Russian Oil Imports: भारत का रूसी तेल आयात घट गया है। इसके कारण इस पर डिस्काउंट बढ़ गया है। चीन ने इस मौके का फायदा उठा लिया है। वह सस्ते रूसी तेल को भरभरकर खरीदने में जुटा है। फरवरी में चीन का रूसी तेल आयात नया रिकॉर्ड बनाने की तरफ बढ़ गया है।
नई दिल्ली: भारत ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी है। चीन ने इस मौके का फायदा उठा लिया है। वह भारी डिस्काउंट पर इसे भरभरकर खरीदने में जुटा है। चीन फरवरी में रूसी कच्चे तेल की खरीद का नया रिकॉर्ड बनाने वाला है। इसके उलट भारत अपनी खरीद कम करता जा रहा है। चीन के स्वतंत्र रिफाइनर भारी छूट वाले रूसी तेल के कार्गो की खरीद बढ़ा रहे हैं। फरवरी में चीन को रूसी तेल का शिपमेंट लगभग 20.
7 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुंचने का अनुमान है। वोर्टेक्सा एनालिटिक्स के शुरुआती आकलन से इसका पता चलता है। इसके अनुसार, यह जनवरी के अनुमानित 17 लाख बैरल प्रति दिन से काफी ज्यादा है। केप्लर के अलग-अलग अनंतिम आंकड़ों से पता चलता है कि फरवरी में चीनी आयात लगभग 20.83 लाख बैरल प्रति दिन रहा है। जबकि एक महीने पहले यह 17.18 लाख बैरल प्रति दिन था।यह सबकुछ भारत की ओर से रूसी तेल खरीद कम करने के बीच हुआ है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने व्यापारियों और जहाज-ट्रैकिंग डेटा के हवाले से अपनी रिपोर्ट में यह बात कही। भारत के रूसी तेल आयात में भारी गिरावट केप्लर के आंकड़ों से पता चलता है कि फरवरी में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात घटकर लगभग 11.59 लाख बैरल प्रति दिन होने की संभावना है। इस घटी हुई मांग ने रूसी कच्चे तेल की कीमतों को कम कर दिया है। इसमें चीन को जनवरी और फरवरी में डिलीवरी के लिए कार्गो बेंचमार्क ICE ब्रेंट पर 9 डॉलर से 11 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर कारोबार कर रहे हैं।ये डिस्काउंट हाल के सालों में यूराल्स ग्रेड के लिए देखी गई सबसे भारी छूटों में से है। इसे यूरोपीय बंदरगाहों से भेजा जाता है। आमतौर पर चीन की तुलना में छोटी शिपिंग दूरी के कारण भारत को डायरेक्ट किया जाता था।चीन ने उठाया है मौके का फायदा नवंबर के बाद से चीन रूस के समुद्री कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदार के रूप में भारत से आगे निकल गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेन से जुड़े युद्ध के कारण पश्चिमी प्रतिबंधों और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए नई दिल्ली पर दबाव बना। इसके कारण दिसंबर में भारत की रूसी तेल की खरीद दो साल के निचले स्तर पर पहुंच गई। यूराल्स की सप्लाई, साथ ही सोकोल और वरांडे जैसे अन्य निर्यात ग्रेड रूस के प्रमुख ESPO कॉम्बिनेश की नियमित शिपमेंट में जुड़ गए हैं। इसे सुदूर पूर्व के कोजमिनो बंदरगाह से निर्यात किया जाता है। यह भौगोलिक रूप से चीन के करीब है। इसने ईरान से प्रतिद्वंद्वी कच्चे तेल की सप्लाई के साथ प्रतिस्पर्धा को तेज कर दिया है।ईरान-अमेरिका के बीत तनाव से टेंशन ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर चिंताएं चीन के स्वतंत्र रिफाइनरों को परेशान कर रही हैं। इन्हें आमतौर पर टीपॉट्स के रूप में जाना जाता है। ये रूस, ईरान और वेनेजुएला से अमेरिकी प्रतिबंधों के अधीन तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से हैं। इन रिफाइनरों को सप्लाई करने वाले एक वरिष्ठ चीनी व्यापारी के अनुसार, रूसी कच्चे तेल ने हाल ही में प्रोसेसिंग क्वालिटी के मामले में ईरानी तेल पर प्रतिस्पर्धी बढ़त हासिल की है। व्यापारी ने कहा कि ESPO मिश्रण को मार्च की डिलीवरी के लिए ICE ब्रेंट पर लगभग $8 से $9 प्रति बैरल की छूट पर कारोबार किया गया था, जबकि ईरानी लाइट को उसी बेंचमार्क से लगभग $10 से $11 नीचे आंका गया था।रूसी तेल सप्लाई बन गई है ज्यादा भरोसेमंद वोर्टेक्सा में चीन विश्लेषक एम्मा ली ने कहा कि जनवरी से ईरान पर अमेरिकी हमलों की आशंका को लेकर बाजार की अनिश्चितता ने चीनी टीपॉट्स और व्यापारियों को ईरानी कार्गो खरीदने के बारे में अधिक सतर्क बना दिया है। ऐसा तब हो सकता है अगर परमाणु वार्ता वॉशिंगटन की अपेक्षाओं को पूरा करने में विफल रहती है। उन्होंने समझाया कि सैन्य तनाव की स्थिति में ईरानी तेल लोडिंग में संभावित व्यवधानों की चिंताओं ने रूसी सप्लाई को खरीदारों के लिए अधिक भरोसेमंद बना दिया है। ली ने यह भी संकेत दिया कि रूसी कच्चे तेल की खरीद में हालिया बढ़ोतरी का कुछ हिस्सा शेडोंग के बाहर स्थित बड़े स्वतंत्र रिफाइनरों से आया है, जो टीपॉट रिफाइनरों का मुख्य केंद्र है।वोर्टेक्सा ने अनुमान लगाया कि ईरानी तेल का शिपमेंट इस महीने लगभग 10.3 लाख बैरल प्रति दिन तक गिर गया, जबकि जनवरी में यह लगभग 12.5 लाख बैरल प्रति दिन था। इसे अक्सर अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए व्यापारियों की ओर से मलेशियाई के रूप में लेबल किया जाता है।
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