Sawan Somwar 2024: सावन सोमवार की पूजा में महादेव के इन मंत्रों और आरती को करें शामिल, हर मनोकामना होगी पूरी

Sawan Somwar 2024 News

Sawan Somwar 2024: सावन सोमवार की पूजा में महादेव के इन मंत्रों और आरती को करें शामिल, हर मनोकामना होगी पूरी
Sawan Somwar 2024 DateSomwar 2024Mahadev Puja Mantra
  • 📰 Amar Ujala
  • ⏱ Reading Time:
  • 200 sec. here
  • 12 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 107%
  • Publisher: 51%

Sawan Somwar 2024: 22 जुलाई 2024 से सावन माह की शुरुआत होने वाली है। इस दिन से ही कांवड़ यात्रा भी शुरू होगी, जिसका समापन सावन शिवरात्रि पर होगा।

शिव जी की आरती ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।। ओम जय शिव ओंकारा।। एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन वृषवाहन साजे।। ओम जय शिव ओंकारा।। दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।। ओम जय शिव ओंकारा।। अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी। त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।। ओम जय शिव ओंकारा।। श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।। ओम जय शिव ओंकारा।। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।। ओम जय शिव ओंकारा।। लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा। पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।। ओम जय शिव ओंकारा।। पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा। भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।। ओम जय शिव ओंकारा।। जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला। शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।। ओम जय शिव ओंकारा।। काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी। नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।। ओम जय शिव ओंकारा।। त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।। ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।। महामृत्युंजय मंत्र ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।। शिव जी का मूल मंत्र ऊँ नम: शिवाय।। भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।। ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।। ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।। शिव के प्रिय मंत्र ॐ नमः शिवाय। नमो नीलकण्ठाय। ॐ पार्वतीपतये नमः। शिव चालीसा ॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान । कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥ ॥ चौपाई ॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके । कानन कुण्डल नागफनी के ॥ अंग गौर शिर गंग बहाये । मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे । छवि को देखि नाग मन मोहे ॥ मैना मातु की हवे दुलारी । बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥ कर त्रिशूल सोहत छवि भारी । करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥ नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे । सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥ कार्तिक श्याम और गणराऊ । या छवि को कहि जात न काऊ ॥ देवन जबहीं जाय पुकारा । तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥ किया उपद्रव तारक भारी । देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥ तुरत षडानन आप पठायउ । लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥ आप जलंधर असुर संहारा । सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥ त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई । सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥ किया तपहिं भागीरथ भारी । पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥ दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं । सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥ वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥ प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला । जरत सुरासुर भए विहाला ॥ कीन्ही दया तहं करी सहाई । नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥ पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा । जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥ सहस कमल में हो रहे धारी । कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥ एक कमल प्रभु राखेउ जोई । कमल नयन पूजन चहं सोई ॥ कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर । भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥ जय जय जय अनन्त अविनाशी । करत कृपा सब के घटवासी ॥ दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥ त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो । येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥ लै त्रिशूल शत्रुन को मारो । संकट से मोहि आन उबारो ॥ मात-पिता भ्राता सब होई । संकट में पूछत नहिं कोई ॥ स्वामी एक है आस तुम्हारी । आय हरहु मम संकट भारी ॥ धन निर्धन को देत सदा हीं । जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥ अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी । क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥ शंकर हो संकट के नाशन । मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥ योगी यति मुनि ध्यान लगावैं । शारद नारद शीश नवावैं ॥ नमो नमो जय नमः शिवाय । सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥ जो यह पाठ करे मन लाई । ता पर होत है शम्भु सहाई ॥ ॠनियां जो कोई हो अधिकारी । पाठ करे सो पावन हारी ॥ पुत्र हीन कर इच्छा जोई । निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥ पण्डित त्रयोदशी को लावे । ध्यान पूर्वक होम करावे ॥ त्रयोदशी व्रत करै हमेशा । ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥ धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे । शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥ जन्म जन्म के पाप नसावे । अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥ कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी । जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥ ॥ दोहा ॥ नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा । तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥ मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान । अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥ डिस्क्लेमर : ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।.

शिव जी की आरती ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।। ओम जय शिव ओंकारा।। एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन वृषवाहन साजे।। ओम जय शिव ओंकारा।। दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।। ओम जय शिव ओंकारा।। अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी। त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।। ओम जय शिव ओंकारा।। श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।। ओम जय शिव ओंकारा।। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।। ओम जय शिव ओंकारा।। लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा। पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।। ओम जय शिव ओंकारा।। पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा। भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।। ओम जय शिव ओंकारा।। जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला। शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।। ओम जय शिव ओंकारा।। काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी। नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।। ओम जय शिव ओंकारा।। त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।। ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।। महामृत्युंजय मंत्र ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।। शिव जी का मूल मंत्र ऊँ नम: शिवाय।। भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।। ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।। ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।। शिव के प्रिय मंत्र ॐ नमः शिवाय। नमो नीलकण्ठाय। ॐ पार्वतीपतये नमः। शिव चालीसा ॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान । कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥ ॥ चौपाई ॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके । कानन कुण्डल नागफनी के ॥ अंग गौर शिर गंग बहाये । मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे । छवि को देखि नाग मन मोहे ॥ मैना मातु की हवे दुलारी । बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥ कर त्रिशूल सोहत छवि भारी । करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥ नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे । सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥ कार्तिक श्याम और गणराऊ । या छवि को कहि जात न काऊ ॥ देवन जबहीं जाय पुकारा । तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥ किया उपद्रव तारक भारी । देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥ तुरत षडानन आप पठायउ । लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥ आप जलंधर असुर संहारा । सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥ त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई । सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥ किया तपहिं भागीरथ भारी । पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥ दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं । सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥ वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥ प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला । जरत सुरासुर भए विहाला ॥ कीन्ही दया तहं करी सहाई । नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥ पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा । जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥ सहस कमल में हो रहे धारी । कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥ एक कमल प्रभु राखेउ जोई । कमल नयन पूजन चहं सोई ॥ कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर । भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥ जय जय जय अनन्त अविनाशी । करत कृपा सब के घटवासी ॥ दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥ त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो । येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥ लै त्रिशूल शत्रुन को मारो । संकट से मोहि आन उबारो ॥ मात-पिता भ्राता सब होई । संकट में पूछत नहिं कोई ॥ स्वामी एक है आस तुम्हारी । आय हरहु मम संकट भारी ॥ धन निर्धन को देत सदा हीं । जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥ अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी । क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥ शंकर हो संकट के नाशन । मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥ योगी यति मुनि ध्यान लगावैं । शारद नारद शीश नवावैं ॥ नमो नमो जय नमः शिवाय । सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥ जो यह पाठ करे मन लाई । ता पर होत है शम्भु सहाई ॥ ॠनियां जो कोई हो अधिकारी । पाठ करे सो पावन हारी ॥ पुत्र हीन कर इच्छा जोई । निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥ पण्डित त्रयोदशी को लावे । ध्यान पूर्वक होम करावे ॥ त्रयोदशी व्रत करै हमेशा । ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥ धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे । शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥ जन्म जन्म के पाप नसावे । अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥ कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी । जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥ ॥ दोहा ॥ नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा । तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥ मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान । अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥ डिस्क्लेमर : ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

Amar Ujala /  🏆 12. in İN

Sawan Somwar 2024 Date Somwar 2024 Mahadev Puja Mantra Mahadev Puja Mantra Aarti In Hindi Spirituality News In Hindi Festivals News In Hindi Festivals Hindi News

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय इन मंत्रों का जाप करने से बरसेगी बाबा की कृपा, पूरी होगी हर इच्छासावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय इन मंत्रों का जाप करने से बरसेगी बाबा की कृपा, पूरी होगी हर इच्छासावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय इन मंत्रों का जाप करने से बरसेगी बाबा की कृपा, पूरी होगी हर इच्छा
Read more »

सावन का पहला सोमवार कब है, 5 शुभ योग में होगा शिव पूजन, जानें महत्व और पूजा विधिसावन का पहला सोमवार कब है, 5 शुभ योग में होगा शिव पूजन, जानें महत्व और पूजा विधिSawan Ka Pehla Somwar Kab Hai 2024 : सावन के पहले सोमवार का व्रत 22 जुलाई 2024 को किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन मास में भगवान शिव ने माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वर दिया था। सावन के सभी सोमवार का व्रत और विधि विधान के साथ भगवान आशुतोष की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं सावन...
Read more »

Sawan 2024: सावन महीने में इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत, हर एक मनोकामना होगी पूरीSawan 2024: सावन महीने में इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत, हर एक मनोकामना होगी पूरीज्योतिषियों की मानें तो भगवान शिव की पूजा करने से कुंडली में चंद्र और शुक्र ग्रह मजबूत होता है। साथ ही अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम हो जाता है। ज्योतिष Sawan 2024 कालसर्प और पितृ दोष से निजात पाने के लिए भगवान शिव की पूजा करने की सलाह देते हैं। सावन के महीने में सूर्य देव कर्क राशि में विराजमान...
Read more »

ऋषिकेश के इन 5 शिव मंदिरों के सावन में करें दर्शन, होगी हर मनोकामना पूरीऋषिकेश के इन 5 शिव मंदिरों के सावन में करें दर्शन, होगी हर मनोकामना पूरीदेवभूमि के ऋषिकेश को पावन जगहों में एक माना जाता है. सावन में ये जगह शिव भक्तों के लिए और भी खास हो जाती है.
Read more »

दशकों बाद Sawan पर दुर्लभ संयोग, इन राशियों पर भगवान शिव के साथ माता पार्वती का आशीर्वाददशकों बाद Sawan पर दुर्लभ संयोग, इन राशियों पर भगवान शिव के साथ माता पार्वती का आशीर्वादSawan Lucky Zodiac Sign: देवों के देव महादेव की पूजा का श्रेष्ठ महीना सावन 22 जुलाई 2024 से शुरू हो Watch video on ZeeNews Hindi
Read more »

Sawan Somwar 2024: सावन सोमवार पर जरूर करें महादेव की ये आरती, सभी मुरादें होंगी पूरीSawan Somwar 2024: सावन सोमवार पर जरूर करें महादेव की ये आरती, सभी मुरादें होंगी पूरीसावन के महीने की शुरुआत के लिए शिव भक्त बेसब्री से इंतजार करते हैं। मान्यता है कि इस दौरान शिव अभषेक करने से महादेव जल्द प्रसन्न होते हैं। शिव की पूजा-अर्चना करने के बाद शिव आरती जरूर करनी चाहिए। ऐसा माना जाता है सावन सोमवार के दिन बिना आरती किए पूजा सफल नहीं होती है। चलिए पढ़ते हैं शिव...
Read more »



Render Time: 2026-04-02 12:37:47