विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में 29 मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है। कर्मचारियों ने प्रबंधन पर निजी घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए गलत आंकड़े पेश करने का आरोप लगाया है। रोजाना तीन घंटे प्रदर्शन किया जा रहा है और 21 मई से केंद्रीय पदाधिकारी दौरा...
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पूर्वांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण के विरोध में बिजली निगम के अभियंता व कर्मचारी 29 मई से काम नहीं करेंगे। निजीकरण निरस्त होने तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। बिजलीकर्मियों ने अब आर-पार की लड़ाई की घोषणा कर दी है। मंगलवार को अभियंताओं व कर्मचारियों ने तीन घंटे प्रदर्शन किया। मोहद्दीपुर स्थित मुख्य अभियंता के कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर रहे विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि निजी घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रबंधन ने इस कदर मनमानी शुरू कर दी है कि घाटा का फर्जी आंकड़ा पेश कर दिया है। सही आंकड़ा को वह मानने को तैयार नहीं हैं। प्रबंधन उपभोक्ताओं पर इसका बोझ डालना चाह रहा है। इसका लाभ निजी घरानों को मिलेगा। अब 28 मई तक रोजाना तीन घंटे विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। 29 मई से संघर्ष समिति ने निजीकरण के विरोध में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का नोटिस दिया है। अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार के पहले 21 मई से संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों का दौरा होगा। इस दौरान जीवेश नंदन, अमित आनंद, भानु प्रताप सिंह, योगेश यादव, अरुण सिंह, अभय सिंह, राजेश कुमार, प्रभुनाथ प्रसाद, संगम लाल मौर्य, राकेश चौरसिया, इस्माइल खान, संदीप श्रीवास्तव, विजय बहादुर सिंह, दिलीप गौतम, करुणेश त्रिपाठी, ओम गुप्ता, सत्यव्रत पांडेय, विमलेश पाल, रामकिशुन सिंह, राजकुमार सागर आदि मौजूद रहे। आगरा में हर वर्ष 274 करोड़ रुपये का नुकसान पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि आगरा में बिजली निगम 5.
55 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद कर निजी कंपनी को 4.36 रुपये प्रति यूनिट में दे रहा है। इस कारण हर वर्ष 274 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है। प्रबंधन को बताना होगा कि चार दिन पहले नियामक आयोग को सौंपे गए वार्षिक आवर्ती राजस्व में 9206 करोड़ रुपये के घाटे की बात कही गई थी। अब इसे बदलकर 19 हजार 600 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया गया है। प्रबंधन बताए कि निजीकरण के बाद सरकार सब्सिडी देगी या नहीं देगी क्योंकि उनके द्वारा जारी किए गए आंकड़ों में बार-बार सब्सिडी का उल्लेख किया गया है। कहा कि बिजली निगम की ओर से जारी आंकड़े भ्रामक हैं। घाटा बढ़ाकर दिखाने का मकसद केवल निजी घरानों की मदद करना है।
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