यूपीएससी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने डीजीपी का पद खाली होने के बाद प्रस्ताव भेजने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित तीन महीने की समय सीमा पार कर दी थी। इसलिए, यूपीएससी ने राज्य सरकार से स्पष्टीकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने को कहा था।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के अगले डीजीपी की नियुक्ति को लेकर जारी गतिरोध पर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने हस्तक्षेप किया है। संघ लोक सेवा आयोग को सुप्रीम कोर्ट जाने के निर्देश को दरकिनार करते हुए CAT ने राज्य सरकार को 23 जनवरी तक अपना प्रस्ताव दोबारा भेजने को कहा है। साथ ही यूपीएससी को निर्देश दिया गया है कि वह 29 जनवरी तक तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल बनाकर राज्य सरकार को भेजे, जिसमें से एक को डीजीपी चुना जाएगा। मौजूदा डीजीपी राजीव कुमार 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। यह आदेश नवंबर 2025 में दायर उस याचिका पर आया है, जिसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार ने यूपीएससी और केंद्र सरकार के खिलाफ दाखिल किया था। वर्तमान में वे राज्य सरकार में प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत हैं और उनका भी रिटायरमेंट 31 जनवरी को है।क्या है पूरा मामलादरअसल, बंगाल में डीजीपी का पद 27 दिसंबर 2023 को तत्कालीन डीजीपी मनोज मालवीय के रिटायर होने के बाद खाली हुआ था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर UPSC को पैनल भेजना था, लेकिन बंगाल सरकार ने करीब डेढ़ साल बाद 16 जुलाई 2025 को 10 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची UPSC को भेजी, जिसमें राजेश कुमार का नाम भी शामिल था। UPSC ने यह कहते हुए प्रस्ताव लौटा दिया था कि राज्य सरकार ने समयसीमा का उल्लंघन किया है और इस मामले में स्पष्टता के लिए सुप्रीम कोर्ट से निर्देश लेना होगा। हालांकि CAT ने UPSC के इस रुख को खारिज करते हुए कहा कि पदोन्नति पर विचार किए जाने का अधिकार मौलिक अधिकार है और आयोग की लंबी निष्क्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार की देरी का खामियाजा CAT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजीत मोर और सदस्य राजिंदर कश्यप ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि जब 16 जुलाई 2025 को प्रस्ताव भेजा गया था, तब याचिकाकर्ता के पास छह महीने से अधिक की सेवा शेष थी। UPSC ने बैठक 30 अक्टूबर 2025 को बुलाई और उसके बाद प्रस्ताव लौटा दिया, जो उचित नहीं है। राज्य सरकार की देरी का खामियाजा अधिकारी को नहीं भुगतना चाहिए। गौरतलब है कि डीजीपी नियुक्ति का मुद्दा पहले भी केंद्र और राज्यों के बीच टकराव का कारण बनता रहा है। सुप्रीम कोर्ट के 2006 के प्रकाश सिंह फैसले और बाद के निर्देशों के अनुसार, राज्य सरकार को UPSC को प्रस्ताव भेजना होता है, UPSC तीन अधिकारियों का पैनल बनाता है और राज्य उनमें से एक को नियुक्त करता है। हालांकि उत्तर प्रदेश जैसे कुछ राज्यों ने अपने अलग नियम बना लिए हैं।इन राज्यों में भी हुआ था टकरावतमिलनाडु और झारखंड का भी इस मुद्दे पर केंद्र के साथ टकराव हुआ था। इस समस्या से बचने के लिए, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों ने कार्यवाहक DGP नियुक्त किए हैं। चुनाव वर्ष में प्रवेश करते हुए, पश्चिम बंगाल प्रशासन भी तीन महीने के लिए चुनाव आयोग के नियंत्रण में रहने की संभावना है। चुनाव आयोग के पास चुनाव कराने के लिए अपने कर्मियों, जिसमें DGP भी शामिल है, की नियुक्ति करने की पूरी शक्ति होती है।.
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के अगले डीजीपी की नियुक्ति को लेकर जारी गतिरोध पर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने हस्तक्षेप किया है। संघ लोक सेवा आयोग को सुप्रीम कोर्ट जाने के निर्देश को दरकिनार करते हुए CAT ने राज्य सरकार को 23 जनवरी तक अपना प्रस्ताव दोबारा भेजने को कहा है। साथ ही यूपीएससी को निर्देश दिया गया है कि वह 29 जनवरी तक तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल बनाकर राज्य सरकार को भेजे, जिसमें से एक को डीजीपी चुना जाएगा। मौजूदा डीजीपी राजीव कुमार 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। यह आदेश नवंबर 2025 में दायर उस याचिका पर आया है, जिसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार ने यूपीएससी और केंद्र सरकार के खिलाफ दाखिल किया था। वर्तमान में वे राज्य सरकार में प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत हैं और उनका भी रिटायरमेंट 31 जनवरी को है।क्या है पूरा मामलादरअसल, बंगाल में डीजीपी का पद 27 दिसंबर 2023 को तत्कालीन डीजीपी मनोज मालवीय के रिटायर होने के बाद खाली हुआ था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर UPSC को पैनल भेजना था, लेकिन बंगाल सरकार ने करीब डेढ़ साल बाद 16 जुलाई 2025 को 10 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची UPSC को भेजी, जिसमें राजेश कुमार का नाम भी शामिल था। UPSC ने यह कहते हुए प्रस्ताव लौटा दिया था कि राज्य सरकार ने समयसीमा का उल्लंघन किया है और इस मामले में स्पष्टता के लिए सुप्रीम कोर्ट से निर्देश लेना होगा। हालांकि CAT ने UPSC के इस रुख को खारिज करते हुए कहा कि पदोन्नति पर विचार किए जाने का अधिकार मौलिक अधिकार है और आयोग की लंबी निष्क्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार की देरी का खामियाजा CAT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजीत मोर और सदस्य राजिंदर कश्यप ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि जब 16 जुलाई 2025 को प्रस्ताव भेजा गया था, तब याचिकाकर्ता के पास छह महीने से अधिक की सेवा शेष थी। UPSC ने बैठक 30 अक्टूबर 2025 को बुलाई और उसके बाद प्रस्ताव लौटा दिया, जो उचित नहीं है। राज्य सरकार की देरी का खामियाजा अधिकारी को नहीं भुगतना चाहिए। गौरतलब है कि डीजीपी नियुक्ति का मुद्दा पहले भी केंद्र और राज्यों के बीच टकराव का कारण बनता रहा है। सुप्रीम कोर्ट के 2006 के प्रकाश सिंह फैसले और बाद के निर्देशों के अनुसार, राज्य सरकार को UPSC को प्रस्ताव भेजना होता है, UPSC तीन अधिकारियों का पैनल बनाता है और राज्य उनमें से एक को नियुक्त करता है। हालांकि उत्तर प्रदेश जैसे कुछ राज्यों ने अपने अलग नियम बना लिए हैं।इन राज्यों में भी हुआ था टकरावतमिलनाडु और झारखंड का भी इस मुद्दे पर केंद्र के साथ टकराव हुआ था। इस समस्या से बचने के लिए, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों ने कार्यवाहक DGP नियुक्त किए हैं। चुनाव वर्ष में प्रवेश करते हुए, पश्चिम बंगाल प्रशासन भी तीन महीने के लिए चुनाव आयोग के नियंत्रण में रहने की संभावना है। चुनाव आयोग के पास चुनाव कराने के लिए अपने कर्मियों, जिसमें DGP भी शामिल है, की नियुक्ति करने की पूरी शक्ति होती है।
पश्चिम बंगाल न्यूज पश्चिम बंगाल डीजीपी पश्चिम बंगाल का नया डीजीपी ममता बनर्जी West Bengal News West Bengal News In Hindi West Bengal New Dgp News About West Bengal Dgp Latest News About West Bengal Dgp
United States Latest News, United States Headlines
Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.
CM मोहन यादव भी हैं इस अधिकारी के कायल, कौन हैं चर्चा में आए सागर कलेक्टर संदीप जी.आर?Collector Sandeep G R: बेंगलुरु के एक इंजीनियर ने जब UPSC की राह चुनी, तो इरादा साफ था कि बदलाव फाइलों में नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए। सागर कलेक्टर संदीप जी.आर.
Read more »
ग्रीनलैंड के पीछे क्यों पड़ा है अमेरिका? रिपोर्ट्स बता रहीं 3 बड़े कारण, अपडेट कर लें अपने नोट्सInternational Relations UPSC Notes on America and Greenland: ग्रीनलैंड को स्वायत्ता मिली हुई है, लेकिन विदेश, रक्षा और आर्थिक मामलों को लेकर फैसला लेने का अधिकार डेनमार्क के पास ही है। इस बारे में स्टूडेंट्स को मालूम होना चाहिए।
Read more »
CRPF की सिमरन बाला: गणतंत्र दिवस 2026 पर पुरुष मार्चिंग टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी2026 गणतंत्र दिवस पर, CRPF की सहायक कमांडेंट सिमरन बाला इतिहास रचने के लिए तैयार हैं। वह CRPF की पुरुष मार्चिंग टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी होंगी। जम्मू-कश्मीर की रहने वाली सिमरन ने UPSC CAPF परीक्षा पास की और CRPF में शामिल हुईं। उनकी यह उपलब्धि महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत उदाहरण है, जो दिखाती है कि महिलाएं सुरक्षा बलों में नेतृत्व की भूमिका निभा सकती हैं।
Read more »
हाथ-पैर नहीं, हौसला बुलंद! सहरसा के निगम आनंद UPSC पास कर IAS बनने का देख रहे सपना, रोज लिखते हैं 10 पन्नेInspire Story : सहरसा के निगम आनंद जन्मजात दिव्यांग हैं, मगर वह UPSC अधिकारी बनने का सपना देख रहे हैं. मगध यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट निगम की लिखावट के लोग दीवानें हैं. आज वह युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं
Read more »
21 जनवरी क्यों है खास? एक तारीख में छिपा है तीन राज्यों का इतिहास, UPSC में भी पूछा जाता है सवालUPSC Polity Facts: 21 जनवरी भारतीय इतिहास की एक बेहद अहम तारीख है. आजादी के करीब 25 साल बाद इसी दिन भारत को तीन नए राज्य मिले थे. मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा को 21 जनवरी 1972 को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया.
Read more »
ये हैं वो सरकारी भर्तियां... जिनकी चर्चा कम होती है और लग जाए तो मिलती है मोटी सैलरी!देश में जब सरकारी नौकरी की बात होती है तो चर्चा UPSC, SSC और बैंकिंग एग्जाम तक सीमित रह जाती है. लेकिन इनके अलावा भी कई ऐसी भर्तियां हैं जिनकी बारे में बात भले ही कम होती है लेकिन नौकरी लगने के बाद इनकी सैलरी और सुविधाएं बहुत ज्यादा होती हैं.
Read more »
