UPSC Success Story: आईपीएस उमेश खांदबहाले उन युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जिन्हें लगता है कि अगर वो एक बार फेल हो गए तो वो जीवन में कुछ नहीं कर सकेंगे. ऐसे में उमेश ने 12वीं कक्षा में फेल होने के बाद यूपीएससी सिविल सेवा की परीक्षा को क्रैक किया और अधिकारी बने.
IPS Umesh Ganpat Khandbahale Success Story: कहते हैं कि अगर सपने सच्चे दिल से देखे जाएं और उन्हें पूरा करने का जुनून हो, तो मुश्किलें भी रास्ता बना देती हैं. कुछ ऐसी ही कहानी है आईपीएस उमेश गणपत खांदबहाले की, जिन्होंने साधारण परिवार में जन्म लेकर कठिन परिस्थितियों के बावजूद UPSC जैसी कठिन परीक्षा को क्रैक किया और देश की सेवा का सफर शुरू किया.
आइए हम आपको उनकी प्रेरणादायक जर्नी के बारे में बताते हैं. IPS गणपत खांदबहाले आईपीएस उमेश गणपत खांदबहाले मूल रूप से महाराष्ट्र के नासिक जिले के एक छोटे से गांव महिरावाणी के रहने वाले हैं. इस गांव के अधिकांश लोग या तो खेती पर निर्भर है या फिर मवेशी पाल दूध बेचते हैं. उमेश का परिवार भी उन्हीं लोगों में से एक है. उमेश के पिता गणपत खंडबहाले भी दूध बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे. आर्थिक रूप से मजबूत ना होने के बावजूद उनके पिता ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी. 12वीं में हुए फेल उमेश ने बोर्डिंग स्कूल से साल 2001 में 10वीं की कक्षा पास की, लेकिन अंग्रेजी में कमजोर होने के कारण वो 12वीं की कक्षा में फेल हो गए. उन्हें अंग्रेजी में केवल 21 अंक ही मिले थे. इस घटना ने उमेश को अंदर से तोड़कर रख दिया और वो बोर्डिंग स्कूल छोड़ घर वापस आ गए. इसके बाद उन्होंने अपने पिता के साथ दूध बेचना और खेतों में काम करना शुरू कर दिया. इस दौरान वे हर दिन गांव में घूम-घूमकर दूध इकट्ठा करते और उसे बेचने के लिए नासिक के बाजार जाते थे. एजुकेशन क्वालिफिकेशन एक दिम नासिक जाते समय उमेश का ध्यान यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी के परिसर पर परा, जो नासिक के रास्ते से होकर गुजरता था. उस दिन उन्होंने परिसर के अंदर जाकर यूनिवर्सिटी के बारे में पूछताछ की और फिर एडमिशन ले लिया. इसके बाद साल 2005 में उन्होंने 12वीं कक्षा पास की. फिर पुणे यूनिवर्सिटी के KTHM कॉलेज से BA, B.Ed और MA किया. इसके बाद उन्होंने बागवानी में डिप्लोमा कोर्स भी किया. ये भी पढ़ें: Success Story: भैंस चराने वाली लड़की में सीरियल ने जगाया IAS बनने का सपना, फिर ऐसे क्रैक किया UPSC, बनी मिसाल लगातार 2 बार मिली निराशा MA करने के दौरान ही उन्हें यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के बारे में जानकारी मिली, जिसकी शुरुआती तैयारी उन्होंने कोचिंग की मदद से शुरू की और फिर कुछ महीनों बाद वो तैयारी के लिए दिल्ली आ गए. साल 2012 में उमेश ने पहली बार यूपीएससी का अटेंप्ट दिया. हालांकि, यूपीएससी क्रैक करने का सफर उमेश के लिए आसान नहीं था. एक के बाद एक लगातार 2 बार उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. युवाओं के लिए प्रेरणा उमेश ने अपनी गलतियों से सीखते हुए यूपीएससी के तीसरे अटेंप्ट की तैयारी शुरू की. उमेश की मेहनत, लगन और संयम का परिणाम रहा कि उन्होंने UPSC CSE 2014 की परीक्षा को क्रैक किया. अपने तीसरे अटेंप्स में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 704 हासिल की. इसी के साथ उनका चयन पश्चिम बंगाल कैडर के तहत आईपीएस के पद पर हुआ. IPS उमेश गणपत खांदबहाले की सफलता उन छात्रों के लिए एक प्रेरणा है, जो दर्शाता है कि सपनों का रास्ता चाहे जितना कठिन क्यों न हो, अगर हिम्मत न हारें तो मंजिल जरूर मिलती है. ये भी पढ़ें: UPSC Success Story: 4 बच्चे, चारों ने क्रैक किया UPSC, 2 IAS तो 2 IPS, जानें इस बैंक मैनेजर के परिवार की सफलता की कहानी
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