UP News: अरबों खर्च कर बिजली कंपनियों के निजीकरण पर आयोग पहुंचा उपभोक्ता परिषद, रखी है यह मांग

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लखनऊ बिजली कंपनियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आरडीएसएस योजना के तहत अरबों खर्च करने के बाद निजीकरण पर सवाल उठे हैं। उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में याचिका दायर कर परफॉरमेंस रिपोर्ट मांगी है। लगभग 44 हजार करोड़ रुपये खर्च होने के बाद पूर्वांचल व दक्षिणांचल के 42 जिलों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है। परिषद ने सीबीआइ जांच की मांग की...

राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। वित्तीय संकट से जूझ रही बिजली कंपनियों को आत्म निर्भर बनाने के लिए आरडीएसएस के तहत अरबों रुपये खर्च करने के बाद निजीकरण करने पर सवाल उठाते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया है। उपभोक्ता परिषद ने जनहित प्रस्ताव दाखिल कर कहा कि पिछले वर्ष 13 अगस्त को आयोग ने योजना को अनुमोदित करते हुए छह माह के अंतराल पर परफार्मेंस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था लेकिन कंपनियां रिपोर्ट क्यों नहीं दे रही हैं? गौरतलब है कि बिजली कंपनियों में हर स्तर पर सुधार कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए 60 प्रतिशत केंद्रीय सहायता वाली योजना के तहत लगभग 44 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें दक्षिणांचल डिस्काम में लगभग 7,434 करोड़, मध्यांचल में 13,539 करोड़, पश्चिमांचल में 12,695 करोड़, पूर्वांचल डिस्काम में 9,481 करोड़ व केस्को में 943 करोड़ रुपये के काम हो रहे हैं। भारी-भरकम धनराशि खर्च होने के बाद पूर्वांचल व दक्षिणांचल के 42 जिलों की बिजली आपूर्ति को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का कहना है कि सरकार द्वारा निजीकरण पर राय मांगने की दशा में आयोग उसे खारिज करे और कंपनियों में हुए सुधार को देखे। विदित हो कि पावर कारपोरेशन ने कहा था कि योजना के तहत स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लगने से 40 रुपये प्रति मीटर के हिसाब से बिजली कंपनियों को फायदा होगा। उल्लेखनीय है कि उपभोक्ता परिषद ने राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को पत्र लिख पूरे मामले की सीबीआइ जांच कराने की मांग पहले ही कर चुका है।.

राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। वित्तीय संकट से जूझ रही बिजली कंपनियों को आत्म निर्भर बनाने के लिए आरडीएसएस के तहत अरबों रुपये खर्च करने के बाद निजीकरण करने पर सवाल उठाते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया है। उपभोक्ता परिषद ने जनहित प्रस्ताव दाखिल कर कहा कि पिछले वर्ष 13 अगस्त को आयोग ने योजना को अनुमोदित करते हुए छह माह के अंतराल पर परफार्मेंस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था लेकिन कंपनियां रिपोर्ट क्यों नहीं दे रही हैं? गौरतलब है कि बिजली कंपनियों में हर स्तर पर सुधार कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए 60 प्रतिशत केंद्रीय सहायता वाली योजना के तहत लगभग 44 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें दक्षिणांचल डिस्काम में लगभग 7,434 करोड़, मध्यांचल में 13,539 करोड़, पश्चिमांचल में 12,695 करोड़, पूर्वांचल डिस्काम में 9,481 करोड़ व केस्को में 943 करोड़ रुपये के काम हो रहे हैं। भारी-भरकम धनराशि खर्च होने के बाद पूर्वांचल व दक्षिणांचल के 42 जिलों की बिजली आपूर्ति को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का कहना है कि सरकार द्वारा निजीकरण पर राय मांगने की दशा में आयोग उसे खारिज करे और कंपनियों में हुए सुधार को देखे। विदित हो कि पावर कारपोरेशन ने कहा था कि योजना के तहत स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लगने से 40 रुपये प्रति मीटर के हिसाब से बिजली कंपनियों को फायदा होगा। उल्लेखनीय है कि उपभोक्ता परिषद ने राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को पत्र लिख पूरे मामले की सीबीआइ जांच कराने की मांग पहले ही कर चुका है।

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