UP ही क्यों देता है देश को सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री? समझिए दिल्ली की सत्ता में राज्य की अहमियत

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UP ही क्यों देता है देश को सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री? समझिए दिल्ली की सत्ता में राज्य की अहमियत
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Lok Sabha Chunav 2024: देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की केंद्र की सियासत में अहम भूमिका है, जिसके चलते ही राज्य ने देश को सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री दिए हैं।

Lok Sabha Chunav 2024 : लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर 380 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है। चुनावी चर्चा के बीच प्रधानमंत्रियों के इतिहास पर नजर डालना भी अहम है। देश में अब तक हुए देश के 15 प्रधानमंत्रियों में से ज्यादातर प्रधानमंत्री यूपी से संबंध रखने वाले रहे हैं। देश की आबादी में यूपी का हिस्सा 17 प्रतिशत से ज्यादा है। देश के 15 में से 6 प्रधानमंत्री यूपी में जन्मे थे। वहीं 9 प्रधानमंत्री ऐसे रहे जो कि यूपी की अलग-अलग सीटों का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं, इसके अलावा पंजाब से आने वाले तीन नेता देश के प्रधानमंत्री रहे हैं। कार्यकाल के मामले में कौन आगे? यूपी के बाद महाराष्ट्र भारत के दूसरे सबसे बड़े राज्य ने देश को केवल एक ही प्रधानमंत्री दिया है, जो कि राजीव गांधी हैं। गुजरात ने दो प्रधानमंत्री दिए है, राजीव अविभाजित बॉम्बे स्टेट में जन्मे थे। अगर हम प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल पर नजर डालें तो यह संख्या और भी प्रभावशाली है। पद पर रहने वाले सभी प्रधानमंत्रियों में से 75 प्रतिशत समय ऐसे प्रधानमंत्रियों के पास ही गया, जो कि यूपी की सीटों से आते थे। Also Readकौन होते हैं प्रस्तावक, नामांकन में क्या होती है इनकी भूमिका? क्या इनके बिना कोई भी उम्मीदवार नहीं लड़ सकता चुनाव सबसे लंबा रहा 17 साल का कार्यकाल पंडित जवाहरलाल नेहरू का लगभग 17 साल का कार्यकाल था। इसके बाद पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का 15 साल से अधिक रहा था। अटल बिहारी वाजपयी का कार्यकाल छह साल का रहा था। वहीं वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो मई 2014 से पद पर हैं, हालांकि वे मूलरूप से गुजरात से आते हैं। पीएम मोदी संसद में वाराणसी का प्रतिनिधित्व करते हैं। Also ReadUP में कितनी सीटें जीतेगी BJP? अमित शाह ने की यह भविष्यवाणी आंध्र प्रदेश से आते थे नरसिम्हा राव पीवी नरसिम्हा राव को छोड़कर प्रत्येक कांग्रेस नेता ने अपने कार्यकाल के दौरान लोकसभा में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है। नरसिम्हा राव आंध्र प्रदेश से आते थे। सबसे लंबे समय तक राज्यसभा से पीएम रहने वाले डॉक्टर मनमोहन सिंह ने राजस्थान और असम का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। बता दें कि सभी कांग्रेस प्रधान मंत्री उत्तर प्रदेश में पैदा नहीं हुए थे, अंततः वे जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू के पैतृक राज्य का प्रतिनिधित्व करने लगे। Also ReadVaranasi Lok Sabha: श्याम रंगीला का पर्चा खारिज, भावुक होकर बोले-दिल टूट गया है यूपी से रहा नेहरू-गांधी परिवार का नाता नेहरू-गांधी परिवार का उत्तर प्रदेश के साथ पुराना नाता है, शुरुआत तब हुई जब मोतीलाल ने आगरा में वकालत की थी और बाद में इलाहाबाद चले गए थे। उन्होंने इलाहाबाद में स्वराज भवन नाम से एक बड़ी हवेली खरीदी थी, जो अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के लिए अनौपचारिक बैठक स्थल के रूप में काम करेगी। जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी दोनों का जन्म इलाहाबाद में हुआ था और वे 1930 तक स्वराज भवन में रहे थे। Also Readहरियाणा-पंजाब में किसानों के गुस्से का सामना कर रही BJP, सुनील जाखड़ बोले-AAP वालों को भी तो घेरो क्यों खास है उत्तर प्रदेश यूपी 215 मिलियन लोगों के साथ भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। यह लोकसभा में 80 सदस्य भी भेजता है। महाराष्ट्र 48 के साथ दूसरे स्थान पर है। लोकसभा में उत्तर प्रदेश से सांसदों की हिस्सेदारी 20 फीसदी है और राज्य में निर्णायक जीत अक्सर यह तय करती है कि केंद्र में सत्ता में कौन आएगा। आजादी के बाद के तीन दशकों में उत्तर प्रदेश कांग्रेस का गढ़ था। राज्य में मतदाताओं के पैटर्न में बड़े बदलाव के कारण 1977 में कांग्रेस की पहली हार हुई थी। 2014 में भाजपा ने यूपी में रिकॉर्ड 71 सीटें जीतीं, जबकि गठबंधन सहयोगी ने दो सीटें जीतीं थीं। 1984 के बाद यह पहला संसदीय चुनाव था, जो कि पूर्ण बहुमत लेकर आया था।.

Lok Sabha Chunav 2024: लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर 380 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है। चुनावी चर्चा के बीच प्रधानमंत्रियों के इतिहास पर नजर डालना भी अहम है। देश में अब तक हुए देश के 15 प्रधानमंत्रियों में से ज्यादातर प्रधानमंत्री यूपी से संबंध रखने वाले रहे हैं। देश की आबादी में यूपी का हिस्सा 17 प्रतिशत से ज्यादा है। देश के 15 में से 6 प्रधानमंत्री यूपी में जन्मे थे। वहीं 9 प्रधानमंत्री ऐसे रहे जो कि यूपी की अलग-अलग सीटों का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं, इसके अलावा पंजाब से आने वाले तीन नेता देश के प्रधानमंत्री रहे हैं। कार्यकाल के मामले में कौन आगे? यूपी के बाद महाराष्ट्र भारत के दूसरे सबसे बड़े राज्य ने देश को केवल एक ही प्रधानमंत्री दिया है, जो कि राजीव गांधी हैं। गुजरात ने दो प्रधानमंत्री दिए है, राजीव अविभाजित बॉम्बे स्टेट में जन्मे थे। अगर हम प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल पर नजर डालें तो यह संख्या और भी प्रभावशाली है। पद पर रहने वाले सभी प्रधानमंत्रियों में से 75 प्रतिशत समय ऐसे प्रधानमंत्रियों के पास ही गया, जो कि यूपी की सीटों से आते थे। Also Readकौन होते हैं प्रस्तावक, नामांकन में क्या होती है इनकी भूमिका? क्या इनके बिना कोई भी उम्मीदवार नहीं लड़ सकता चुनाव सबसे लंबा रहा 17 साल का कार्यकाल पंडित जवाहरलाल नेहरू का लगभग 17 साल का कार्यकाल था। इसके बाद पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का 15 साल से अधिक रहा था। अटल बिहारी वाजपयी का कार्यकाल छह साल का रहा था। वहीं वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो मई 2014 से पद पर हैं, हालांकि वे मूलरूप से गुजरात से आते हैं। पीएम मोदी संसद में वाराणसी का प्रतिनिधित्व करते हैं। Also ReadUP में कितनी सीटें जीतेगी BJP? अमित शाह ने की यह भविष्यवाणी आंध्र प्रदेश से आते थे नरसिम्हा राव पीवी नरसिम्हा राव को छोड़कर प्रत्येक कांग्रेस नेता ने अपने कार्यकाल के दौरान लोकसभा में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है। नरसिम्हा राव आंध्र प्रदेश से आते थे। सबसे लंबे समय तक राज्यसभा से पीएम रहने वाले डॉक्टर मनमोहन सिंह ने राजस्थान और असम का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। बता दें कि सभी कांग्रेस प्रधान मंत्री उत्तर प्रदेश में पैदा नहीं हुए थे, अंततः वे जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू के पैतृक राज्य का प्रतिनिधित्व करने लगे। Also ReadVaranasi Lok Sabha: श्याम रंगीला का पर्चा खारिज, भावुक होकर बोले-दिल टूट गया है यूपी से रहा नेहरू-गांधी परिवार का नाता नेहरू-गांधी परिवार का उत्तर प्रदेश के साथ पुराना नाता है, शुरुआत तब हुई जब मोतीलाल ने आगरा में वकालत की थी और बाद में इलाहाबाद चले गए थे। उन्होंने इलाहाबाद में स्वराज भवन नाम से एक बड़ी हवेली खरीदी थी, जो अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के लिए अनौपचारिक बैठक स्थल के रूप में काम करेगी। जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी दोनों का जन्म इलाहाबाद में हुआ था और वे 1930 तक स्वराज भवन में रहे थे। Also Readहरियाणा-पंजाब में किसानों के गुस्से का सामना कर रही BJP, सुनील जाखड़ बोले-AAP वालों को भी तो घेरो क्यों खास है उत्तर प्रदेश यूपी 215 मिलियन लोगों के साथ भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। यह लोकसभा में 80 सदस्य भी भेजता है। महाराष्ट्र 48 के साथ दूसरे स्थान पर है। लोकसभा में उत्तर प्रदेश से सांसदों की हिस्सेदारी 20 फीसदी है और राज्य में निर्णायक जीत अक्सर यह तय करती है कि केंद्र में सत्ता में कौन आएगा। आजादी के बाद के तीन दशकों में उत्तर प्रदेश कांग्रेस का गढ़ था। राज्य में मतदाताओं के पैटर्न में बड़े बदलाव के कारण 1977 में कांग्रेस की पहली हार हुई थी। 2014 में भाजपा ने यूपी में रिकॉर्ड 71 सीटें जीतीं, जबकि गठबंधन सहयोगी ने दो सीटें जीतीं थीं। 1984 के बाद यह पहला संसदीय चुनाव था, जो कि पूर्ण बहुमत लेकर आया था।

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