Syed Ata Hasnain Interview: 'अगले चार-पांच महीने में फिर 'वार' कर सकता है पाक', रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल ने पाकिस्तान पर नकेल कसने को लेकर क्या कहा?

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Syed Ata Hasnain Interview: 'अगले चार-पांच महीने में फिर 'वार' कर सकता है पाक', रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल ने पाकिस्तान पर नकेल कसने को लेकर क्या कहा?
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Operation Sindoor भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पहलगाम हमले के जवाब में पाकिस्तान के पंजाब और 700 किमी क्षेत्र में आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए। लेफ्टिनेंट जनरल रिटा.

रुमनी घोष। जागरण, नई दिल्ली। पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने सात मई को जिस तरह से ' ऑपरेशन सिंदूर ' को अंजाम दिया, उसने न केवल पाकिस्तान को बल्कि पूरी दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश दिया है। अब तक भारत ने गुलाम जम्मू-कश्मीर पर ही अपने प्रहार को केंद्रित रखा था, लेकिन इस बार पहली बार भारत ने पाकिस्तान के 'सेंटर ऑफ ग्रैविटी' पंजाब के साथ-साथ 700 किमी के इलाके में आतंकी ठिकानों पर सीधा प्रहार किया है। हालांकि 10 मई को दोनों देशों के बीच सीजफायर हो गया, लेकिन लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन का आकलन है कि भारत को सचेत रहने की जरूरत है। पाकिस्तान का इतिहास और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की रणनीति पर गौर करें तो अगले चार-पांच महीनों में पाकिस्तान फिर से भारत में एक बड़े आतंकी वारदात को अंजाम दे सकता है। क्या है आसिम मुनीर की रणनीति? पाकिस्तान भारत के किस हिस्से को निशाना बना सकता है? और भारत को कहां सावधान होने की जरूरत है? इस पर दैनिक जागरण की समाचार संपादक रुमनी घोष ने उनसे विस्तार से चर्चा की। लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन ने सेना में कई प्रमुख पदों पर रहते हुए जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना की 15 कोर की कमान और 21 कोर की कमान संभाली थी। सेवा में उनका अंतिम कार्यकाल भारतीय सेना के सैन्य सचिव के रूप में था। डिफेंस स्टडीज पर उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। वह एशिया पैसिफिक सेंटर फार सिक्योरिटी स्टडीज , हवाई और यूएसए और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज, लंदन के पूर्व छात्र रहे हैं। वर्ष 2018 में उन्हें कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय का चांसलर नियुक्त किया गया। वर्तमान में वह भारत सरकार के उपक्रम राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में सदस्य के रूप में पदस्थ हैं। युद्ध के हालात से निपटने के लिए आम नागरिकों को जागरूक करने के लिए देशभर में किए जा रहे मॉक ड्रिल एनडीएमए द्वारा ही आयोजित किए जा रहे हैं। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश। ' ऑपरेशन सिंदूर ' की व्याख्या आप कैसे करेंगे? कितने अंक देंगे? मार्क्स देने का यह है कि आब्जेक्टिव्स को मीट करने का है। अगर आपने अपने आप के लिए आब्जेक्टिव्स आसमान में बनाएंगे, तो आपको इसके दो नंबर मिलेंगे, जिससे आपको कुछ भी हासिल नहीं होगा। यह जरूर है कि बहुत से लोग यह सोच रख रहे हैं कि इस ऑपरेशन के बहाने भारत का यह आब्जेक्टिव रखना चाहिए था कि पाकिस्तान को इस तरह से शर्मिंदा किया जाए, जिससे उसने जो टेरेरिज्म का रवैया इस्तेमाल किया है, उससे विड्रा करते हुए पीछे हट जाए। मैं समझता हूं कि वह मकसद पूरा नहीं है, पर मैं इस ऑपरेशन को दस में से आठ नंबर दूंगा.

.. नौ भी दे दूंगा, क्योंकि... इस ऑपरेशन को बहुत ही परिपक्वता के साथ कंसीव किया गया है। जब बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी, तो हमने सिंगल टारगेट पर लिमिटेड डेप्थ में खैबर पख्तूनखवा के एरिये में हमला, यानी स्ट्राइक की थी। तब हमारी टेक्निकल काबिलियत यही थी। इस बार खैवर पख्तूखवा को छोड़कर 700 किमी के अग्रिम हिस्से में बहावलपुर से लेकर गुलाम जम्मू-कश्मीर के सबसे उत्तरी इलाका मुजफ्फराबाद तक नौ ऐसे ठिकानों को निशाना बनाया है, जो लंबे समय से दहशतगर्दी व आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था। यह 'स्ट्रैटेजिक डेटरेंस' था... जो बहुत जरूरी था। बालाकोट 'स्ट्रैटेजिक मैसेजिंग' था और 'ऑपरेशन सिंदूर' 'स्ट्रैटेजिक डेटरेंस' है। लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन स्ट्रैटेजिक मैसेजिंग और स्ट्रैटेजिक डिटरेंस में क्या अंतर है? स्ट्रैटेजिक मैसेजिंग का मतलब यह बताना होता है कि हममें काबिलियत है कि यदि आप कुछ करेंगे तो हम भी जवाब दे सकते हैं। स्ट्रैटेजिक डिटरेंस का मतलब यह होता है कि हम इतनी तादाद में करेंगे कि दोबारा ऐसा कुछ करने से पहले बहुत बार सोचेंगे। पहले पाकिस्तान को पता था कि हमारी रणनीति ऐसी है कि हम मारना नहीं चाहते हैं। अब हमने राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ स्ट्रैटेजिक डेटरेंस का मुद्दा रखा है। इसमें कुछ हद तक हमने हासिल कर लिया है और आने वाले समय में बाकी भी हासिल करेंगे। फिर आपने एक नंबर क्यों काटा? मिलिट्री ऑपरेशन में कोई परफेक्शन नहीं हो सकता है। कहीं न कहीं ऐब निकलेगा। दुश्मन आप पर भी वार कर सकता है। इस स्थिति में दुश्मन ने आप पर भी वार किया है... लाइन आफ कंट्रोल में। पाकिस्तान का रिकार्ड है कि वह जब भी बौखला जाता है, तो उसको एक ही जरिया मिलता है। वह लाइन आफ कंट्रोल पर वार करता है। ...और पाकिस्तान ने इस बार भी ऐसा ही किया। उसे पता है कि चाहे कुछ भी हो जाए, भारत कभी भी आबादी पर हमला नहीं करेगा, लेकिन पाकिस्तान जानबूझकर आबादी पर हमला करता है। इसे सांप्रदायिक रंग देने के लिए वह जम्मू और खास तौर पर सांबा स्थित हिंदू आबादी वाले गांवों को टारगेट करता है। तो यह भारत को पता था कि पाकिस्तान पलटकर वार करेगा? बिलकुल पता था... तभी तो उसके सारे वार को न्यूट्रलाइज कर रहे हैं। ...और तजबीज के साथ दे रहे हैं। मैं खुद कश्मीर का पुराना कमांडर रहा हूं इसलिए मुझे अनुभव है कि हम कितनी योजनाबद्ध ढंग से उसे आने वाले समय में जवाब दे सकते हैं। पाकिस्तान बहादुरी दिखाने की पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन उसको यह पता होना चाहिए कि हमें यह पता है कि वह हथियारों की कमी से जूझ रहा है। पिछले साल पाकिस्तान ने अमेरिका के कहने पर अपने हथियारों के रिजर्व भंडार को 600 मिलियन डालर में यूक्रेन को बेच दिया, ताकि इंटरनेशनल मानिटरी फंड का फंसा हुआ लोन पास हो जाए। पेशावर, रावलपिंडी में बड़े-बड़े अमेरिकन जहाज उतरे और सारे हथियार उठाकर ले गए थे। अब पाकिस्तान अपने आर्डिनेंस फैक्ट्री वाह में हथियारों का निर्माण कर रहा है, लेकिन इसमें उसे समय लगेगा। इस ऑपरेशन को भारत कितनी दूर तक ले जा सकता है? तैयारी कितनी है? वर्ष 2015-16 एक समय था... तब हमारे पास भी हथियारों की कमी थी। तब रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर ने मुझसे इस बारे में चर्चा की थी कि किस तरह से भारत हथियारों की कमी को दूर करने की क्या-क्या कोशिशें कर रहा है। दस साल में भारत ने खुद को पूरी तरह से सक्षम कर लिया। आज हमारे 'वार वेस्टेजेस रेट' के पैमाने पर खरे उतरते हैं। तो हम पूरी तरह से तैयार हैं और बहुत सक्षम हैं। 'वार वेस्टेज रेट' मतलब? भारत की स्थिति ? आप जितने हथियारों का उपयोग कर रहे हैं, उस खजाने को दोबारा उतनी ही तेजी के साथ वापस भरने की क्षमता के साथ-साथ कम से कम 40 दिनों तक युद्ध लड़ने के लिए हथियार उपलब्ध होना। भारत इस स्थिति से बहुत आगे है और पूरी तरह तैयार है। इस ऑपरेशन की खास बात यह है कि इसमें भारत ने बहुत आधुनिक तकनीकी हथियार का उपयोग किया है। इसमें हमने 'लायटर' । चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है। जुलाई में अमरनाथ यात्रा शुरू होगी। अमरनाथ यात्रा बहुत अहम है और भारत को बहुत सावधानी रखनी होगी। ...और आसिम मुनीर जैसा व्यक्ति हिंदू-मुसलमान विभाजन की कोशिश करेगा और फिर हिंदुओं को ही टारगेट कर सकता है। तो फिर पाकिस्तान का इलाज क्या है? क्या भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पाकिस्तान 'थाउसेंड कट्स' की नीति बदल देगा? यदि आप जड़ पर जाएंगे तो पाएंगे कि पाकिस्तान कभी नहीं सुधरेगा। वर्ष 1977 में जियाउल हक ने जुल्फिकार भुटटो के तख्ता पलट के बाद जब पाकिस्तान की कमान संभाली तो सैन्य प्रशिक्षण में जवानों को यह पढ़ाया जाता है कि उन्हें भारत से 1971 का बदला लेना है। वहां की सेना उस दर्द को भूल नहीं सकती है। भारत का फारेन एक्सचेंज रिजर्व 650 अरब डॉलर है और पाकिस्तान का 15 अरब डालर है। वह जानते हैं कि वह भारत से सीधी लड़ाई नहीं लड़ सकते हैं। इसलिए उन्होंने हाइब्रिड लड़ाई का तरीका अपनाया। यह सिर्फ हथियार से बम से नहीं की जाती है। इसमें आतंकवाद फैलाना, नकली नोट, टेरर फंडिंग, फेक न्यूज, पत्थरबाजी, सांप्रदायिक हमले, कश्मीरी मीडिया पर पाकिस्तानी मीडिया का प्रभाव सभी शामिल हैं। भारतीय सेना को इससे निपटने के लिए हमेशा तैयार रहना होगा। पाकिस्तान की खामी यह है कि वह सोच-विचार कर या योजनाबद्ध तरीके से कुछ नहीं करता है। कारगिल में तो पाकिस्तान के एयर फोर्स को ही पता था कि सेना ने भारत के खिलाफ मोर्चा खोला है। ...भारत के लिए यही चिंता की बात है। उसकी कोई रीति-नीति नहीं है, जिससे उसे ट्रैक किया जा सके... जैसा उसने पहलगाम में किया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जारी दो रिपोर्ट के हवाले से यह बात सामने आ रही है कि आतंकवादियों को जो फंडिंग हो रही है, उसका 80 प्रतिशत भारत से उपलब्ध हो रहा है? पाकिस्तान इन रिपोर्ट्स को बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उछालकर खुद को पाक साफ साबित करने की कोशिश कर रहा है। क्या अभी भी देश में आतंकवादियों का इतना बड़ा नेटवर्क मौजूद है? यह प्रोपोगेंडा है। जब मैं बारामुला में था तो वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर का एक आफिस था। यूएई, कुवैत, अरब कंट्री, अफगानिस्तान सब जगह से बड़ी मात्रा में पैसा आ रहा है, लेकिन यह कहां जा रहा है, पता नहीं। भारत सरकार ने बीते सालों में टेरर फंडिंग को जबर्दस्त ढंग से रोका है। तब हमने केस टेकअप किया। भारत के दबाव में ही फाइनेशियल एक्शन टास्क फोर्स अस्तित्व में आया। कश्मीर में पत्थरबाजी इसलिए बंद हुई... क्योंकि इसके लिए जो पैसा युवाओं को दिया जाता था, वह बंद हो गया। सामूहिक प्रहार से इस नेटवर्क में तुलनात्मक रूप से काफी कम हो गया है। अब भारत को दोबारा एफएटीए पर जोर देना चाहिए। जब भी स्ट्राइक या युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो भारतीयों के मन में उम्मीद जागती है कि गुलाम जम्मू-कश्मीर को वापस ले लिया जाए? और परमाणु हथियार के उपयोग की आशंका? गुलाम जम्मू-कश्मीर का हाथ से जाना पाकिस्तान के अस्तित्व को खत्म कर सकता है। दोनों देशों के पास परमाणु हथियार है। ऐसे में बेहतर है कि यहां के लोगों का दिल जीता जाए और वहां की जनता ही भारत में शामिल होने की मांग रखे। यह बदलाव कश्मीर की अर्थव्यवस्था को सुधार कर उन्हें दिखाया जा सकता है। कश्मीर में लड़के-लड़कियां साथ बैठकर काफ नहीं पी सकते थे। फिल्में नहीं चलती थीं, अब बड़े-बड़े माल बन रहे हैं। सड़कों का जाल है। लोगों का आर्थिक उत्थान हो रहा है। 'ऑपरेशन सिंदूर' पूरा होने के बाद क्या भारत को पहलगाम मामले को लेकर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए? यदि आप जांच अधिकारी होते तो किन-किन बिंदुओं पर जांच करते और कमियों को दूर करने के लिए क्या-क्या कदम उठाते? इंटेलिजेंस थोड़ी कमजोर पड़ गई है। हमारी इलेक्ट्रानिक इंटेलिजेंस पकड़ने की क्षमता बहुत अच्छी थी, लेकिन मुंबई अटैक जैसे फोन पर इंटरसेप मिलना मुश्किल हो रहा है। मैं होता तो शायद सभी पर्यटन स्थलों पर 24 घंटे निगरानी का इंतजाम करता। खासतौर पर अमरनाथ यात्रा। मैंने आठ अमरनाथ यात्रा करवाई है। खुद मैं पहले श्रद्धालु के रूप में दर्शन करने जाता था। मैं नहीं समझता कि इस घटना के बाद कश्मीर का पर्यटन खत्म हो जाएगा। नई पीढ़ी के भीतर एक जज्बा दिखाई दे रहा है कि वह पाकिस्तान को संदेश देना चाहते हैं कि हम फिर कश्मीर जाएंगे। ट्यूलिप गार्डन, गंडोला, डल लेक पर खास सुरक्षा हो। 'वार गेम' के जरिये अभ्यास कीजिए। बदलाव के बाद भी अभी तक कश्मीर के भीतर से आतंकियों को मदद मिल रही है। इसे कैसे खत्म किया जाए? कश्मीर में बारामूला व गांदरमल ऐसी जगह है, जहां प्रो इंडिया मूवमेंट बहुत ज्यादा है। इस मूवमेंट को थोड़ा और बढ़ावा देना चाहिए। इसमें सरकार को आगे आना होगा। कश्मीर के कुछ हिस्सों में कट्टरपंथी विचारधारा अभी भी। हमारे नेतृत्व में इन चीजों को पहचानने की क्षमता है। कट्टरपंथी विचारों को खत्म करने का कोई बेहतरीन उदाहरण मिलता है क्या दुनियाभर में ? सिंगापुर...। हालांकि यह देश बहुत छोटा है, लेकिन इस माडल के तौर पर इसे जरूर देखना चाहिए। जब न्यूयार्क में 9/11 का हमला हुआ तो सिंगापुर ने ट्रैक किया कि अगला हमला दुनिया के किसी फाइनेंशियल सेंटर पर हो सकता है... दुबई, हांगकांग, दुबई, लंदन या सिंगापुर में हो। उन्होंने देखा मलेशिया से सिंगापुर आने वाले मुस्लिम मजदूरों पर नजर रखना शुरू किया। पता चला कि उनमें से बड़े पैमाने पर लोग कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करते हैं। काम खत्म होने के बाद मोबाइल पर जेहादी वीडियो देखते थे। इसके अलावा जेल में बंद समुदाय के लोगों के संपर्क में आने वाले भी कट्टरपंथी बन रहे थे। उन्होंने 75 प्रोगेसिव विचारधारा वाले इमाम तैयार किए और उन्हें उनके बीच भेजकर उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा की ओर जाने से रोककर विकासशील धारा से जोड़ने का काम किया। यह जारी है। यह भारत जैसे देश में एक साथ संभव नहीं है, लेकिन कश्मीर की आबादी सिंगापुर के बराबर ही है। मैंने सरकार को सुझाव भी दिया है कि कश्मीर के कुछ इलाकों में इसे लागू कर युवा पीढ़ी को मुख्य धारा से जोड़ा जा सकता है। सैन्य अधिकारी होने के साथ-साथ आप मुस्लिम समुदाय से भी हैं। क्या संदेश चाहेंगे? भारतीय मुसलमानों को यह सोचना चाहिए कि पाकिस्तान उनके लिए नहीं सोचता है। वह अपने देश के साथ रहे, अपनी सेना के साथ रहें। भारतीय नागरिकों को सलाह? सोशल मीडिया में वही चीज डालें, जो किसी दूसरे को प्रभावित न करें। यह गोला-बारूद से भी ज्यादा विस्फोटक। दुश्मन यह आपके हाथ में थमाकर आपको आपके देश के खिलाफ उपयोग करता है और कर रहा है। 'ऑपरेशन सिंदूर...' इस नाम से पाकिस्तान सहित दुनिया में एक बहुत बड़ा संदेश दिया गया है। सेना द्वारा किए जाने वाले ऑपरेशन के नाम कैसे रखे जाते हैं? मिलेट्री ऑपरेशन डाएरेक्टर के भीतर कोई भी ऑपरेशन का नाम दे सकता है, लेकिन मेरा मानना है कि यह चयन पीएम नरेन्द्र मोदी का है। पीएम नरेन्द्र मोदी ने साइकोलाजिकल वार फेयर यानी मनोवैज्ञानिक युद्ध लड़ने और पब्लिक कनेक्ट में बहुत माहिर हैं। यदि सेना यह नाम रखती तो ऑपरेशन थंडर बोल्ड, ऑपरेशन आक्रामक जैसा कोई नाम रखती। उदाहरण के लिए वर्ष 2001 में ऑपरेशन पराक्रम रखा गया। जम्मू-कश्मीर में जो ऑपरेशन हैं, वह ऑपरेशन रक्षक कहलाता है। जैसे रक्षक-1, रक्षक-2 रखा गया, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर वन टाइम ऑपरेशन है। जरूरी था कि ऐसा नाम रखा जाए कि दुनिया को शायद पहचान न आए, लेकिन देश के भीतर बहुत बड़ा संदेश जाए। यह भी पढ़ें: पाकिस्तानी Fatah Missile की कितनी है रेंज? जिसे सेना ने किया नष्ट; भारत की शॉर्ट रेंज मिसाइल के आगे कहां तक टिक पाएगी?

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