यूपीएससी में फर्जी सर्टिफिकेट का पहला मामला आईएएस प्रशिक्षु पूजा खेडकर का आया था। कई दिनों तक सोशल मीडिया में उनके सर्टिफिकेट को लेकर कई तरह की बातें कहीं जा रही थीं।
पिछले कुछ दिनों से संघ लोक सेवा आयोग 'यूपीएससी' लगातार चर्चा में है। एक तरफ सोशल मीडिया में 'फर्जी सर्टिफिकेट' के जरिए आईएएस की नौकरी लेना, ऐसे मामले देखने को मिल रहे हैं, तो दूसरी तरफ, यह खबर सामने आई है कि यूपीएससी के अध्यक्ष डॉ.
मनोज सोनी ने कई दिन पहले अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। अभी तक उनका त्यागपत्र स्वीकृत हुआ है या नहीं, इसकी कोई पुख्ता सूचना नहीं है। हालांकि आयोग की वेबसाइट पर दो जुलाई की अपडेट के मुताबिक डॉ. मनोज सोनी, बतौर अध्यक्ष, दिखाई पड़ रहे हैं। आयोग में देश के सबसे युवा कुलपति होने का गौरव प्राप्त करने वाले, राज्य लोक सेवा आयोग में सबसे युवा अध्यक्ष रहे, सैन्य पर्सन एवं पूर्व IAS/IPS, शामिल हैं। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जन खरगे ने शनिवार को एक्स पर लिखा, योग्य व्यक्तियों द्वारा फर्जी जाति और चिकित्सा प्रमाण पत्र बनाने के कई मामलों से ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने यूपीएससी की 'फुलप्रूफ' प्रणाली को धोखा दिया है। इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। यूपीएससी में फर्जी सर्टिफिकेट का पहला मामला आईएएस प्रशिक्षु पूजा खेडकर का आया था। कई दिनों तक सोशल मीडिया में उनके सर्टिफिकेट को लेकर कई तरह की बातें कहीं जा रही थीं। उनके मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय कमेटी बनाई गई। अब उनकी ट्रेनिंग रोक दी गई है। आयोग ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस में पूजा के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करा दिया है। इस दौरान सोशल मीडिया में दर्जनों आईएएस/आईपीएस व यूपीएससी के तहत अन्य सेवाओं में भर्ती हुए लोगों के सर्टिफिकेट को लेकर कई तरह के खुलासे होने लगे। कई अफसरों ने तो अपना सोशल मीडिया अकाउंट ही बंद कर दिया। कुछ अधिकारियों ने अकाउंट को प्राइवेट कर दिया। कांग्रेस पार्टी के नेता जयराम रमेश ने एक्स पर अपनी एक पोस्ट में लिखा, 2014 के बाद से सभी संवैधानिक निकायों की पवित्रता, प्रतिष्ठा, स्वायत्तता और प्रोफेशनलिज्म को बुरी तरह से डैमेज किया गया है, लेकिन समय-समय पर स्वयंभू नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री को भी कहने के लिए मजबूर होना पड़ता है कि 'अब बहुत हो गया'। यूपीएससी के अध्यक्ष और सदस्यों का प्रोफाइल डॉ. मनोज सोनी, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग 'यूपीएससी' के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया है, उन्हें 28 जून 2017 को आयोग का बतौर सदस्य नियुक्त किया गया था। वे 15 मई 2023 तक आयोग के सदस्य रहे थे। उसके बाद वे आयोग के अध्यक्ष बने। उनका कार्यकाल 15 मई 2029 तक था। मनोज सोनी ने तीन बार कुलपति के रूप में कार्य किया है। वे डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में एक अगस्त 2009 से लेकर 31 जुलाई 2015 तक कार्य करते रहे हैं। इसके बाद उन्हें महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा का कुलपति बनाया गया। ये पदभार ग्रहण करने वाले डॉ. सोनी, भारत के अभी तक सबसे युवा कुलपति थे। लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला, यूपीएससी के सदस्य हैं। इनकी सेवानिवृत्ति 26 मार्च 2027 को है। इन्हें भारतीय सेना में चार दशक तक कार्य करने का अनुभव हासिल है। राज शुक्ला ने आतंकवाद रोधी अभियान के इन्फैंट्री ब्रिगेड, कश्मीर घाटी में नियंत्रण रेखा के साथ लगे बारामूला डिवीजन और देश की पश्चिमी सीमाओं से लगे एक प्रधान सैन्यदल की कमान संभाली है। वे डिफेंस सर्विसेज स्टॉफ कालेज वेलिंगटन, कालेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट सिकंदराबाद और नेशनल डिफेंस कालेज नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्हें पीवीएसएम, वाईएसएम और एसएम का सम्मान मिला है। प्रीति सूदन भी आयोग की सदस्य हैं। वे आंध्रप्रदेश कैडर के 1983 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं। जुलाई 2020 में वे स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव पद से रिटायर हुई थीं। उन्हें कार्य पालिका के प्राय: सभी क्षेत्रों में लगभग 37 साल की सेवा करने का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने केंद्र में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा रक्षा मंत्रालय में भी सेवाएं दी हैं। उन्हें 29 नवंबर 2022 को आयोग का सदस्य बनाया गया था। वे 29 अप्रैल 2025 तक यूपीएससी के सदस्य के तौर पर काम करेंगी। सुमन शर्मा को 25 मई 2023 में आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया था। उन्होंने मेरठ विश्वविद्यालय से कार्बनिक रसायन विज्ञान में पीजी की है। यूके से एमबीए की है। वे भारतीय राजस्व सेवा 1990 बैच की अधिकारी के तौर पर 30 से अधिक वर्ष तक आयकर विभाग और सीबीडीटी में कई महत्वपूर्ण पदों पर रही हैं। सुमन शर्मा, अंतरराष्ट्रीय कराधान और ट्रांसफर प्राइसिंग विषयों से जुड़ी रही हैं। वे 24 मई 2029 तक 'यूपीएससी' में बतौर सदस्य के तौर पर काम करेंगी। विद्युत बी. स्वैन भी आयोग के सदस्य हैं। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के गुजरात कैडर के 1988 बैच के अधिकारी हैं। स्वैन ने 1989 और 2018 के बीच गुजरात में जिला एवं राज्य स्तर पर कई पदभार संभाले हैं। वे भारत सरकार के वाणिज्य विभाग में अपर सचिव रहे हैं। उन्होंने विशेष आर्थिक क्षेत्र, सीआईएस देशों के साथ भारत की व्यापार वार्ता और निर्यात बीमा के कार्य में योगदान दिया है। जनवरी 2021 में उनकी तैनाती, भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय में सचिव के तौर पर हुई थी। यहां पर उन्होंने मई 2023 तक कार्य किया है। वे चार सितंबर 2028 तक यूपीएससी के सदस्य के तौर पर काम करते रहेंगे। डॉ. दिनेश दासा, यूपीएससी के सदस्य हैं। उन्होंने गुजरात कृषि विश्वविद्यालय नवसार से कृषि वानिकी में पीएचडी की है। संघ लोक सेवा आयोग में कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व डॉ. दासा ने गुजरात लोक सेवा आयोग, दस माह तक बतौर सदस्य के रूप में कार्य किया था। उसके बाद उन्हें गुजरात लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष बना दिया गया। वे 31 जनवरी 2022 तक इस पद पर रहे। 41 वर्ष की आयु में डॉ. दिनेश दासा, भारत के किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अब तक के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष थे। गुजरात लोक सेवा आयोग से अपनी संबद्धता के दौरान, डॉ. दासा ने अखिल भारतीय लोक सेवा आयोगों की स्थायी समिति के सदस्य के रूप में कार्य किया है। वे 28 सितंबर 2029 को रिटायर होंगे। शील वर्धन सिंह, आईपीएस से रिटायर हुए हैं। उन्हें 15 जनवरी 2024 को आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया था। वे 37 साल तक पुलिस सर्विस में रहे हैं। उन्हें नवंबर 2021 से अगस्त 2023 तक सीआईएसएफ डीजी के रूप में कार्य किया है। वे भारतीय उच्चायोग, ढाका में भी तैनात रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने कई दूसरे पदों पर भी कार्य किया है। संजय वर्मा ने एक फरवरी 2024 को संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में शपथ ली थी। वे 1990 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल हुए थे। उन्होंने सचिव 'पश्चिम', प्रोटोकॉल प्रमुख, संयुक्त सचिव 'उर्जा सुरक्षा', ओएसडी 'प्रेस संबंध' और उप सचिव 'चीन' जैसे पदों पर कार्य किया है। वे स्पेन, अंडोरा और यूएनडब्ल्यूटीओ में राजदूत रहे हैं। संजय वर्मा, 27 जनवरी 2030 तक यूपीएससी में बतौर सदस्य काम करेंगे। कांग्रेस ने कसा तंज कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने यूपीएससी के अध्यक्ष को लेकर तंज कसा है। उन्होंने कहा, नरेंद्र मोदी 2017 में गुजरात से अपने पसंदीदा 'शिक्षाविदों' में से एक को यूपीएससी सदस्य के रूप में लाए। उन्हें 2023 में छह साल के कार्यकाल के लिए अध्यक्ष बनाया। इस तथाकथित प्रतिष्ठित सज्जन ने अब अपना कार्यकाल समाप्त होने से पांच साल पहले ही इस्तीफा दे दिया है। कारण चाहे जो भी बताए जाएं, यह स्पष्ट रूप से लगा रहा था कि यूपीएससी के मौजूदा विवाद को देखते हुए उन्हें बाहर किया जाएगा। ऐसे कई और व्यक्तियों ने सिस्टम को आबाद किया है। उदाहरण के लिए, एनटीए के अध्यक्ष अब तक इससे अछूते क्यों हैं। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, भाजपा-आरएसएस व्यवस्थित रूप से भारत के संवैधानिक निकायों पर संस्थागत कब्जा करने में लगी हुई है। इसके चलते इन संस्थानों की प्रतिष्ठा, अखंडता और स्वायत्तता को नुकसान पहुंच रहा है। पीएम मोदी और उनके कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्री को सफाई देनी होगी। उन्हें बताना होगा कि आयोग की 'फुलप्रूफ' प्रणाली को कौन धोखा दे रहा है। यह एससी, एसटी, ओबीसी, और ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों सहित लाखों उन उम्मीदवारों की वास्तविक आकांक्षाओं का सीधा अपमान है, जो सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी के लिए आधी रात को कड़ी मेहनत करते हैं। यह परेशान करने वाली बात है कि कैसे यूपीएससी अध्यक्ष ने अपना कार्यकाल समाप्त होने से पांच साल पहले ही इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा एक महीने तक गुप्त क्यों रखा गया। क्या इतने सारे घोटालों और इस्तीफे के बीच कोई संबंध है। मोदी इन्हें गुजरात से लाए थे। पदोन्नत कर उन्हें यूपीएससी का अध्यक्ष बनाया गया। सरदार वल्लभभाई पटेल ने सिविल सेवकों को 'भारत का स्टील फ्रेम' कहा था, लेकिन शासन के हर पहलू को नियंत्रित करने की मोदी सरकार की हताश कोशिश ने इसमें छेद कर दिया है। इस मामले की उच्चतम स्तर पर गहन जांच की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में यूपीएससी प्रवेश में धोखाधड़ी के ऐसे मामले न हों।
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