स्थिति ये है कि ब्रिटेन के कई इलाकों में आज डॉक्टर या डेंटिस्ट की अपॉइंटमेंट लेना भी मुश्किल होता जा रहा है। आपातकालीन सेवाएं लगभग तय सीमा से ज्यादा काम कर रही हैं। अस्पताल में इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा रहा है।
एक समय ब्रिटेन की पहचान मानी जाने वाली एनएचएस आज खस्ताहाल है। हालात ये हैं कि ब्रिटेन के लोगों को अब इलाज के लिए दूसरे देशों का रुख करना पड़ रहा है। एनएचएस की खराब व्यवस्था से ब्रिटेन के लोग भी वाकिफ हैं और यही वजह है कि आगामी आम चुनाव में खराब स्वास्थ्य व्यवस्था एक अहम मुद्दा होगा। ब्रिटेन के अस्पतालों में इलाज कराना टेढ़ी खीर हुआ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन के लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए उद्देश्य से एनएचएस की शुरुआत की गई थी, लेकिन आज यह अपनी शुरुआत के बाद की छाया मात्र है। लगातार कम होती फंडिंग और कोरोना महामारी ने एनएचएस को बेहद कमजोर कर दिया है। स्थिति ये है कि ब्रिटेन के कई इलाकों में आज डॉक्टर या डेंटिस्ट की अपॉइंटमेंट लेना भी मुश्किल होता जा रहा है। आपातकालीन सेवाएं लगभग तय सीमा से ज्यादा काम कर रही हैं। अस्पताल में इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा रहा है। यही वजह है कि 4 जुलाई को होने वाले आम चुनाव में एनएचएस एक बड़ा मुद्दा है। लोग इलाज कराने विदेशों का कर रहे रुख फातमे इब्रीनोवा नामक महिला ने हाल ही में इंग्लैंड के एसेक्स में शहर चेम्सफोर्ड में अपने स्थानीय डॉक्टर से मुलाकात की। इब्रीनोवा को कान के संक्रमण की समस्या थी। डॉक्टर ने तुरंत कान के ऑपरेशन की जरूरत बताई। इब्रीनोवा का कहना है कि मुझे तीन-चार महीने इंतजार करने के लिए कहा गया। ऐसे में इब्रीनोवा ने अपने देश तुर्की जाकर इलाज कराने का फैसला किया है। ब्रिटेन में 75 लाख से ज्यादा लोग अपने इलाज का इंतजार कर रहे हैं और वे प्रतिक्षा सूची में हैं। कंजर्वेटिव पार्टी की सरकार ने हाल ही में एनएसएस में निवेश किया था, लेकिन इसके बावजूद हालात नहीं सुधरे हैं। हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण से पता चला कि ब्रिटेन के एक चौथाई से भी कम लोग ही एनएचएस से संतुष्ट थे। लोगों को खून की जांच के लिए तीन सप्ताह तक इंतजार करना पड़ रहा है। एसेक्स में हर 2300 लोगों पर सिर्फ एक डॉक्टर उपलब्ध है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी खराब है। एनएचएस में काम कर रहे डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी काम के बोझ और कम वेतन से परेशान हैं। पर्याप्त संख्या में नर्सों की कमी भी एक बड़ी समस्या है। कई पेशेवर लोग नौकरी छोड़ रहे हैं या काम के घंटे कम करने की मांग कर रहे हैं।.
एक समय ब्रिटेन की पहचान मानी जाने वाली एनएचएस आज खस्ताहाल है। हालात ये हैं कि ब्रिटेन के लोगों को अब इलाज के लिए दूसरे देशों का रुख करना पड़ रहा है। एनएचएस की खराब व्यवस्था से ब्रिटेन के लोग भी वाकिफ हैं और यही वजह है कि आगामी आम चुनाव में खराब स्वास्थ्य व्यवस्था एक अहम मुद्दा होगा। ब्रिटेन के अस्पतालों में इलाज कराना टेढ़ी खीर हुआ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन के लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए उद्देश्य से एनएचएस की शुरुआत की गई थी, लेकिन आज यह अपनी शुरुआत के बाद की छाया मात्र है। लगातार कम होती फंडिंग और कोरोना महामारी ने एनएचएस को बेहद कमजोर कर दिया है। स्थिति ये है कि ब्रिटेन के कई इलाकों में आज डॉक्टर या डेंटिस्ट की अपॉइंटमेंट लेना भी मुश्किल होता जा रहा है। आपातकालीन सेवाएं लगभग तय सीमा से ज्यादा काम कर रही हैं। अस्पताल में इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा रहा है। यही वजह है कि 4 जुलाई को होने वाले आम चुनाव में एनएचएस एक बड़ा मुद्दा है। लोग इलाज कराने विदेशों का कर रहे रुख फातमे इब्रीनोवा नामक महिला ने हाल ही में इंग्लैंड के एसेक्स में शहर चेम्सफोर्ड में अपने स्थानीय डॉक्टर से मुलाकात की। इब्रीनोवा को कान के संक्रमण की समस्या थी। डॉक्टर ने तुरंत कान के ऑपरेशन की जरूरत बताई। इब्रीनोवा का कहना है कि मुझे तीन-चार महीने इंतजार करने के लिए कहा गया। ऐसे में इब्रीनोवा ने अपने देश तुर्की जाकर इलाज कराने का फैसला किया है। ब्रिटेन में 75 लाख से ज्यादा लोग अपने इलाज का इंतजार कर रहे हैं और वे प्रतिक्षा सूची में हैं। कंजर्वेटिव पार्टी की सरकार ने हाल ही में एनएसएस में निवेश किया था, लेकिन इसके बावजूद हालात नहीं सुधरे हैं। हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण से पता चला कि ब्रिटेन के एक चौथाई से भी कम लोग ही एनएचएस से संतुष्ट थे। लोगों को खून की जांच के लिए तीन सप्ताह तक इंतजार करना पड़ रहा है। एसेक्स में हर 2300 लोगों पर सिर्फ एक डॉक्टर उपलब्ध है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी खराब है। एनएचएस में काम कर रहे डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी काम के बोझ और कम वेतन से परेशान हैं। पर्याप्त संख्या में नर्सों की कमी भी एक बड़ी समस्या है। कई पेशेवर लोग नौकरी छोड़ रहे हैं या काम के घंटे कम करने की मांग कर रहे हैं।
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