जयपुर की अन्नू कनावत ने सिर्फ 5,000 रुपये लगाकर बिना AC वाले छोटे से कमरे में मशरूम उगाना शुरू किया था। आज उनका आयुर्वेदिक मशरूम का बिजनेस 1 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का लक्ष्य लेकर चल रहा है। अन्नू का यहां तक का सफर चुनौतियों से भरा रहा है।
नई दिल्ली: अन्नू कनावत ने रीति-रिवाजों से जंग लड़कर खुद अपनी किस्मत लिखी है। वह जयपुर की रहने वाली हैं। उन्होंने कृषि-उद्यमिता के क्षेत्र में मिसाल कायम की है। सिर्फ 5,000 रुपये के शुरुआती निवेश से अन्नू ने एक छोटे से कमरे में बटन मशरूम उगाना शुरू किया था। आज, उनका 'आमल्डा ऑर्गेनिक फूड्स एंड रिसर्च सेंटर' 1 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का टारगेट लेकर चल रहा है। हेल्थ और वेलनेस पर फोकस्ड यह एग्री-बिजनेस नैचुरल मशरूम सप्लीमेंट्स और मशरूम उगाने का प्रशिक्षण देता है। अन्नू ने अपने दृढ़ संकल्प से पारंपरिक कृषि को एक सफल आयुर्वेदिक उद्यम में बदलकर दिखाया है। यही नहीं, किसानों और महिलाओं को भी सशक्त बनाया है। आइए, यहां अन्नू कनावत की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।चुनौतियों से भरा था शुरुआती सफर चुनौतियों से भरा था शुरुआती सफर' imgsize='64640' >राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के एक रूढ़िवादी परिवार से आने वाली अन्नू कनावत को अकादमिक और पेशेवर विकास के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। 12वीं के बाद आगे पढ़ने की उनकी इच्छा को परिवार से विरोध का सामना करना पड़ा। लेकिन, अन्नू ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने परिवार वालों से कहा कि अगर उनका किसी प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में दाखिला हो जाता है तो ही वे उनकी पढ़ाई का खर्च उठाएं। वरना जैसा परिवार का मन है, वह वैसा ही करेंगी। अन्नू सफल हुईं। उन्होंने महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से बीएससी की डिग्री ली। फिर गुजरात के SDAU से एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट में एमबीए किया। गुजरात में किसानों की प्रगतिशील खेती देखकर उनमें उद्यमिता का विचार आया। 2016 में शादी के बाद जयपुर शिफ्ट होने और असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी के दौरान भी वह अपना खुद का काम शुरू करने के बारे में सोचती रहीं। देहरादून में एक कॉलेज ट्रिप के दौरान उन्होंने मशरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया, जहां से उन्हें अपने उद्यम के लिए सही आइडिा मिला।सिर्फ 5,000 रुपये से की शुरुआत सिर्फ 5,000 रुपये से की शुरुआत ' imgsize='40126' >2018 में अन्नू ने 5,000 के निवेश से 10x10 फीट के एक छोटे कमरे में बटन मशरूम उगाना एक प्रयोग के तौर पर शुरू किया। इसके लिए सर्दियों के कारण एसी की जरूरत नहीं पड़ी। प्रयोग सफल रहा। इससे उन्हें अपने खेती के तरीके पर भरोसा हो गया। इसके बाद उन्होंने भीलवाड़ा में तीन कमरों की एक बड़ी यूनिट स्थापित की। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से 15 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त किया। उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य लाभ और आसान खेती के कारण ऑयस्टर मशरूम उगाना शुरू किया। हालांकि, 2020 में कोरोना महामारी ने उनके सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। बिल्कुल तैयार 700 किलो ऑयस्टर मशरूम को कोई खरीदार नहीं मिला।संकट को अवसर में बदल दिया बाजार बंद होने पर अन्नू ने हार नहीं मानी और ऑयस्टर मशरूम को पीसकर पाउडर सप्लीमेंट में बदल दिया। उन्होंने इस पाउडर को अपने गांव की महिलाओं को बांटा, जिन्हें घुटनों और पीठ के दर्द जैसी समस्याओं में काफी राहत मिली। यह हाथ से बना मशरूम पाउडर उनकी नई पहचान और स्टार्टअप का 'हीरो प्रोडक्ट' बन गया। इन पाउडरों को बेचकर उन्होंने 3.
5 लाख रुपये का राजस्व कमाया। इसमें 1.5 लाख रुपये का लाभ हुआ। इसी सफलता से प्रेरित होकर उन्होंने 2021 में आमल्डा ऑर्गेनिक फूड्स एंड रिसर्च सेंटर की शुरुआत की। उन्होंने अपना ध्यान मशरूम के बड़े पैमाने पर उत्पादन से हटाकर महिलाओं और किसानों को प्रशिक्षण देने और मशरूम से बने आयुर्वेदिक सप्लीमेंट्स के उत्पादन पर फोकस किया। अब 1 करोड़ रुपये का टारगेट आज आमल्डा ऑर्गेनिक फूड्स जयपुर स्थित एक सफल हेल्थ और वेलनेस ब्रांड है। यह सप्लीमेंट पाउडर, कैप्सूल और लिक्विड एक्सट्रैक्ट बेचता है। अन्नू ने बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के बजाय 30 से अधिक महिलाओं और किसानों को ऑयस्टर मशरूम की उच्च-गुणवत्ता वाली खेती में प्रशिक्षित किया है और अब उन्हीं से उत्पाद खरीदती हैं। इससे उन्हें स्थिर आय मिलती है। हाल ही में उन्होंने 20 लाख रुपये का निवेश करके महंगे कॉर्डिसेप्स मिलिटैरिस मशरूम की खेती भी शुरू की है। इसका उद्देश्य इन औषधीय मशरूम को मध्यम वर्ग के लिए किफायती बनाना है। वित्त वर्ष 2024-25 में 60 लाख रुपये का रेवेन्यू दर्ज करने के बाद अन्नू कनावत का लक्ष्य अगले वर्ष तक 1 करोड़ से अधिक का वार्षिक राजस्व हासिल करना है। इसके साथ ही वह महिलाओं को वित्तीय रूप से स्वतंत्र बनाने के अपने मिशन को आगे बढ़ा रही हैं।
अन्नू कनावत की सफलता अन्नू कनावत सफलता की कहानी सफलता की कहानी अन्नू कनावत मशरूम खेती Who Is Annu Kanawat Annu Kanawat Success Annu Kanawat Success Story Success Story Annu Kanawat Mushroom Farming
United States Latest News, United States Headlines
Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.
Ramniwas Rawat Success Story: जहां हौसला था, वहां खेतों में लहलहाई हरियाली, युवा किसान ने रचा सफलता का फॉर्...Ramniwas Rawat Success Story: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के बिलारा गांव से निकलकर एक युवा ने यह साबित कर दिया कि अगर सोच आधुनिक हो, नजर दूर तक जाती हो और मेहनत में ईमानदारी हो, तो गांव की जमीन भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की मिसाल बन सकती है.
Read more »
Success Story: मार्केटिंग की हाई-पेइंग जॉब छोड़ी... शुरू किया ये काम, अब ₹45 लाख की कमाई, हर कोई पूछ रहा नामहरियाणा के इंजीनियर सुमित गिरी ने नौकरी छोड़कर वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) का बिजनेस शुरू किया। इसमें उन्हें जबदस्त सफलता मिली। वित्तीय वर्ष 2024-25 में उनका रेवेन्यू 45 लाख रुपये तक पहुंच गया।
Read more »
UPSC Success Story: 40 लाख का पैकेज छोड़कर की यूपीएससी की तैयारी, असफलता के बाद कैसे पहले बने IPS-फिर IASUPSC IAS Success Story: यूपी के आदित्य श्रीवास्तव ने पहले देश के सबसे टफ एग्जाम IIT-JEE मेन्स और एडवांस्ड में झंडे गाड़े, फिर सबसे प्रतिष्ठित यूपीएससी परीक्षा को दो बार क्रैक किया। पहले IPS और फिर AIR-1 रैंक लाकर IAS ऑफिसर बने।
Read more »
आर्मी खरीद रही ₹5,000 करोड़ के स्वदेशी ड्रोन...दुश्मन को तीन तरह से निपटाने की तैयारीभारतीय सेना के लिए पांच हजार करोड़ रुपये के स्वदेशी ड्रोन खरीदने के ऑर्डर दिए गए हैं। इस ऑर्डर से पहले सेना ने जरूरत के हिसाब से सभी तरह के ड्रोन के परीक्षण किए।
Read more »
India Accelerates Drone Warfare Push: Army Clears Rs 5,000-Crore Indigenous UAV Buy, Says ReportAhead of the procurement, the Army conducted extensive trials by recreating operational conditions similar to those encountered during Operation Sindoor, subjecting the drones to stringent performance evaluations.
Read more »
Success Story: देश सेवा का ऐसा जुनून, इंजीनियरिंग के बाद UPSC में लगाई हैट्रिक, पहले IRS, फिर IPS और अब IASUPSC Success Story: आईएएस अभिषेक वशिष्ठ यूपीएससी के एक ऐसे सफल उम्मीदवार हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग के बाद सिविल सेवा की तैयारी करने का फैसला लिया. देश सेवा की भावना के खातिर मल्टीनेशनल कंपनी से प्लेसमेंट ऑफर ठुकरा दिया और अधिकारी बनें.
Read more »
