PM Modi के ‘मन की बात’ के बाद रांची की 100 साल पुरानी ओडिया पांडुलिपि का होगा संरक्षण

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Utkal Divas Odisha Day Today: रांची में उपेक्षित पड़ी ओडिया पांडुलिपियों को केंद्र सरकार की 'ज्ञान भारतम' परियोजना के तहत जीवनदान मिलेगा। संतुलाल पुस्तकालय में ताड़पत्र पर लिखी ये पांडुलिपियां अब संरक्षित और डिजिटाइज की जाएंगी। प्रधानमंत्री मोदी 'मन की बात' में इस पहल का जिक्र कर चुके हैं। Jharkhand Top...

संजय कृष्ण, रांची। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘पांडुलिपि विरासत के माध्यम से भारत की ज्ञान विरासत को पुनः प्राप्त करना’ से रांची में उपेक्षित पड़ी पांडुलिपि को जीवन दान मिल सकता है। रांची के अपर बाजार स्थित संतुलाल पुस्तकालय में ताड़ पत्र पर ओडिया लिपि में लिखी पांडुलिपि है। रख-रखाव के अभाव में खराब हो रही है। इसका संरक्षण आवश्यक है। बुधिया परिवार के गंगा प्रसाद बुधिया ने 1926 में इस पुस्तकालय की स्थापना की थी। यहां प्राचीन पत्र-पत्रिकाएं, पुस्तकें सहित आदि हैं। इनका भी संरक्षण और डिजिटलीकरण आवश्यक है। सरकार इस पांडुलिपि को संरक्षित कर सकती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण व इंदिरा गांधी कला केंद्र को जिम्मेदारी केंद्र सरकार गांव-गांव पांडुलिपियों को एकत्रित कर रही है। इसमें कोई भी व्यक्ति सहयोग कर सकता है। जिसके पास पांडुलिपि है, वह भी ज्ञान भारतम एप के माध्यम से अपलोड कर सकता है। रविवार को मन की बात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चर्चा की। झारखंड के 24 जिलों भी पांडुलिपियों की खोज की जा रही है। संस्कृति मंत्रालय के अधीन यह काम किया जा रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, रांची सर्किल को भी दस जिले दिए गए हैं। इनमें पश्चिमी सिंहभूम, गढ़वा, गिरिडीह, जामताड़ा, कोडरमा, पाकुड़, पलामू, साहेबगंज, सिमडेगा व पूर्वी सिंहभू्म शामिल हैं। बाकी जिले इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, रांची को दिया गया है। कला केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डा कुमार संजय झा ने बताया कि कई जिलों से संपर्क किया जा रहा है। अभी रामगढ़ व लोहरदगा में कुछ पांडुलिपियां देखने को मिली हैं। आप भी कर सकते हैं अपलोड कागज, ताड़पत्र, पत्थर या ताम्र पर लिखे को भी अपलोड करना है। किसी व्यक्ति, संस्था के पास भी हो तो वे खुद भी अपलोड कर सकते हैं या दोनों संस्थाओं से संपर्क कर सकते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, रांची सर्किल के सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद डा नीरज मिश्र ने बताया कि परियोजना से बहुत लाभ होगा। बहुत से लोगों के पास पांडुलिपियां पड़ी हुई हैं। धीरे-धीरे खराब हो सकती हैं। इनकी एक उम्र होती है। इनका डिजिटलीकरण हो जाने से ये सुरक्षित हो जाएंगी और देश-दुनिया के शोधार्थियों के काम आएंगी। डा कुमार संजय झा ने बताया कि हाईकोर्ट संग्रहालय, रांची विवि के पुरातत्व विभाग के संग्रहालय, रामगढ़ में जरीना खातून के संग्रहालय में भी कुछ पांडुलिपियां मिली हैं। हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। लोगों से भी संपर्क किया जा रहा है। मन की बात में पीएम मोदी कर चुके हैं चर्चा बता दें कि संस्कृति मंत्रालय ने ज्ञान भारतम मिशन के तहत ‘पांडुलिपि विरासत के माध्यम से भारत की ज्ञान विरासत को पुनः प्राप्त करना’ है। रविवार को मन की बात में प्रधानमंत्री ने कहा कि ज्ञान भारतम सर्वे, जिसका संबंध हमारी महान संस्कृति और समृद्ध विरासत से है। इसका उद्देश्य देशभर में मौजूद पांडुलिपियों के बारे में जानकारी जमा करना है। इस सर्वे से जुड़ने का एक माध्यम, ज्ञान भारतम ऐप है। आपके पास अगर कोई पांडुलिपि है, या उसके बारे में जानकारी है, तो उसकी फोटो ‘ज्ञान भारतम ऐप’ पर जरूर साझा करें। हर इंट्री से जुड़ी जानकारी को दर्ज करने से पहले उसकी पुष्टि भी की जा रही है। मुझे इस बात की खुशी है कि अब तक हजारों पांडुलिपि लोगों ने शेयर की हैं। यह भी पढ़ें- रांची को मिलने जा रही 6 मंजिला वर्ल्ड क्लास मेगा लाइब्रेरी, 24×7 पढ़ सकेंगे 5000 छात्र यह भी पढ़ें- साल सूरज से इश्‍क लड़ाता तो अर्जुन दर्द पर मरहम; सतपुड़ा भूल जाओगे, कभी आओ तो सारंडा के जंगल.

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