25 नवंबर, जानें एक्सपर्ट की राय

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Wheat Cultivation: यहां गेंहू की बुवाई का सबसे बढ़िया समय है 15 से 25 नवंबर, जानें एक्सपर्ट की राय
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Sowing of Rabi Crops: रबी फसलों की बुवाई का समय आ गया है. सोनांचल की मिट्टी में गेंहू की बुवाई का सबसे सटीक समय 15 से 25 नवंबर के बीच होता है. इस दौरान ही बुवाई कर लें.

सोनभद्र: किसान भाइयों, धान की कटाई के बाद अब रबी फसलों की बुवाई का समय आ गया है. इस समय अधिकांश किसान गेहूं की खेती करते हैं. गेहूं की सफल खेती के लिए बुवाई के सही तरीके, बीज की गुणवत्ता और उचित मात्रा पर ध्यान देना आवश्यक है.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अगर सही मात्रा और गुणवत्ता का ध्यान रखा जाए तो अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. बीज की मात्रा गेहूं की किस्म और बुवाई के समय पर भी निर्भर करती है. भारत में गेहूं की खेती को तीन प्रमुख चरणों में विभाजित किया जाता है, अगेती, मध्यम और पछेती बुवाई. इन चरणों का सही समय और सही किस्म का चयन करने से किसानों को अधिक पैदावार प्राप्त हो सकती है. यहां कुछ प्रमुख अगेती और पछेती किस्मों के बारे में जानकारी दी जा रही है जो भारतीय किसानों के बीच लोकप्रिय हैं. बीज की मात्रा और बुवाई के तरीके पर ध्यान दें बीज की मात्रा और बुवाई का तरीका बहुत महत्वपूर्ण हैं. कई किसान पारंपरिक तरीके से छीटा लगाकर गेहूं की बुवाई करते हैं, जबकि कुछ किसान आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करते हैं. सीड ड्रिल जैसे यंत्र से बुवाई करने पर बीज एक समान गहराई और दूरी पर गिरता है, जिससे फसल बेहतर होती है. इसके अलावा, हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसी मशीनों का भी उपयोग किया जा सकता है, जो बुवाई को और अधिक सटीक और प्रभावी बनाते हैं. आधुनिक तकनीक से करें बुवाई नवंबर में गेहूं की बुवाई करते समय सीड ड्रिल मशीन से 40 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से बीज का उपयोग करना चाहिए. सीड ड्रिल की मदद से बीज एक समान गहराई पर गिरता है, जिससे बीज का अंकुरण बेहतर होता है और फसल की गुणवत्ता बढ़ती है. इसके साथ ही, हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसी आधुनिक मशीनें भी बुवाई के लिए उपयुक्त हैं, जो बीज को निर्धारित गहराई और मात्रा में गिराने में सहायक होती हैं. छींटा विधि में बीज की अधिक खपत आज भी कई किसान छीटा विधि से बुवाई करते हैं, जिसमें लगभग 25 प्रतिशत अधिक बीज की खपत होती है. इस विधि से बुवाई करने पर प्रति एकड़ 50 से 55 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है. इस विधि में किसान खेत को तैयार करके बीज का छींटा लगाते हैं और फिर पाटा चलाकर खेत को समतल कर देते हैं. बुवाई करते समय बीज का उपचार करना भी बहुत जरूरी है, ताकि बीज स्वस्थ रहे और फसल अच्छी हो. अगेती और पछेती गेहूं की किस्में अगेती किस्में जल्दी पकने वाली होती हैं और इन्हें अधिकतर ठंडे मौसम में बोया जाता है. ये किस्में विशेषकर उन किसानों के लिए उपयुक्त होती हैं, जो फसल जल्दी तैयार करके दूसरी फसल लगाना चाहते हैं. अगेती किस्मों में डब्ल्यूएच 1105, एचडी 2967 और पीबीडब्ल्यू 550 प्रमुख हैं. उदाहरण के लिए, डब्ल्यूएच 1105 एक लोकप्रिय अगेती गेहूं की किस्म है, जो लगभग 157 दिनों में पकती है और प्रति एकड़ 20-24 क्विंटल की पैदावार देती है. इसकी खासियत यह है कि यह पीले रतुआ रोग के प्रति प्रतिरोधी होती है. दूसरी ओर, पछेती गेहूं की बुवाई दिसंबर और जनवरी के महीनों में की जाती है. यह उन क्षेत्रों में उपयुक्त होती है जहां ठंड लंबी रहती है और बुवाई देर से की जाती है. पछेती किस्में जैसे यूपी-2338, एचडी-2888, नरेंद्र गेहूं-1076, पूसा वाणी और पूसा अहिल्या भी पछेती बुवाई के लिए उपयुक्त हैं और अधिक पैदावार देती हैं. सही समय पर बुवाई और उन्नत किस्मों का चयन करने से किसानों को अधिक उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिलती है. ये है बुवाई का उपयुक्त समय जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए अगेती खेती एक उत्कृष्ट विकल्प साबित हो सकती है. इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी हरीकृष्ण मिश्रा ने लोकल 18 से खास बातचीत में बताया कि सोनांचाल की मिट्टी में गेहूं बुवाई का सबसे उपयुक्त समय 15 नवंबर से 25 नवंबर के बीच रहता है या अधिकतम 30 नवंबर तक गेहूं की बुवाई कर सकते हैं. अगर गेहूं बुवाई तय समय से की जाए तो उपज भी अच्छी होती है और गेहूं बोने का सबसे बेहतर तरीका होता है लाइन टू लाइन, जिसमें अन्य किसी की प्रतिस्पर्धा नहीं होती और फसल बेहतर होती है.

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