PM Kisan Samman Nidhi : मधुबनी में पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत लाखों किसान फार्मर रजिस्ट्री न होने से परेशान हैं। 3.
प्रदीप मंडल, मधुबनी। कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को फार्मर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य कर दिया गया है। लेकिन फार्मर रजिस्ट्री के नए नियम किसानों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। जिला में 21 जनवरी तक मिशन मोड में अभियान चलाकर सभी पंचायत में विशेष कैंप लगा फार्मर रजिस्ट्री एवं ई-केवाईसी की गई। बावजूद इसके बिहार के मधुबनी जिले में पीएम किसान सम्मान निधि योजना के 3 लाख 21 हजार 514 पंजीकृत किसानों में से अब तक केवल 98,967 किसानों की ही फार्मर रजिस्ट्री पूरी हो सकी है। इस तरह जिले में अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मन निधि योजना के लिए पंजीकृत किसानों में से महज 31 प्रतिशत किसानों को फार्मर रजिस्ट्री करते हुए यूनिक आईडी जारी किया गया है। संयुक्त जमाबंदी बन रही समस्या जिले में संयुक्त जमाबंदी के कारण बड़ी संख्या में किसान निबंधन नहीं करा पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि निबंधन के लिए अंचल कार्यालय के लगातार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। दरअसल, अब एलपीसी, किसान सम्मान निधि, केसीसी और विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसान निबंधन अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में निबंधन नहीं होने से किसान सरकारी योजनाओं से वंचित होने का खतरा महसूस कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि संयुक्त जमाबंदी को अलग कराने की प्रक्रिया काफी जटिल है। इसके लिए अमीन और अन्य कर्मियों द्वारा अधिक पैसे की मांग की जाती है। कई मामलों में घूस मांगे जाने का भी आरोप लगाया जा रहा है। पैसा नहीं देने पर फाइल को बहाने बनाकर टाल दिया जाता है, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ जाती है। इसके अलावा, अधिकांश किसानों की जमीन की जमाबंदी आज भी उनके मृत पिता या दादा के नाम से दर्ज है, जबकि कई मामलों में नाम की त्रुटियां भी हैं। इन कारणों से किसान निबंधन नहीं हो पा रहा है। पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किस्त से पहले ई-केवाईसी जरूरी पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किस्त से पहले ई-केवाईसी कराना अनिवार्य है। इसके लिए विभाग ने दो विकल्प उपलब्ध कराए हैं। पहले विकल्प में आधार नंबर से ओटीपी के माध्यम से ई-केवाईसी की जा रही है, जबकि दूसरे विकल्प में फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा दी गई है। हालांकि दोनों ही प्रक्रियाओं में तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। कई किसानों ने शिकायत की है कि आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी नहीं पहुंच रहा है। वहीं सर्वर स्लो रहने के कारण भी ई-केवाईसी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। विभागीय कर्मियों ने बताया कि किसान सलाहकारों को अपने लॉगिन से किसानों की ई-केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्री पूरी करनी है, ताकि आने वाले दिनों में किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किस्त मिल सके। 2,71666 किसानों का ई-केवाईसी पूरा: जिले के 2,71666 पंजीकृत किसानों का ई-केवाईसी पूरा कर लिया गया है। जबकि फॉर्मर रजिस्ट्री महज 98,967 किसानों का ही किया जा सका है। विभागीय कर्मियों का कहना है कि एफआर प्रक्रिया में सबसे अधिक परेशानी आ रही है। इसके लिए संबंधित किसान के नाम से जमीन का अद्यतन और स्पष्ट कागजात होना अनिवार्य है। कई किसानों के पास संयुक्त या पारिवारिक नाम से दर्ज भूमि है, जबकि कई मामलों में जमीन के दस्तावेज अपडेट नहीं हैं। प्रखंड: कुल पंजीकृत किसान - फार्मर रजिस्ट्री की संख्या अंधराठाढ़ी: 12,137 - 4,171 बाबूबरही: 27,156 - 4,944 बासोपट्टी: 11,479 - 3,833 बेनीपट्टी: 26,101 - 5,544 बिस्फी: 17,917 - 5,680 घोघरडीहा: 25,598 - 4,318 हरलाखी: 21,855 - 4,171 जयनगर: 10,813 - 3,158 झंझारपुर: 9,928 - 4,634 कलुआही: 6,739 - 3,419 खजौली: 8,877 - 3,694 लदनियां: 19,426 - 4,555 लखनौर: 11,496 - 3,601 खुटौना: 22,286 - 4,322 लौकही: 12,515 - 6,945 मधेपुर: 20,997 - 5,258 मधवापुर: 6,949 - 3,317 पंडौल: 12,011 - 7,764 फुलपरास: 15,674 - 5,085 रहिका: 8,120 - 4,037 राजनगर : 11,953 - 5,369 क्या कहते हैं पदाधिकारी : प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के 2,71666 लाभुक किसानों का ई-केवाईसी हो चुका है। जबकि इस दौरान अब तक 98,967 किसानों का फॉर्मर रजिस्ट्री करते हुए यूनिक आईडी कोड तैयार किया जा चुका है। पंजीकृत सभी किसानों को ई-केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्री करवाना होगा। जिनका एक केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्री नहीं होगा उन्हें सरकार के द्वारा दी जाने वाली विभिन्न कृषि योजनाओं से वंचित रहना पड़ सकता है। आनंद शर्मा, जिलाधिकारी आनंद शर्मा.
प्रदीप मंडल, मधुबनी। कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को फार्मर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य कर दिया गया है। लेकिन फार्मर रजिस्ट्री के नए नियम किसानों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। जिला में 21 जनवरी तक मिशन मोड में अभियान चलाकर सभी पंचायत में विशेष कैंप लगा फार्मर रजिस्ट्री एवं ई-केवाईसी की गई। बावजूद इसके बिहार के मधुबनी जिले में पीएम किसान सम्मान निधि योजना के 3 लाख 21 हजार 514 पंजीकृत किसानों में से अब तक केवल 98,967 किसानों की ही फार्मर रजिस्ट्री पूरी हो सकी है। इस तरह जिले में अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मन निधि योजना के लिए पंजीकृत किसानों में से महज 31 प्रतिशत किसानों को फार्मर रजिस्ट्री करते हुए यूनिक आईडी जारी किया गया है। संयुक्त जमाबंदी बन रही समस्या जिले में संयुक्त जमाबंदी के कारण बड़ी संख्या में किसान निबंधन नहीं करा पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि निबंधन के लिए अंचल कार्यालय के लगातार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। दरअसल, अब एलपीसी, किसान सम्मान निधि, केसीसी और विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसान निबंधन अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में निबंधन नहीं होने से किसान सरकारी योजनाओं से वंचित होने का खतरा महसूस कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि संयुक्त जमाबंदी को अलग कराने की प्रक्रिया काफी जटिल है। इसके लिए अमीन और अन्य कर्मियों द्वारा अधिक पैसे की मांग की जाती है। कई मामलों में घूस मांगे जाने का भी आरोप लगाया जा रहा है। पैसा नहीं देने पर फाइल को बहाने बनाकर टाल दिया जाता है, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ जाती है। इसके अलावा, अधिकांश किसानों की जमीन की जमाबंदी आज भी उनके मृत पिता या दादा के नाम से दर्ज है, जबकि कई मामलों में नाम की त्रुटियां भी हैं। इन कारणों से किसान निबंधन नहीं हो पा रहा है। पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किस्त से पहले ई-केवाईसी जरूरी पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किस्त से पहले ई-केवाईसी कराना अनिवार्य है। इसके लिए विभाग ने दो विकल्प उपलब्ध कराए हैं। पहले विकल्प में आधार नंबर से ओटीपी के माध्यम से ई-केवाईसी की जा रही है, जबकि दूसरे विकल्प में फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा दी गई है। हालांकि दोनों ही प्रक्रियाओं में तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। कई किसानों ने शिकायत की है कि आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी नहीं पहुंच रहा है। वहीं सर्वर स्लो रहने के कारण भी ई-केवाईसी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। विभागीय कर्मियों ने बताया कि किसान सलाहकारों को अपने लॉगिन से किसानों की ई-केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्री पूरी करनी है, ताकि आने वाले दिनों में किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किस्त मिल सके। 2,71666 किसानों का ई-केवाईसी पूरा: जिले के 2,71666 पंजीकृत किसानों का ई-केवाईसी पूरा कर लिया गया है। जबकि फॉर्मर रजिस्ट्री महज 98,967 किसानों का ही किया जा सका है। विभागीय कर्मियों का कहना है कि एफआर प्रक्रिया में सबसे अधिक परेशानी आ रही है। इसके लिए संबंधित किसान के नाम से जमीन का अद्यतन और स्पष्ट कागजात होना अनिवार्य है। कई किसानों के पास संयुक्त या पारिवारिक नाम से दर्ज भूमि है, जबकि कई मामलों में जमीन के दस्तावेज अपडेट नहीं हैं। प्रखंड: कुल पंजीकृत किसान - फार्मर रजिस्ट्री की संख्या अंधराठाढ़ी: 12,137 - 4,171 बाबूबरही: 27,156 - 4,944 बासोपट्टी: 11,479 - 3,833 बेनीपट्टी: 26,101 - 5,544 बिस्फी: 17,917 - 5,680 घोघरडीहा: 25,598 - 4,318 हरलाखी: 21,855 - 4,171 जयनगर: 10,813 - 3,158 झंझारपुर: 9,928 - 4,634 कलुआही: 6,739 - 3,419 खजौली: 8,877 - 3,694 लदनियां: 19,426 - 4,555 लखनौर: 11,496 - 3,601 खुटौना: 22,286 - 4,322 लौकही: 12,515 - 6,945 मधेपुर: 20,997 - 5,258 मधवापुर: 6,949 - 3,317 पंडौल: 12,011 - 7,764 फुलपरास: 15,674 - 5,085 रहिका: 8,120 - 4,037 राजनगर : 11,953 - 5,369 क्या कहते हैं पदाधिकारी : प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के 2,71666 लाभुक किसानों का ई-केवाईसी हो चुका है। जबकि इस दौरान अब तक 98,967 किसानों का फॉर्मर रजिस्ट्री करते हुए यूनिक आईडी कोड तैयार किया जा चुका है। पंजीकृत सभी किसानों को ई-केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्री करवाना होगा। जिनका एक केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्री नहीं होगा उन्हें सरकार के द्वारा दी जाने वाली विभिन्न कृषि योजनाओं से वंचित रहना पड़ सकता है। आनंद शर्मा, जिलाधिकारी आनंद शर्मा
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