बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने एक अजीबोगरीब और निराशाजनक अंत के साथ एक हताशा भरी घटना को जन्म दिया है। 28 साल से लापता और अपने परिवार द्वारा मृत मान लिए गए जगबंधु मंडल, सोमवार को उत्तर 24 परगना के अपने पैतृक गांव बागदाह में लौट...
कोलकाता: 28 साल पहले एक सर्दियों की सुबह जगबंधु मंडल उत्तर 24 परगना के बगदाह स्थित अपने घर से निकले और अचानक गायब हो गए। उस समय उनकी उम्र 27 साल की थी। वह लापता हुए और अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए। तब उनके बच्चों की उम्र दो और तीन साल थी। काफी समय तलाश के बावजूद उनका कुछ पता नहीं चला। परिवारों में वर्षों इंतजार के बाद उन्हें मरा मान लिया और उनका अंतिम संस्कार कर दिया। जगबंधु का डेथ सर्टिफिकेट भी बन गया। अब लगभग तीन दशक के बाद सोमवार को, जगबंधु विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत अपने मतदाता दस्तावेजों को अपडेट कराने के लिए घर लौटे, जिससे उनके घर और गांव में हंगामा मच गया। उनका नाम मतदाता सूची से बहुत पहले ही हटा दिया गया था।जगबंधु की पत्नी सुप्रिया ने कहा कि उन्होंने तो कई साल पहले विधवापन स्वीकार कर लिया था। उन्होंने कहा कि अब उनका चेहरा थोड़ा सांवला हो गया है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से वही हैं। उनसे बात करने के बाद, मुझे यकीन है कि वे मेरे पति ही हैं। जगबंधु के पिता बिजॉय ने भी दावा किया कि वापस लौटा शख्स ही उनका बेटा जगबंधु है।गुजरात कमाने गए थेभाई निरुपम ने बताया कि जगबंधु फरवरी 1997 में स्थानीय युवकों के एक समूह के साथ यह कहकर निकले थे कि वे काम की तलाश में गुजरात जा रहे हैं। उसके बाद से उन्होंने फिर कभी उनसे संपर्क नहीं किया। परिवार ने भी काफी तलाश की लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला। परिवार ने बताया कि उन्होंने दो साल पहले एक ज्योतिषी से सलाह ली थी, जिसने उन्हें यकीन दिलाया कि उनकी मृत्यु हो चुकी है, जिसके बाद उनकी पत्नी ने उनका श्राद्ध किया।छत्तीसगढ़ में बसे थेसोमवार को बंगाल पहुंचे जगबंधु ने दावा किया कि वह कमाने के लिए गुजरात गए। वहां से मुंबई गए, कुछ समय के लिए बांकुड़ा लौटे और आखिरकार छत्तीसगढ़ में बस गए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नौकरी छूटने के बाद मैंने लौटने का फैसला किया। मेरा नाम अभी भी बांकुड़ा की मतदाता सूची में है। उन्होंने कहा कि मतदाता के रूप में अपनी पहचान वापस पाने के लिए लौट आए हैं।दो साल पहले किया श्राद्धदो छोटे बच्चों के साथ अकेले रह रही उनकी पत्नी सुप्रिया ने अपने पति का घबराया हुआ चेहरा पहचान लिया, उसने कहा कि उनकी आवाज बिल्कुल वैसी ही है। जैसे ही वह उनके घर पहुंचे। उनके पिता बिजॉय ने पुष्टि की कि यह वास्तव में उनका भगोड़ा बेटा ही था। फरवरी 1997 की एक सर्द सुबह गायब हुए उस व्यक्ति के इर्द-गिर्द उमड़ते भावनात्मक तूफान में फंसी सुप्रिया ने कहा उसे ढूंढने की कोशिशें नाकाम होने के बाद, परिवार ने एक ज्योतिषी से सलाह ली। उसने अपने पति का श्राद्ध भी किया और दो बच्चों की परवरिश करने वाली अकेली मां के रूप में जीवन को स्वीकार कर लिया।नहीं की दूसरी शादीबांकुड़ा से जुड़े होने के कारण यह संदेह पैदा हुआ कि उन्होंने दोबारा शादी कर ली है। उस सूची में उनके नाम के आगे सुलेखा मंडल नाम की एक महिला का नाम है। उनके पति का नाम? जगबंधु मंडल। इस उलझन में फंसे व्यक्ति ने दूसरी शादी करने से इनकार किया। स्थानीय बूथ समिति के सदस्य समीर गुहा ने कहा कि जगबंधु बगदाह वापस आ गए हैं क्योंकि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में बने रहने के लिए उन्हें अपने मूल मतदाता पहचान पत्र और ज़मीन के दस्तावेज़ों की ज़रूरत होगी। उनका नाम एसआईआर 2002 के बाद की मतदाता सूची में नहीं है, लेकिन उनके पिता का नाम है।अफसरों के लिए चुनौतीइस बीच, नामित बीएलओ ने कहा कि जगबंधु का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है और 28 वर्षों से उनके ठिकाने का कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं है, इसलिए उनके दावों की पुष्टि करना और उनकी स्थिति बहाल करना एक चुनौती साबित हो सकता है।.
कोलकाता: 28 साल पहले एक सर्दियों की सुबह जगबंधु मंडल उत्तर 24 परगना के बगदाह स्थित अपने घर से निकले और अचानक गायब हो गए। उस समय उनकी उम्र 27 साल की थी। वह लापता हुए और अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए। तब उनके बच्चों की उम्र दो और तीन साल थी। काफी समय तलाश के बावजूद उनका कुछ पता नहीं चला। परिवारों में वर्षों इंतजार के बाद उन्हें मरा मान लिया और उनका अंतिम संस्कार कर दिया। जगबंधु का डेथ सर्टिफिकेट भी बन गया। अब लगभग तीन दशक के बाद सोमवार को, जगबंधु विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत अपने मतदाता दस्तावेजों को अपडेट कराने के लिए घर लौटे, जिससे उनके घर और गांव में हंगामा मच गया। उनका नाम मतदाता सूची से बहुत पहले ही हटा दिया गया था।जगबंधु की पत्नी सुप्रिया ने कहा कि उन्होंने तो कई साल पहले विधवापन स्वीकार कर लिया था। उन्होंने कहा कि अब उनका चेहरा थोड़ा सांवला हो गया है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से वही हैं। उनसे बात करने के बाद, मुझे यकीन है कि वे मेरे पति ही हैं। जगबंधु के पिता बिजॉय ने भी दावा किया कि वापस लौटा शख्स ही उनका बेटा जगबंधु है।गुजरात कमाने गए थेभाई निरुपम ने बताया कि जगबंधु फरवरी 1997 में स्थानीय युवकों के एक समूह के साथ यह कहकर निकले थे कि वे काम की तलाश में गुजरात जा रहे हैं। उसके बाद से उन्होंने फिर कभी उनसे संपर्क नहीं किया। परिवार ने भी काफी तलाश की लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला। परिवार ने बताया कि उन्होंने दो साल पहले एक ज्योतिषी से सलाह ली थी, जिसने उन्हें यकीन दिलाया कि उनकी मृत्यु हो चुकी है, जिसके बाद उनकी पत्नी ने उनका श्राद्ध किया।छत्तीसगढ़ में बसे थेसोमवार को बंगाल पहुंचे जगबंधु ने दावा किया कि वह कमाने के लिए गुजरात गए। वहां से मुंबई गए, कुछ समय के लिए बांकुड़ा लौटे और आखिरकार छत्तीसगढ़ में बस गए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नौकरी छूटने के बाद मैंने लौटने का फैसला किया। मेरा नाम अभी भी बांकुड़ा की मतदाता सूची में है। उन्होंने कहा कि मतदाता के रूप में अपनी पहचान वापस पाने के लिए लौट आए हैं।दो साल पहले किया श्राद्धदो छोटे बच्चों के साथ अकेले रह रही उनकी पत्नी सुप्रिया ने अपने पति का घबराया हुआ चेहरा पहचान लिया, उसने कहा कि उनकी आवाज बिल्कुल वैसी ही है। जैसे ही वह उनके घर पहुंचे। उनके पिता बिजॉय ने पुष्टि की कि यह वास्तव में उनका भगोड़ा बेटा ही था। फरवरी 1997 की एक सर्द सुबह गायब हुए उस व्यक्ति के इर्द-गिर्द उमड़ते भावनात्मक तूफान में फंसी सुप्रिया ने कहा उसे ढूंढने की कोशिशें नाकाम होने के बाद, परिवार ने एक ज्योतिषी से सलाह ली। उसने अपने पति का श्राद्ध भी किया और दो बच्चों की परवरिश करने वाली अकेली मां के रूप में जीवन को स्वीकार कर लिया।नहीं की दूसरी शादीबांकुड़ा से जुड़े होने के कारण यह संदेह पैदा हुआ कि उन्होंने दोबारा शादी कर ली है। उस सूची में उनके नाम के आगे सुलेखा मंडल नाम की एक महिला का नाम है। उनके पति का नाम? जगबंधु मंडल। इस उलझन में फंसे व्यक्ति ने दूसरी शादी करने से इनकार किया। स्थानीय बूथ समिति के सदस्य समीर गुहा ने कहा कि जगबंधु बगदाह वापस आ गए हैं क्योंकि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में बने रहने के लिए उन्हें अपने मूल मतदाता पहचान पत्र और ज़मीन के दस्तावेज़ों की ज़रूरत होगी। उनका नाम एसआईआर 2002 के बाद की मतदाता सूची में नहीं है, लेकिन उनके पिता का नाम है।अफसरों के लिए चुनौतीइस बीच, नामित बीएलओ ने कहा कि जगबंधु का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है और 28 वर्षों से उनके ठिकाने का कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं है, इसलिए उनके दावों की पुष्टि करना और उनकी स्थिति बहाल करना एक चुनौती साबित हो सकता है।
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