जनपद के 469 परिषदीय विद्यालय ऐसे है, जहां 50 से कम छात्र पढ़ रहे हैं।अब इन स्कूलों का समीप के स्कूलों में विलय किया जाएगा। इस निर्णय के तहत छात्रों को नजदीकी विद्यालयों में दाखिला दिलाया जाएगा।
अमितेश कुमार सिंह, गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में छात्रों के नामांकन में लगातार कमी देखी जा रही है। सरकार की ओर से 3 लाखों रुपये खर्च कर इन स्कूलों को कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर आधुनिक बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद छात्र संख्या में गिरावट थम नहीं रही है। इस स्थिति ने शिक्षा विभाग के समक्ष नई चुनौती खड़ी कर दी है। जनपद के 469 परिषदीय विद्यालय ऐसे है, जहां 50 से कम छात्र पढ़ रहे हैं। अब इन स्कूलों का समीप के स्कूलों में विलय किया जाएगा। इस निर्णय के तहत छात्रों को नजदीकी विद्यालयों में दाखिला दिलाया जाएगा, जबकि खाली भवनों को बाल वाटिका के रूप में विकसित किया जाएगा। बाल वाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष के बच्चों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रारंभिक शिक्षा दी जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार गाजीपुर में कुल 2266 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, लेकिन कम नामांकन के कारण कई स्कूलों में छात्र संख्या बेहद कम है। शासन के निर्देश पर ‘पेयरिंग ऑफ स्कूल’ योजना के तहत 50 से कम छात्रों वाले विद्यालयों को मर्ज किया जाएगा। बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव ने बताया कि विभाग के स्तर पर ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार हो गई है। सूची जल्द शासन को भेजी जाएगी। केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार 75 से कम छात्रों वाले स्कूलों में आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं नहीं दी जा सकतीं। इसी क्रम में यह कदम उठाया जा रहा है। विभाग ने ‘स्कूल चलो अभियान’ के तहत अभिभावकों को जागरूक करने की कोशिश की, लेकिन परिषदीय विद्यालयों में दाखिले को लेकर रुचि कम रही। विलय के बाद खाली भवनों को न केवल बाल वाटिका, बल्कि पोषण वाटिका के रूप में भी विकसित किया जाएगा। शिक्षाविदों के अनुसार यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में प्रारंभिक शिक्षा को सशक्त बनाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, ग्रामीण इलाकों के अभिभावकों को इस नियम से कुछ व्यावहारिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है ।अगर उनके गांव का विद्यालय का विलय अन्य स्कूलों में होगा तो बच्चों को पहले के तुलना अब ज्यादा दूरी विद्यालय जाने के लिए तय करनी पड़ सकती है।.
अमितेश कुमार सिंह, गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में छात्रों के नामांकन में लगातार कमी देखी जा रही है। सरकार की ओर से 3 लाखों रुपये खर्च कर इन स्कूलों को कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर आधुनिक बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद छात्र संख्या में गिरावट थम नहीं रही है। इस स्थिति ने शिक्षा विभाग के समक्ष नई चुनौती खड़ी कर दी है। जनपद के 469 परिषदीय विद्यालय ऐसे है, जहां 50 से कम छात्र पढ़ रहे हैं। अब इन स्कूलों का समीप के स्कूलों में विलय किया जाएगा। इस निर्णय के तहत छात्रों को नजदीकी विद्यालयों में दाखिला दिलाया जाएगा, जबकि खाली भवनों को बाल वाटिका के रूप में विकसित किया जाएगा। बाल वाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष के बच्चों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रारंभिक शिक्षा दी जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार गाजीपुर में कुल 2266 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, लेकिन कम नामांकन के कारण कई स्कूलों में छात्र संख्या बेहद कम है। शासन के निर्देश पर ‘पेयरिंग ऑफ स्कूल’ योजना के तहत 50 से कम छात्रों वाले विद्यालयों को मर्ज किया जाएगा। बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव ने बताया कि विभाग के स्तर पर ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार हो गई है। सूची जल्द शासन को भेजी जाएगी। केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार 75 से कम छात्रों वाले स्कूलों में आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं नहीं दी जा सकतीं। इसी क्रम में यह कदम उठाया जा रहा है। विभाग ने ‘स्कूल चलो अभियान’ के तहत अभिभावकों को जागरूक करने की कोशिश की, लेकिन परिषदीय विद्यालयों में दाखिले को लेकर रुचि कम रही। विलय के बाद खाली भवनों को न केवल बाल वाटिका, बल्कि पोषण वाटिका के रूप में भी विकसित किया जाएगा। शिक्षाविदों के अनुसार यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में प्रारंभिक शिक्षा को सशक्त बनाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, ग्रामीण इलाकों के अभिभावकों को इस नियम से कुछ व्यावहारिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है ।अगर उनके गांव का विद्यालय का विलय अन्य स्कूलों में होगा तो बच्चों को पहले के तुलना अब ज्यादा दूरी विद्यालय जाने के लिए तय करनी पड़ सकती है।
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