वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह में 24 मई Pradosh Vrat 2025 Date को प्रदोष व्रत किया जाएगा। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत करने से सभी तरह के डर से छुटकारा मिलता है। साथ ही जीवन में शुभ परिणाम मिलते हैं। आइए जानते हैं कैसे करें महादेव को...
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती को प्रसन्न करने के लिए शुभ माना जाता है। प्रदोष व्रत की पूजा के समय शिव मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए। पूजा के बाद अन्न, धन और वस्त्र का दान जरूर करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन शिव मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ करने से महादेव प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा साधक पर बनी रहती है। जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। ॥ शिव मृत्युंजय स्तोत्र॥ रत्नसानुशरासनं रजताद्रिश्रृंगनिकेतनं शिञ्जिनीकृतपन्नगेश्वरमच्युतानलसायकम्। क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदशालयैरभिवंदितं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥ पंचपादपपुष्पगन्धिपदाम्बुजद्वयशोभितं भाललोचनजातपावकदग्धमन्मथविग्रहम्। भस्मदिग्धकलेवरं भवनाशिनं भवमव्ययं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥ मत्तवारणमुख्यचर्मकृतोत्तरीयमनोहरं पंकजासनपद्मलोचनपूजितांगघ्रिसरोरुहम्। देवसिद्धतरंगिणी करसिक्तशीतजटाधरं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥ कुण्डलीकृतकुण्डलीश्वरकुण्डलं वृषवाहनं नारदादिमुनीश्वरस्तुतवैभवं भुवनेश्वरम्। अंधकान्तकमाश्रितामरपादपं शमनान्तकं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥ यक्षराजसखं भगाक्षिहरं भुजंगविभूषणं यह भी पढ़ें: Pradosh Vrat 2025 : प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की इस तरह करें कृपा प्राप्त, सभी संकट होंगे दूर शैलराजसुतापरिष्कृतचारुवामकलेवरम्। क्ष्वेडनीलगलं परश्वधधारिणं मृगधारिणं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥ भेषजं भवरोगिणामखिलापदामपहारिणं दक्षयज्ञविनाशिनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम्। भुक्तिमुक्तिफलप्रदं निखिलाघसंघनिबर्हणं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥ भक्तवत्सलमर्चतां निधिमक्षयं हरिदम्बरं सर्वभूतपतिं परात्परमप्रमेयमनूपमम्। भूमिवारिनभोहुताशनसोमपालितस्वाकृतिं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥ विश्वसृष्टिविधायिनं पुनरेव पालनतत्परं संहरन्तमथ प्रपंचमशेषलोकनिवासिनम्। क्रीडयन्तमहर्निशं गणनाथयूथसमाव्रतं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥ रुद्रं पशुपतिं स्थाणुं नीलकण्ठमुमापतिम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥ कालकण्ठं कलामूर्तिं कालाग्निं कालनाशनम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥ नीलकण्ठं विरुपाक्षं निर्मलं निरूपद्रवम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥ वामदेवं महादेवं लोकनाथं जगद्गुरुम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥ देवदेवं जगन्नाथं देवेशमृषभध्वजम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥ अनन्तमव्ययं शान्तमक्षमालाधरं हरम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥ आनन्दं परमं नित्यं कैवल्यपदकारणम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥ स्वर्गापवर्गदातारं सृष्टिस्थित्यन्तकारिणम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥ ॥ इति श्रीपद्मपुराणान्तर्गत उत्तरखण्डे श्रीमृत्युञ्जयस्तोत्रं सम्पूर्णम्। ॥ यह भी पढ़ें: Pradosh Vrat 2025 : शनि प्रदोष व्रत के दिन जरूर करें ये काम, शिव जी के साथ मिलेगी शनिदेव की कृपा अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।.
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती को प्रसन्न करने के लिए शुभ माना जाता है। प्रदोष व्रत की पूजा के समय शिव मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए। पूजा के बाद अन्न, धन और वस्त्र का दान जरूर करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन शिव मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ करने से महादेव प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा साधक पर बनी रहती है। जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। ॥ शिव मृत्युंजय स्तोत्र॥ रत्नसानुशरासनं रजताद्रिश्रृंगनिकेतनं शिञ्जिनीकृतपन्नगेश्वरमच्युतानलसायकम्। क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदशालयैरभिवंदितं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥ पंचपादपपुष्पगन्धिपदाम्बुजद्वयशोभितं भाललोचनजातपावकदग्धमन्मथविग्रहम्। भस्मदिग्धकलेवरं भवनाशिनं भवमव्ययं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥ मत्तवारणमुख्यचर्मकृतोत्तरीयमनोहरं पंकजासनपद्मलोचनपूजितांगघ्रिसरोरुहम्। देवसिद्धतरंगिणी करसिक्तशीतजटाधरं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥ कुण्डलीकृतकुण्डलीश्वरकुण्डलं वृषवाहनं नारदादिमुनीश्वरस्तुतवैभवं भुवनेश्वरम्। अंधकान्तकमाश्रितामरपादपं शमनान्तकं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥ यक्षराजसखं भगाक्षिहरं भुजंगविभूषणं यह भी पढ़ें: Pradosh Vrat 2025: प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की इस तरह करें कृपा प्राप्त, सभी संकट होंगे दूर शैलराजसुतापरिष्कृतचारुवामकलेवरम्। क्ष्वेडनीलगलं परश्वधधारिणं मृगधारिणं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥ भेषजं भवरोगिणामखिलापदामपहारिणं दक्षयज्ञविनाशिनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम्। भुक्तिमुक्तिफलप्रदं निखिलाघसंघनिबर्हणं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥ भक्तवत्सलमर्चतां निधिमक्षयं हरिदम्बरं सर्वभूतपतिं परात्परमप्रमेयमनूपमम्। भूमिवारिनभोहुताशनसोमपालितस्वाकृतिं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥ विश्वसृष्टिविधायिनं पुनरेव पालनतत्परं संहरन्तमथ प्रपंचमशेषलोकनिवासिनम्। क्रीडयन्तमहर्निशं गणनाथयूथसमाव्रतं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥ रुद्रं पशुपतिं स्थाणुं नीलकण्ठमुमापतिम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥ कालकण्ठं कलामूर्तिं कालाग्निं कालनाशनम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥ नीलकण्ठं विरुपाक्षं निर्मलं निरूपद्रवम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥ वामदेवं महादेवं लोकनाथं जगद्गुरुम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥ देवदेवं जगन्नाथं देवेशमृषभध्वजम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥ अनन्तमव्ययं शान्तमक्षमालाधरं हरम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥ आनन्दं परमं नित्यं कैवल्यपदकारणम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥ स्वर्गापवर्गदातारं सृष्टिस्थित्यन्तकारिणम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥ ॥ इति श्रीपद्मपुराणान्तर्गत उत्तरखण्डे श्रीमृत्युञ्जयस्तोत्रं सम्पूर्णम्। ॥ यह भी पढ़ें: Pradosh Vrat 2025: शनि प्रदोष व्रत के दिन जरूर करें ये काम, शिव जी के साथ मिलेगी शनिदेव की कृपा अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
Kab Hai Pradosh Vrat 2025 Shiv Mrityunjaya Stotram Lyrics Pradosh Vrat 2025 Date
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Pradosh Vrat 2025: प्रदोष व्रत पर जरूर करें इस चमत्कारी कथा का पाठ, जीवन में बनी रहेगी सुख-शांतिप्रदोष व्रत बहुत मंगलकारी माना जाता है। इस दिन साधक भगवान शिव की उपासना करते हैं। इस दिन भोलेनाथ की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार प्रदोष व्रत Pradosh Vrat 2025 25 अप्रैल यानी आज के दिन रखा जा रहा है। वहीं इस दिन प्रदोष व्रत कथा का पाठ भी जरूर करना चाहिए जो इस प्रकार...
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Pradosh Vrat 2025: प्रदोष व्रत की पूजा में करें इस स्तोत्र का पाठ, जल्द मिलेगा लाभइस बार वैशाख माह का दूसरा प्रदोष व्रत शुक्रवार 9 मई को किया जा रहा है। शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत shukra Pradosh Vrat 2025 भी कहा जाएगा। इस दिन पर पूजा का मुहूर्त शाम 7 बजकर 1 मिनट से रात 9 बजकर 8 मिनट तक रहने वाला है।
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Shukra Pradosh Vrat पर पर करें इस स्तोत्र का पाठ, सुख-समृद्धि से भरा रहेगा जीवनवैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 9 मई को दोपहर 2 बजकर 56 मिनट से होगी और अगले दिन यानी 10 मई को शाम को 5 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि के अनुसार यह व्रत 9 मई को रखा जाएगा.
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Pradosh vrat daan : प्रदोष व्रत के दिन इन चीजों का दान करने से पुण्य फल की होगी प्राप्ति, जानिए यहांआज के इस लेख में हम आपको प्रदोष व्रत (Pradosh vrat 2025 date) के दिन किन चीजों का दान कर सकते हैं, इसकी लिस्ट साझा कर रहे हैं...
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