अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने 2017 में साथ मिलकर यूपी विधानसभा का चुनाव लड़ा था.
नई दिल्ली: यूपी में ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर फॉर्मूला वन रेस का रोमांच तो आपने देखा होगा. लोकसभा चुनाव के मैदान में यूपी की 80 सीटों को लेकर भी रोमांच फॉर्मूला वन रेस से कुछ कम नहीं है.
इस बार बीजेपी राम मंदिर और कई मुद्दों के सहारे इस रेस के हर राउंड को जीतने का दावा कर रही है. जबकि अखिलेश यादव -राहुल गांधी 7 साल बाद फिर एक साथ आए हैं. सवाल ये है कि मोदी की लीडरशिप में बीजेपी के फर्राटे के आगे क्या इस बार अखिलेश-राहुल की जोड़ी यूपी में तस्वीर बदल पाएगी. यूपी के चुनावी ट्रैक पर इस बार तीन टीमें हैं. टीम A- मोदी-जयंत चौधरी. टीम B- अखिलेश यादव-राहुल गांधी, टीम C- मायावती उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से BJP ने 75 सीटों पर कैंडिडेट उतारे हैं. समाजवादी पार्टी 62 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. कांग्रेस ने 17 सीटों पर मुकाबले में उतरी है . बहुजन समाज पार्टी ने 80 में से 80 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं. अपना दल 2 सीटों पर मैदान में है. जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोकदल 2 सीटों पर किस्मत आजमा रही है. अमेठी का सस्पेंस: संजय-कांशीराम समेत इन दिग्गजों की भी हुई थी हार, फिर राहुल गांधी को लेकर हंगामा क्यों?इन आंकड़ों पर नजर डालें, तो मोदी यूपी की सियासत के माइकल शूमाकर नज़र आते हैं. पिछले 2 चुनावों में बीजेपी की स्ट्राइक रेट यही कह रही है. 2014 में मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने यूपी की 71 सीटों पर चुनाव लड़ा. बीजेपी का स्ट्राइक रेट 91% रहा. 2019 के इलेक्शन में बीजेपी ने 62 सीटों पर चुनाव लड़ा. पार्टी का स्ट्राइक रेट 79% रहा.2019 में यूपी की रेस के फिनिशिंग पोजिशन अगर हम 2019 में हुई इस चुनावी रेस की फ़िनिशिंग पोजिशन पर नज़र डालें तो, 62 सीटें जीतकर बीजेपी नंबर 1 की पोजिशन पर रही. 10 सीटों के साथ बहुजन समाज पार्टी ने नंबर 2 पर जगह बनाई. समाजवादी पार्टी 5 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रही. जबकि कांग्रेस लास्ट रही. उसने सिर्फ 1 सीट जीती थी.वैसे ये पहला मौका नहीं है, जब अखिलेश यादव और राहुल गांधी पीएम मोदी के खिलाफ टीम बनाकर चुनावी रेस में उतरे हैं. 7 साल पहले विधानसभा चुनाव में भी दोनों साथ आए थे. लेकिन ये जोड़ी पूरी तरह ट्रैक से उतर गई थी. इन चुनावों में मतदान प्रतिशत लगभग 61% रहा. भारतीय जनता पार्टी ने 312 सीटें जीतकर तीन-चौथाई बहुमत हासिल किया. जबकि सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन को 56 सीटें मिलीं. मायावती की बहुजन समाज पार्टी के खाते में 19 सीटें आईं. कांग्रेस को 7 सीटें मिलीं. BJP बनाम 'INDIA': कम वोटिंग से किसे फायदा और किसका नुकसान? एक्सपर्ट्स से समझें वोटर्स की 'सुस्ती' के मायनेयूपी के सियासी ट्रैक पर गौर करें, तो मोदी के आगे हर टीम फेल है. 2019 में टीम SP-BSP को करारी हार का सामना करना पड़ा था. बीजेपी ने 62 सीटें जीती थी. उसकी सहयोगी अपना दल ने 2 सीटें जीती. कुल वोट पर्सेंटेज 50.8 फीसदी रहा. BSP+SP+ ने 15 सीटें जीतीं. उनका वोट पर्सेंटेज 38.9 रहा. कांग्रेस ने एक मात्र सीट पर जीत हासिल की. उसका वोट पर्सेंटेज 6.3 रहा.क्या राहुल गांधी अखिलेश यादव का सात सालों के बाद फिर साथ आना बीजेपी को चुनौती देता हुआ दिखता है? इसके जवाब में राजनीतिक विश्लेषक अदिति फडणवीस कहती हैं,"राहुल गांधी और अखिलेश यादव का साथ आना एक तरह से सिंबॉलिक है. लोगों को लग रहा है कि मोदी जी को हराने के लिए, बीजेपी को हराने के लिए विपक्ष सभी तरह के हथकंडे अपना रहा है. आने वाले समय में मेरे ख्याल से एक या दो सीटों पर सपा भी सिमट जाए, मुझे कोई बहुत ज्यादा हैरानी नहीं होगी." तीन चुनाव में स्कोर-0, इस बार क्या रणनीति? BJP के लिए केरल में सेंधमारी कितनी मुश्किल, समझें - सियासी समीकरण बीजेपी जातियों को साधने में सफल रही है...गैर यादव OBC वोट देखें, तो बसपा का वोट बैंक खिसका है. ऐसे में कौन से समीकरण SP-कांग्रेस को फ़ायदा पहुंचा सकती है? इसके जवाब में राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी कहते हैं,"2017 में जब सपा और कांग्रेस मिलकर लड़े, तो उनका वोट MY वोट तक सीमित है. जिसकी आबादी 30 फीसदी है. 17 फीसदी वोट उन्हें मिला था. अब 2019 के इलेक्शन को देखें, तो 26 फीसदी इस गठबंधन का वोट है. 50 फीसदी से ऊपर का वोट एनडीए का है. अखिलेश यादव ने जाट समाज को साधने की कोशिश की थी. जयंत चौधरी पहले सपा के साथ थे. लेकिन बीजेपी ने उन्हें अपने पाले में कर लिया है. बसपा के पास लोकसभा चुनाव के हिसाब से 18 फीसदी वोट शेयर हैं. अब इस अलायंस का हिस्सा नहीं है. 21 फीसदी दलित वोटों में आज भी मायावती की ठीक-ठाक पकड़ है." अमिताभ तिवारी कहते हैं,"बीजेपी का जो सोशल इंजीनियरिंग ब्लॉक है, वो अपर कास्ट प्लस नॉन यादव ओबीसी जाटव और नॉन जाटव हैं. ये लगभग 55 फीसदी है. ऐसे में सपा-कांग्रेस का गठबंधन कितने सीटों पर दावेदारी कर पाएगा, ये बताने वाला कोई सटीक समीकरण नहीं है. अगर जनता में काफी ज्यादा नाराजगी होती है, तो कुछ हो सकता है." Analysis: BJP या कांग्रेस... मुसलमानों का सच्चा 'हमदर्द' कौन? क्या वाकई बदल रहा है मुस्लिम वोटिंग पैटर्न Lok Sabha Elections 2024 :bjpLokSabhaElectionsExplainer2024congressUttar Pradeshटिप्पणियां पढ़ें देश-विदेश की ख़बरें अब हिन्दी में | चुनाव 2024 के लाइव अपडेट के लिए हमें फॉलो करें. और जानें इलेक्शन शेड्यूल NDTV India पर.
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