बेंगलुरु के एक कपल ने 'द पिकल्स' (The Pickls) नाम का डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) फूड स्टार्टअप शुरू किया है। यह स्टार्टअप बहुत कम समय में 8,000 से ज्यादा ग्राहकों को घर जैसे बने अचार और सुपरफूड्स पहुंचा चुका है।
नई दिल्ली: सफलता की कहानियां अक्सर बड़े फैसलों से शुरू होती हैं। बेंगलुरु के रहने वाले सुदर्शन एम.के. और प्रवलिका वी. की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आईटी सेक्टर में एक दशक से अधिक समय तक शानदार करियर बनाने और विदेश में 60 लाख रुपये सालाना का पैकेज पाने वाले सुदर्शन ने अपने परिवार और उद्यमिता के सपने के लिए एक साहसी कदम उठाया। उन्होंने अपनी पत्नी प्रवलिका के साथ मिलकर द पिकल्स नाम के एक D2C स्टार्टअप की शुरुआत की। यह ब्रांड न केवल आंध्र प्रदेश के पारंपरिक और शुद्ध अचारों को दुनिया तक पहुंचा रहा है, बल्कि सुपरफूड्स और मिलेट्स के जरिए स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा दे रहा है। आइए, यहां सुदर्शन एम.
के. और प्रवलिका वी. की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।कॉर्पोरेट की चमक छोड़ उद्यमिता का सफर कॉर्पोरेट की चमक छोड़ उद्यमिता का सफर ' imgsize='56006' >सुदर्शन एम.के. और प्रवलिका वी. काफी पढ़े-लिखे कपल हैं। दोनों ने इंजीनियरिंग और एमबीए किया हुआ है। सुदर्शन पहले एक सफल आईटी प्रोफेशनल थे। संयुक्त अरब अमीरात में 60 लाख रुपये के पैकेज पर काम कर रहे थे। उन्होंने एक पारिवारिक इमरजेंसी के कारण भारत लौटने का फैसला किया। इतने शानदार पैकेज वाली नौकरी छोड़ने पर कई लोगों को ताज्जुब भी हुआ। हालांकि, वह अपना मन बना चुके थे। प्रवलिका भी आईटी सेक्टर में काम कर रही थीं। दोनों ने मिलकर पहले एक IT कंसल्टिंग फर्म शुरू की। लेकिन, उनका दिल आंध्र प्रदेश के पारंपरिक अचारों के स्वाद को दुनिया तक पहुंचाने में लगा था। उन्होंने दिसंबर 2023 में 'The Pickls' की नींव रखी। अपनी मेहनत की कमाई से 25 लाख रुपये इस सपने को सच करने में लगा दिए।शुद्धता और सामाजिक सशक्तीकरण का संगम शुद्धता और सामाजिक सशक्तीकरण का संगम' imgsize='53438' >पति-पत्नी का स्टार्टअप उनके लिए सिर्फ एक बिजनेस नहीं है, बल्कि यह एक मिशन है। यह ब्रांड आंध्र प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं की ओर से तैयार पारंपरिक व्यंजनों पर आधारित है। सुदर्शन और प्रवलिका का उद्देश्य ग्राहकों को 'क्लीन-लेबल' उत्पाद देना है, जिनमें न तो कोई आर्टिफिशियल रंग है और न ही प्रिजर्वेटिव। अचारों के अलावा, यह स्टार्टअप कर्नाटक के किसानों से सीधे जैविक मिलेट्स खरीदता है। इससे उन्हें उचित दाम मिलते हैं। उनका यह मॉडल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ पारंपरिक स्वाद को आधुनिक पैकेजिंग में पेश करता है।आसान नहीं था रास्ता किसी भी नए स्टार्टअप की तरह सुदर्शन और प्रवलिका के लिए भी रास्ता आसान नहीं था। शुरुआत में उन्हें लॉजिस्टिक्स, खराब डिलीवरी और ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस के भारी कमीशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफार्मों पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने अपनी खुद की वेबसाइट और सीधे ग्राहकों से जुड़ने के मॉडल पर फोकस किया। वर्किंग कैपिटल की कमी के बावजूद उन्होंने गुणवत्ता से समझौता नहीं किया। उनके वेज अचार और नॉन-वेज अचार किफायती कीमतों पर उपलब्ध हैं। इसने ग्राहकों का भरोसा तेजी से जीता।बड़ी है आगे की योजना बड़ी है आगे की योजना' imgsize='142374' >मात्र एक साल के भीतर स्टार्टअप ने भारत सहित अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और खाड़ी देशों में 8,000 से अधिक ग्राहकों को अपनी सेवाएं दी हैं। इसका पोर्टफोलियो 50 से बढ़कर 75 से अधिक उत्पादों तक पहुंच गया है। इसमें अब उपमा, खिचड़ी और पास्ता जैसे रेडी-टू-कुक मिलेट उत्पाद भी शामिल हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में 12 लाख रुपये के राजस्व के साथ कपल अब वेंचर कैपिटल फंडिंग और नई हेल्थ-फूड कैटेगरी में विस्तार करने की योजना बना रहा है। उनका टारगेट ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाते हुए आंध्र के जायके को हर वैश्विक रसोई तक पहुंचाना है।
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