उत्तराखंड में गुलदारों का आतंक व्याप्त है, जहाँ 47 आदमखोर गुलदार रेस्क्यू सेंटरों में कैद हैं। आबादी वाले क्षेत्रों में गुलदारों के हमलों से लोग परेशान हैं। आदमखोर न होने पर, गुलदारों को दूरदराज के जंगलों में छोड़ा जा रहा है। चिड़ियापुर, ढेला, रानीबाग-काठगोदाम और अल्मोड़ा के रेस्क्यू सेंटरों में ये गुलदार कैद हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल...
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। विषम भूगोल और 71.05 प्रतिशत वन भूभाग वाले उत्तराखंड का शायद ही कोई क्षेत्र ऐसा होगा, जहां गुलदारों का खौफ तारी न हो। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विभिन्न क्षेत्रों से पकड़े गए आदमखोर घोषित 47 गुलदार राज्य के चार रेस्क्यू सेंटर में कैद हैं। इसके अलावा आबादी वाले क्षेत्रों में सक्रिय सामान्य गुलदारों को पकड़कर दूसरे इलाकों के दूरस्थ और घने जंगलों में छोड़ा जा रहा है।वन्यजीवों के बढ़ते हमलों ने राज्यवासियों की नींद उड़ाई हुई है। इस क्रम में गुलदार सबसे पहली पायदान है, जिसके हमले आए दिन सुर्खियां बन रहे हैं। आबादी वाले क्षेत्रों में गुलदार मवेशियों की मानिंद धमक रहे हैं। वन्यजीवों के हमलों के आंकड़े बताते हैं कि इनमें सर्वाधिक हमले गुलदार के हैं। ऐसे में चिंता और चुनौती दोनों ही बढ़ गए हैं। यद्यपि, आबादी वाले क्षेत्रों में हमले करने वाले गुलदारों को आदमखोर भी घोषित किया जा रहा है।राज्य के चिडि़यापुर, रानीबाग-काठगोदाम, ढेला रेस्क्यू सेंटर में 42 आदमखोर गुलदार पिंजरों में कैद किए गए हैं। इसके अलावा अल्मोड़ा स्थित मिनी जू के रेस्क्यू सेंटर के बाड़ों में ऐसे पांच गुलदारों को रखा गया है। राज्य के अपर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक डा विवेक पांडेय के अनुसार आदमखोर गुलदारों को ही रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है। यह भी पढ़ें- चीन और नेपाल सीमा से सटे वाइब्रेंट विलेज बनेंगे मॉडल, ग्राम्य विकास मंत्री को भेजी गई 91 गांवों की प्रगति रिपोर्ट उन्होंने बताया कि आबादी वाले क्षेत्रों में सक्रिय जो गुलदार आदमखोर नहीं हैं, उन्हें पकड़कर दूसरे क्षेत्रों के सुदूरवर्ती घने जंगलों में छोड़ा गया है। इसके पीछे मंशा यही है कि वे उस क्षेत्र में न आ पाएं, जहां से वे पकड़े गए थे। यहां कैद हैं गुलदार रेस्क्यू सेंटर संख्या चिड़ियापुर 20 ढेला 14 रानीबाग-काठगोदाम 08 अल्मोड़ा 05.
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। विषम भूगोल और 71.05 प्रतिशत वन भूभाग वाले उत्तराखंड का शायद ही कोई क्षेत्र ऐसा होगा, जहां गुलदारों का खौफ तारी न हो। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विभिन्न क्षेत्रों से पकड़े गए आदमखोर घोषित 47 गुलदार राज्य के चार रेस्क्यू सेंटर में कैद हैं। इसके अलावा आबादी वाले क्षेत्रों में सक्रिय सामान्य गुलदारों को पकड़कर दूसरे इलाकों के दूरस्थ और घने जंगलों में छोड़ा जा रहा है।वन्यजीवों के बढ़ते हमलों ने राज्यवासियों की नींद उड़ाई हुई है। इस क्रम में गुलदार सबसे पहली पायदान है, जिसके हमले आए दिन सुर्खियां बन रहे हैं। आबादी वाले क्षेत्रों में गुलदार मवेशियों की मानिंद धमक रहे हैं। वन्यजीवों के हमलों के आंकड़े बताते हैं कि इनमें सर्वाधिक हमले गुलदार के हैं। ऐसे में चिंता और चुनौती दोनों ही बढ़ गए हैं। यद्यपि, आबादी वाले क्षेत्रों में हमले करने वाले गुलदारों को आदमखोर भी घोषित किया जा रहा है।राज्य के चिडि़यापुर, रानीबाग-काठगोदाम, ढेला रेस्क्यू सेंटर में 42 आदमखोर गुलदार पिंजरों में कैद किए गए हैं। इसके अलावा अल्मोड़ा स्थित मिनी जू के रेस्क्यू सेंटर के बाड़ों में ऐसे पांच गुलदारों को रखा गया है। राज्य के अपर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक डा विवेक पांडेय के अनुसार आदमखोर गुलदारों को ही रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है। यह भी पढ़ें- चीन और नेपाल सीमा से सटे वाइब्रेंट विलेज बनेंगे मॉडल, ग्राम्य विकास मंत्री को भेजी गई 91 गांवों की प्रगति रिपोर्ट उन्होंने बताया कि आबादी वाले क्षेत्रों में सक्रिय जो गुलदार आदमखोर नहीं हैं, उन्हें पकड़कर दूसरे क्षेत्रों के सुदूरवर्ती घने जंगलों में छोड़ा गया है। इसके पीछे मंशा यही है कि वे उस क्षेत्र में न आ पाएं, जहां से वे पकड़े गए थे। यहां कैद हैं गुलदार रेस्क्यू सेंटर संख्या चिड़ियापुर 20 ढेला 14 रानीबाग-काठगोदाम 08 अल्मोड़ा 05
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