यूपीए सरकार ने नहीं दी थी मिशन शक्ति कार्यक्रम को अनुमति: पूर्व डीआरडीओ प्रमुख वीके सारस्वत ISRO DRDO MissionShakti AntiSatellite PMModi
नीति आयोग के मौजूदा सदस्य वी के सारस्वत रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन के पूर्व प्रमुख हैं। उन्हीं के कार्यकाल में एंटी सैटेलाइट मिसाइल तकनीकी पर काम शुरू हुआ था।के विशेष संवाददाता जयप्रकाश रंजन के साथ बातचीत में उन्होंने बुधवार को पीएम नरेंद्र मोदी की तरफ से राष्ट्रीय प्रसारण में ऐलान किये गये मिशन शक्ति से जुड़ी कुछ जानकारी साझा की।भारत के लिए मिशन शक्ति उसी तरह का महत्व है जैसा अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार की तरफ से किया गया परमाणु परीक्षण था। यह दुनिया को भारत की तकनीकी क्षमता से अवगत कराता है साथ ही हमारी रणनीतिक क्षमता को मजबूत करता है। यह अंतरिक्ष विज्ञान में हमारी असीमित क्षमता को बताता है जिसका असर बाद में दिखाई देगा। यह भारत को इंटर कंटीनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता को मजबूत करता है साथ ही यह कूटनीतिक तौर पर भारत को बेहतर तरीके से अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने हितों की रक्षा करने की क्षमता देता है।आपको बता दूं जब भारत ने पहली बार अग्नि मिसाइल का परीक्षण किया था तो हमारे ऊपर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाये गये थे। भारत के लिए छोटे-छोटे मिसाइल को हासिल करना मुश्किल हो गया था। लेकिन अब हमारे पास इस क्षेत्र की सबसे आधुनिक तकनीक है। मिशन शक्ति यह भी बताता है कि अब दूसरा कोई भी देश भारत की अंतरिक्ष परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की हिम्मत नहीं कर सकता क्योंकि उसे मालूम होगा कि हम भी उसे उतना ही भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन यह याद रखना चाहिए कि इस तरह की तकनीकी का इस्तेमाल तभी होता है जब कोई देश हमारे सैटेलाइट को नुकसान पहुंचाए। प्रश्न : क्या यह बात सच है कि जब आप डीआरडीओ के प्रमुख थे तब आपने इसी तकनीकी के लिए तत्कालीन यूपीए सरकार से अनुमति मांगी थी और आपको अनुमति नहीं दी गई थी?हां, हमने इस बारे में तत्कालीन सरकार के संबंधित मंत्रियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से बात की थी। अपना निवेदन रखा था। हमें अतिरिक्त वित्तीय संसाधन और सरकार की मंजूरी की जरूरत थी। जो किसी वजह से हमें नहीं दी गई। अगर उस वक्त यह मंजूरी दी गई होती तो वर्ष 2015 तक हम एंटी सैटेलाइट मिसाइल क्षमता हासिल कर लिये होते।मुझे लगता है कि पीएम नरेंद्र मोदी और मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इस तकनीकी की जरूरत समझी कि यह भारत के लिए कितना जरूरी है। पीएम मोदी पहले ही कह चुके हैैं कि रक्षा क्षेत्र में जो भी तकनीकी की जरूरत है उस हासिल किया जाना चाहिए और उसमें देरी नहीं होनी नहीं चाहिए। इस तरह की किसी भी बड़े तकनीकी उन्नयन के लिए सरकार के उच्च स्तर पर मंजूरी की जरूरत होती है।उत्तर- निश्चित तौर पर इस तरह के किसी भी मिसाइल परीक्षण से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। लेकिन आपको याद रखना होगा कि अंतरिक्ष के कारोबार में जो भी देश हैैं वह नुकसान पहुंचा रहे हैैं। बड़े अंतरिक्ष सैटेलाइट की तुलना में मिशन शक्ति से हुआ नुकसान बहुत कम होगा। मेरा मानना है कि यह वैसा ही है जैसे समुद्र में पानी के कुछ बूंद। मेरा अनुमान है कि इससे कुछ टुकड़े अंतरिक्ष में फैलेंगे, इससे ज्यादा कुछ नहीं।.
नीति आयोग के मौजूदा सदस्य वी के सारस्वत रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन के पूर्व प्रमुख हैं। उन्हीं के कार्यकाल में एंटी सैटेलाइट मिसाइल तकनीकी पर काम शुरू हुआ था।के विशेष संवाददाता जयप्रकाश रंजन के साथ बातचीत में उन्होंने बुधवार को पीएम नरेंद्र मोदी की तरफ से राष्ट्रीय प्रसारण में ऐलान किये गये मिशन शक्ति से जुड़ी कुछ जानकारी साझा की।भारत के लिए मिशन शक्ति उसी तरह का महत्व है जैसा अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार की तरफ से किया गया परमाणु परीक्षण था। यह दुनिया को भारत की तकनीकी क्षमता से अवगत कराता है साथ ही हमारी रणनीतिक क्षमता को मजबूत करता है। यह अंतरिक्ष विज्ञान में हमारी असीमित क्षमता को बताता है जिसका असर बाद में दिखाई देगा। यह भारत को इंटर कंटीनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता को मजबूत करता है साथ ही यह कूटनीतिक तौर पर भारत को बेहतर तरीके से अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने हितों की रक्षा करने की क्षमता देता है।आपको बता दूं जब भारत ने पहली बार अग्नि मिसाइल का परीक्षण किया था तो हमारे ऊपर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाये गये थे। भारत के लिए छोटे-छोटे मिसाइल को हासिल करना मुश्किल हो गया था। लेकिन अब हमारे पास इस क्षेत्र की सबसे आधुनिक तकनीक है। मिशन शक्ति यह भी बताता है कि अब दूसरा कोई भी देश भारत की अंतरिक्ष परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की हिम्मत नहीं कर सकता क्योंकि उसे मालूम होगा कि हम भी उसे उतना ही भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन यह याद रखना चाहिए कि इस तरह की तकनीकी का इस्तेमाल तभी होता है जब कोई देश हमारे सैटेलाइट को नुकसान पहुंचाए। प्रश्न : क्या यह बात सच है कि जब आप डीआरडीओ के प्रमुख थे तब आपने इसी तकनीकी के लिए तत्कालीन यूपीए सरकार से अनुमति मांगी थी और आपको अनुमति नहीं दी गई थी?हां, हमने इस बारे में तत्कालीन सरकार के संबंधित मंत्रियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से बात की थी। अपना निवेदन रखा था। हमें अतिरिक्त वित्तीय संसाधन और सरकार की मंजूरी की जरूरत थी। जो किसी वजह से हमें नहीं दी गई। अगर उस वक्त यह मंजूरी दी गई होती तो वर्ष 2015 तक हम एंटी सैटेलाइट मिसाइल क्षमता हासिल कर लिये होते।मुझे लगता है कि पीएम नरेंद्र मोदी और मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इस तकनीकी की जरूरत समझी कि यह भारत के लिए कितना जरूरी है। पीएम मोदी पहले ही कह चुके हैैं कि रक्षा क्षेत्र में जो भी तकनीकी की जरूरत है उस हासिल किया जाना चाहिए और उसमें देरी नहीं होनी नहीं चाहिए। इस तरह की किसी भी बड़े तकनीकी उन्नयन के लिए सरकार के उच्च स्तर पर मंजूरी की जरूरत होती है।उत्तर- निश्चित तौर पर इस तरह के किसी भी मिसाइल परीक्षण से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। लेकिन आपको याद रखना होगा कि अंतरिक्ष के कारोबार में जो भी देश हैैं वह नुकसान पहुंचा रहे हैैं। बड़े अंतरिक्ष सैटेलाइट की तुलना में मिशन शक्ति से हुआ नुकसान बहुत कम होगा। मेरा मानना है कि यह वैसा ही है जैसे समुद्र में पानी के कुछ बूंद। मेरा अनुमान है कि इससे कुछ टुकड़े अंतरिक्ष में फैलेंगे, इससे ज्यादा कुछ नहीं।
United States Latest News, United States Headlines
Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.
दाती महाराज की अग्रिम जमानत को CBI ने दी चुनौती, HC ने भेजा नोटिसबलात्कार के आरोप में घिरे दाती महाराज की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने दाती महाराज और उसके तीन सौतेले भाइयों को नोटिस जारी किया है. यह नोटिस सीबीआई की उस अर्जी पर जारी किया गया है, जिसमें दाती महाराज को निचली अदालत से मिली अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की गई है.
Read more »
जानें- क्या है लो अर्थ ऑर्बिट, जहां भारत ने दिखाई दुनिया को शक्तिभारत ने पृथ्वी की निचली कक्षा में स्वदेशी एंटी सैटेलाइट मिसाइल से पृथ्वी की निचली कक्षा यानी लो अर्थ ऑर्बिट (Low Earth Orbit) में एक सैटेलाइट को मार गिराया है.जानते हैं आखिर क्या है लो अर्थ ऑर्बिट?
Read more »
मिशन शक्ति: अंतरिक्ष में भारत ने दिखाया दम, मोदी के ये हैं 10 बड़े संदेशप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देश के नाम संबोधित किया. प्रधानमंत्री कहा कि कुछ ही समय पहले देश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. भारत ऐसा देश बन गया है जो अंतरिक्ष में किसी भी सैटेलाइट को मारकर गिरा सकता है. इस उपलब्धि के साथ अमेरिका, चीन और रूस के बाद ऐसा करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है.
Read more »
मिशन शक्ति: अंतरिक्ष की चौथी महाशक्ति बना भारत, लोगों ने कहा- सबूत मत मांग लेनाभारत अंतरिक्ष की दुनिया में विश्व की चौथी महाशक्ति बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा देशवासियों को इसके बारे में जानकारी देने के बाद सोशल मीडिया पर MissionShakti ट्रेंड कर रहा है।
Read more »
LIVE: 'शक्ति' को कांग्रेस ने अपना बताया, जेटली बोले- पिछली सरकार ने नहीं दी इजाजतMissionShakti की कामयाबी पर बोले arunjaitley- पिछली सरकार ने नहीं दिखाई थी इच्छाशक्ति
Read more »
अरुण जेटली ने कहा- मिशन शक्ति पर लगातार चल रहा था काम- Amarujalaअरुण जेटली ने कहा- मिशन शक्ति पर लगातार चल रहा था काम AntiSatelliteMissile ASAT narendramodi arunjaitley isro DRDO_India
Read more »
क्या है मिशन शक्ति जिसका ऐलान खुद मोदी ने किया | DW | 27.03.2019एंटी सैटेलाइट मिसाइल, लो अर्थ ऑरबिट. टेस्ट फायर, लाइव सैटेलाइट जैसे शब्द पीएम मोदी की घोषणा के बाद से ही ट्रेंड में आ गए हैं. क्या है इनका मतलब और क्या है ऑपरेशन शक्ति का महत्व, आइए जानते हैं.
Read more »
