China Halts Electricity Imports: चीन ने रूस से बिजली खरीदना बंद कर दिया है। कारण है कि रूस की निर्यात कीमतें चीन की घरेलू कीमतों से अधिक हो गई हैं। यह सौदा 2026 तक महंगा पड़ रहा था। हालांकि, 2037 तक अनुबंध मान्य है। रूस आपसी फायदे वाले समझौते होने पर निर्यात फिर से शुरू कर सकता...
नई दिल्ली: रूस और चीन के बीच बिजली सप्लाई को लेकर कहानी रुक गई है। दोनों देश इस पर बातचीत कर रहे हैं। रूस के ऊर्जा मंत्रालय ने रॉयटर्स को बताया कि चीन ने ऊंची कीमतों के कारण रूस से बिजली खरीदना बंद कर दिया है। रूसी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने 1 जनवरी से रूस से बिजली का आयात रोक दिया है। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि रूस की बिजली निर्यात की कीमतें चीन की घरेलू कीमतों से ज्यादा हो गई थीं। 2026 तक रूस की बिजली निर्यात की कीमतें चीन की घरेलू बिजली कीमतों से ऊपर चली गई थीं। इससे चीन के लिए यह सौदा महंगा पड़ रहा था।चीन-रूस के बीच लंबी जमीनी सीमा है। इससे वे ग्रिड के जरिए सीधे बिजली का व्यापार कर पाते हैं। लेकिन, भारत और रूस के बीच ऐसी कोई भौगोलिक कनेक्टिविटी नहीं है। लिहाजा, भारत चीन की तरह रूस से सीधे तौर पर बिजली आयात नहीं करता है। हालांकि, भारत और रूस के बीच ऊर्जा संबंध बहुत गहरे हैं। भारत रूस से बिजली के बजाय बड़े पैमाने पर ईंधन खरीदता है। इनमें कच्चा तेल और कोयला शामिल हैं। रूसी बिजली निर्यात कीमतें ज्यादा रूस की बिजली निर्यात की कीमतें चीन की घरेलू कीमतों से ज्यादा होने के कारण 2026 में यह सप्लाई फिर से शुरू होने की संभावना कम है। यह जानकारी कोमर्सेंट के सूत्रों के हवाले से सामने आई है। हालांकि, रूस और चीन के बीच बिजली सप्लाई का यह कॉन्ट्रैक्ट 2037 तक मान्य है। रूसी ऊर्जा मंत्रालय ने कहा है कि अगर चीन की तरफ से अनुरोध आता है और दोनों पक्षों के लिए फायदे वाले समझौते होते हैं तो रूस बिजली निर्यात फिर से शुरू कर सकता है।मंत्रालय ने रॉयटर्स को बताया, 'रूस चीन को बिजली निर्यात फिर से शुरू कर सकता है, अगर उसे बीजिंग से ऐसा अनुरोध मिलता है और आपसी फायदे वाले सहयोग की शर्तें तय होती हैं।' रूस की पहली प्राथमिकता अपने पूर्वी क्षेत्रों में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करना है। लेकिन, दोनों पक्ष कीमतों पर सहमत हो जाते हैं तो रूस चीन को सप्लाई फिर से शुरू कर सकता है।ऊर्जा कीमतों पर होती रही है अनबनरूस से चीन को बिजली निर्यात करने वाली कंपनी इंटरआरएओ ने कहा कि कोई भी पक्ष कॉन्ट्रैक्ट खत्म नहीं करना चाहता। इंटरआरएओ ने कहा, 'फिलहाल, दोनों पक्ष बिजली व्यापार के अवसरों को सक्रिय रूप से तलाश रहे हैं।'चीन और रूस के बीच करीबी रिश्तों के बावजूद ऊर्जा की कीमतों को लेकर कई बार अनबन हुई है। चीन को रूस की कीमतें अक्सर पसंद नहीं आतीं। इसका एक बड़ा उदाहरण 'पावर ऑफ साइबेरिया 2' गैस पाइपलाइन है। यह रूस से मंगोलिया के रास्ते चीन तक जानी है। इस पाइपलाइन पर अंतिम समझौता अभी तक नहीं हो पाया है। इसकी एक बड़ी वजह गैस की कीमत को लेकर रूस की गजप्रोम कंपनी और चीन के बीच चल रहा मतभेद है।.
नई दिल्ली: रूस और चीन के बीच बिजली सप्लाई को लेकर कहानी रुक गई है। दोनों देश इस पर बातचीत कर रहे हैं। रूस के ऊर्जा मंत्रालय ने रॉयटर्स को बताया कि चीन ने ऊंची कीमतों के कारण रूस से बिजली खरीदना बंद कर दिया है। रूसी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने 1 जनवरी से रूस से बिजली का आयात रोक दिया है। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि रूस की बिजली निर्यात की कीमतें चीन की घरेलू कीमतों से ज्यादा हो गई थीं। 2026 तक रूस की बिजली निर्यात की कीमतें चीन की घरेलू बिजली कीमतों से ऊपर चली गई थीं। इससे चीन के लिए यह सौदा महंगा पड़ रहा था।चीन-रूस के बीच लंबी जमीनी सीमा है। इससे वे ग्रिड के जरिए सीधे बिजली का व्यापार कर पाते हैं। लेकिन, भारत और रूस के बीच ऐसी कोई भौगोलिक कनेक्टिविटी नहीं है। लिहाजा, भारत चीन की तरह रूस से सीधे तौर पर बिजली आयात नहीं करता है। हालांकि, भारत और रूस के बीच ऊर्जा संबंध बहुत गहरे हैं। भारत रूस से बिजली के बजाय बड़े पैमाने पर ईंधन खरीदता है। इनमें कच्चा तेल और कोयला शामिल हैं। रूसी बिजली निर्यात कीमतें ज्यादा रूस की बिजली निर्यात की कीमतें चीन की घरेलू कीमतों से ज्यादा होने के कारण 2026 में यह सप्लाई फिर से शुरू होने की संभावना कम है। यह जानकारी कोमर्सेंट के सूत्रों के हवाले से सामने आई है। हालांकि, रूस और चीन के बीच बिजली सप्लाई का यह कॉन्ट्रैक्ट 2037 तक मान्य है। रूसी ऊर्जा मंत्रालय ने कहा है कि अगर चीन की तरफ से अनुरोध आता है और दोनों पक्षों के लिए फायदे वाले समझौते होते हैं तो रूस बिजली निर्यात फिर से शुरू कर सकता है।मंत्रालय ने रॉयटर्स को बताया, 'रूस चीन को बिजली निर्यात फिर से शुरू कर सकता है, अगर उसे बीजिंग से ऐसा अनुरोध मिलता है और आपसी फायदे वाले सहयोग की शर्तें तय होती हैं।' रूस की पहली प्राथमिकता अपने पूर्वी क्षेत्रों में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करना है। लेकिन, दोनों पक्ष कीमतों पर सहमत हो जाते हैं तो रूस चीन को सप्लाई फिर से शुरू कर सकता है।ऊर्जा कीमतों पर होती रही है अनबनरूस से चीन को बिजली निर्यात करने वाली कंपनी इंटरआरएओ ने कहा कि कोई भी पक्ष कॉन्ट्रैक्ट खत्म नहीं करना चाहता। इंटरआरएओ ने कहा, 'फिलहाल, दोनों पक्ष बिजली व्यापार के अवसरों को सक्रिय रूप से तलाश रहे हैं।'चीन और रूस के बीच करीबी रिश्तों के बावजूद ऊर्जा की कीमतों को लेकर कई बार अनबन हुई है। चीन को रूस की कीमतें अक्सर पसंद नहीं आतीं। इसका एक बड़ा उदाहरण 'पावर ऑफ साइबेरिया 2' गैस पाइपलाइन है। यह रूस से मंगोलिया के रास्ते चीन तक जानी है। इस पाइपलाइन पर अंतिम समझौता अभी तक नहीं हो पाया है। इसकी एक बड़ी वजह गैस की कीमत को लेकर रूस की गजप्रोम कंपनी और चीन के बीच चल रहा मतभेद है।
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