उत्तराखंड ने अपनी 25 साल की यात्रा में कई चुनौतियों का सामना किया है। राज्य की सवा करोड़ जनता के सहयोग से उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का संकल्प लिया गया है। उत्तराखंड का भविष्य उज्ज्वल है और यह निश्चित रूप से अपने लक्ष्य को प्राप्त...
रविंद्र बड़थ्वाल, जागरण, देहरादून। हिमाच्छादित उच्च हिमालयी श्रृंखलाएं, सदानीरा नदियां, हरे-भरे बुग्याल, फूलों की घाटी और अकूत वन संपदा, मैदानों से लेकर पर्वत श्रेणियों में अठेखली करता अल्हड़ प्राकृतिक सौंदर्य से युक्त उत्तराखंड। 25 वर्ष पहले पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व में आया यह भू-भाग अब अपनी रजत जयंती मना रहा है। इस अवधि में राज्य ने विकास के नए सोपान छुए तो इसके पीछे केंद्र की सहायता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। लेकिन, यह भी सच है कि राज्य जब-जब राजनीतिक स्थिरता की राह पर बढ़ा है, केंद्र की सहायता का अधिक लाभ तब ही धरातल पर उतर सका। राज्य के शुरुआती वर्षों में केंद्र की अटल बिहारी सरकार के औद्योगिक पैकेज और विशेष राज्य के दर्जे ने उत्तराखंड की मजबूत आधारशिला रखी तो तब राज्य में पांच वर्ष तक चलने वाली कांग्रेस की एनडी तिवारी सरकार रही। अब समान नागरिक संहिता, नकलरोधी, मतांतरण पर अंकुश लगाने समेत कई कड़े कानून अस्तित्व में आए तो भी राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिरता की इसमें बड़ी भूमिका है। उत्तराखंड की 25 वर्षों की यात्रा पर नजर डालें तो केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता और सत्ताधारी दलों के केंद्रीय नेतृत्व का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। छोटे राज्य और सीमित संसाधनों के कारण केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता ने राज्य की विकास यात्रा और जनाकांक्षाओं में रंग भरने में निर्णायक भूमिका अदा की है। उत्तराखंड विशेष दर्जा प्राप्त राज्य होने से अब तक केंद्रपोषित योजनाओं और बाह्य सहायतित योजनाओं में अन्य राज्यों की तुलना में अधिक सहायता ले रहा है। 15वें वित्त आयोग ने पहली बार राजस्व घाटा अनुदान दिया तो राज्य को अपने खर्चों की पूर्ति के लिए बार-बार बाजार से ऋण उठाने की विवशता से राहत मिली। केंद्र की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं ने उम्मीदों में भरे रंग अब भी केंद्र की महत्वाकांक्षी परियोजनाएं चारधाम आलवेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन, केदारनाथ व हेमकुंड साहिब रोपवे, सीमांत क्षेत्रों में पर्वतमाला के रूप में सड़क नेटवर्क, हवाई कनेक्टिविटी गेमचेंजर के रोल में हैं। यही कारण है कि उत्तराखंड की विकास की आकांक्षा और राजनीतिक यात्रा में डबल इंजन भी प्रमुख कारक के रूप में फूला-फला है। डबल इंजन की यह भूमिका राजनीतिक भी है। सत्ताधारी दल और मुख्यमंत्री को जब भी पार्टी हाईकमान का साथ मिला तो राज्य को उसका लाभ राजनीतिक स्थिरता के रूप में मिला है। सबसे पहले यह लाभ लेने वाले मुख्यमंत्री एनडी तिवारी रहे हैं। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इसी राह के पथिक हैं। हाईकमान ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन पर भरोसा जताया तो चुनाव में प्रचंड जीत मिलने के बाद भी धामी पर अपना भरोसा डिगने नहीं दिया। परिणाम देखिए, उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने समान नागरिक संहिता लागू की। सरकारी भूमि से हटा अतिक्रमण, कड़े कानूनों ने बनाई पहचान राज्य में सरकारी भूमि विशेष रूप से वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण को रोकने के लिए अभियान छेड़ा है। मुख्यमंत्री धामी स्पष्ट कर चुके हैं कि धार्मिक संरचनाओं के रूप में अतिक्रमण को हटाने में ढिलाई नहीं बरती जाएगी। अब तक 9000 एकड़ भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई जा चुकी है। इसी प्रकार मतांतरण रोकने को कड़े कानून को छांगुर प्रकरण के बाद और कड़ा किया गया है। दंगाइयों, बलवाइयों को अपनी करतूत की कीमत अपनी संपत्ति जब्ती के रूप में भुगतनी पड़ेगी। यह कड़ा कानून भी प्रदेश में लागू हो चुका है। नकलरोधी कानून ने प्रदेश के युवाओं में भर्ती परीक्षाओं में विश्वास जमाया तो देश में अलग पहचान बनाने में मदद की। महिलाओं के लिए सरकारी भर्तियों में 30 प्रतिशत आरक्षण, राज्य आंदोलनकारियों एवं उनके आश्रितों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण जैसे लंबित प्रकरणों को कानूनी रूप देने में धामी सरकार ने प्रभावी पहल की। भाजपा हाईकमान ने स्थिरता के एजेंडे को दिया खाद-पानी सशक्त भू-कानून प्रदेश में भूमि की अवैध रूप से बिक्री या खरीद पर अंकुश लगाने का माध्यम बन चुका है। कड़े भू-कानून की मांग उत्तराखंड राज्य बनने के साथ ही उठ खड़ी हुई थी, लेकिन इससे कानूनी जामा अब पहनाया जा सका है। साथ ही निवेशक सम्मेलन ने राज्य की औद्योगिक विकास की आकांक्षाओं को फिर हवा दी है। 90 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग हो चुकी है। इन्हें शीघ्र धरातल पर उतरता हुआ देखने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। कड़े कानूनों को बनाने और इनके क्रियान्वयन के साथ ही आर्थिक व सामाजिक विकास में प्रदेश में स्थिर सरकार की भूमिका है। केंद्र की सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा हाईकमान ने राजनीतिक स्थिरता को अपने एजेंडे में शीर्ष पर रखा है। ‘देवभूमि उत्तराखंड ने अपनी इन 25 वर्षों की यात्रा में अनके उतार-चढ़ाव का सफलतापूर्वक सामना किया है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि प्रदेश की सवा करोड़ जनता के सहयोग से हम आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने विकल्प रहित संकल्प को पूर्ण करने में अवश्य सफल रहेंगे।’ - - पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड.
रविंद्र बड़थ्वाल, जागरण, देहरादून। हिमाच्छादित उच्च हिमालयी श्रृंखलाएं, सदानीरा नदियां, हरे-भरे बुग्याल, फूलों की घाटी और अकूत वन संपदा, मैदानों से लेकर पर्वत श्रेणियों में अठेखली करता अल्हड़ प्राकृतिक सौंदर्य से युक्त उत्तराखंड। 25 वर्ष पहले पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व में आया यह भू-भाग अब अपनी रजत जयंती मना रहा है। इस अवधि में राज्य ने विकास के नए सोपान छुए तो इसके पीछे केंद्र की सहायता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। लेकिन, यह भी सच है कि राज्य जब-जब राजनीतिक स्थिरता की राह पर बढ़ा है, केंद्र की सहायता का अधिक लाभ तब ही धरातल पर उतर सका। राज्य के शुरुआती वर्षों में केंद्र की अटल बिहारी सरकार के औद्योगिक पैकेज और विशेष राज्य के दर्जे ने उत्तराखंड की मजबूत आधारशिला रखी तो तब राज्य में पांच वर्ष तक चलने वाली कांग्रेस की एनडी तिवारी सरकार रही। अब समान नागरिक संहिता, नकलरोधी, मतांतरण पर अंकुश लगाने समेत कई कड़े कानून अस्तित्व में आए तो भी राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिरता की इसमें बड़ी भूमिका है। उत्तराखंड की 25 वर्षों की यात्रा पर नजर डालें तो केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता और सत्ताधारी दलों के केंद्रीय नेतृत्व का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। छोटे राज्य और सीमित संसाधनों के कारण केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता ने राज्य की विकास यात्रा और जनाकांक्षाओं में रंग भरने में निर्णायक भूमिका अदा की है। उत्तराखंड विशेष दर्जा प्राप्त राज्य होने से अब तक केंद्रपोषित योजनाओं और बाह्य सहायतित योजनाओं में अन्य राज्यों की तुलना में अधिक सहायता ले रहा है। 15वें वित्त आयोग ने पहली बार राजस्व घाटा अनुदान दिया तो राज्य को अपने खर्चों की पूर्ति के लिए बार-बार बाजार से ऋण उठाने की विवशता से राहत मिली। केंद्र की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं ने उम्मीदों में भरे रंग अब भी केंद्र की महत्वाकांक्षी परियोजनाएं चारधाम आलवेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन, केदारनाथ व हेमकुंड साहिब रोपवे, सीमांत क्षेत्रों में पर्वतमाला के रूप में सड़क नेटवर्क, हवाई कनेक्टिविटी गेमचेंजर के रोल में हैं। यही कारण है कि उत्तराखंड की विकास की आकांक्षा और राजनीतिक यात्रा में डबल इंजन भी प्रमुख कारक के रूप में फूला-फला है। डबल इंजन की यह भूमिका राजनीतिक भी है। सत्ताधारी दल और मुख्यमंत्री को जब भी पार्टी हाईकमान का साथ मिला तो राज्य को उसका लाभ राजनीतिक स्थिरता के रूप में मिला है। सबसे पहले यह लाभ लेने वाले मुख्यमंत्री एनडी तिवारी रहे हैं। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इसी राह के पथिक हैं। हाईकमान ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन पर भरोसा जताया तो चुनाव में प्रचंड जीत मिलने के बाद भी धामी पर अपना भरोसा डिगने नहीं दिया। परिणाम देखिए, उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने समान नागरिक संहिता लागू की। सरकारी भूमि से हटा अतिक्रमण, कड़े कानूनों ने बनाई पहचान राज्य में सरकारी भूमि विशेष रूप से वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण को रोकने के लिए अभियान छेड़ा है। मुख्यमंत्री धामी स्पष्ट कर चुके हैं कि धार्मिक संरचनाओं के रूप में अतिक्रमण को हटाने में ढिलाई नहीं बरती जाएगी। अब तक 9000 एकड़ भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई जा चुकी है। इसी प्रकार मतांतरण रोकने को कड़े कानून को छांगुर प्रकरण के बाद और कड़ा किया गया है। दंगाइयों, बलवाइयों को अपनी करतूत की कीमत अपनी संपत्ति जब्ती के रूप में भुगतनी पड़ेगी। यह कड़ा कानून भी प्रदेश में लागू हो चुका है। नकलरोधी कानून ने प्रदेश के युवाओं में भर्ती परीक्षाओं में विश्वास जमाया तो देश में अलग पहचान बनाने में मदद की। महिलाओं के लिए सरकारी भर्तियों में 30 प्रतिशत आरक्षण, राज्य आंदोलनकारियों एवं उनके आश्रितों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण जैसे लंबित प्रकरणों को कानूनी रूप देने में धामी सरकार ने प्रभावी पहल की। भाजपा हाईकमान ने स्थिरता के एजेंडे को दिया खाद-पानी सशक्त भू-कानून प्रदेश में भूमि की अवैध रूप से बिक्री या खरीद पर अंकुश लगाने का माध्यम बन चुका है। कड़े भू-कानून की मांग उत्तराखंड राज्य बनने के साथ ही उठ खड़ी हुई थी, लेकिन इससे कानूनी जामा अब पहनाया जा सका है। साथ ही निवेशक सम्मेलन ने राज्य की औद्योगिक विकास की आकांक्षाओं को फिर हवा दी है। 90 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग हो चुकी है। इन्हें शीघ्र धरातल पर उतरता हुआ देखने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। कड़े कानूनों को बनाने और इनके क्रियान्वयन के साथ ही आर्थिक व सामाजिक विकास में प्रदेश में स्थिर सरकार की भूमिका है। केंद्र की सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा हाईकमान ने राजनीतिक स्थिरता को अपने एजेंडे में शीर्ष पर रखा है। ‘देवभूमि उत्तराखंड ने अपनी इन 25 वर्षों की यात्रा में अनके उतार-चढ़ाव का सफलतापूर्वक सामना किया है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि प्रदेश की सवा करोड़ जनता के सहयोग से हम आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने विकल्प रहित संकल्प को पूर्ण करने में अवश्य सफल रहेंगे।’ - - पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
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