Potato Farming: इस तकनीक से करें आलू की खेती, कम मेहनत में होगी तगड़ी कमाई

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Shahjahanpur Potato Farming: यूपी में सितंबर का महीना आलू की फसल के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. ऐसे में इस समय आलू की खेती कर तगड़ी कमाई कर सकते हैं. साथ ही किसान आलू के उत्पादन को बढ़ाने के लिए मिनी मिनी स्प्रिंकलर से सिंचाई कर बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं.

शाहजहांपुर: सितंबर का महीना आलू की फसल की बुवाई के लिए बेहद ही उपयुक्त होता है. ऐसे में यूपी के शाहजहांपुर जिले के बड़े क्षेत्रफल में किसान आलू की फसल उगाते हैं. इस फसल से बहुत कम दिनों में किसानों को अच्छा मुनाफा मिल जाता है.

वहीं, किसान अगर फसल की बुवाई के दौरान कुछ सावधानियां रख लें, तो किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाला आलू और बंपर उत्पादन मिल जाएगा. इसके अलावा किसानों को इसकी सिंचाई का विशेष ख्याल रखना चाहिए. किसान आलू की फसल में मिनी स्प्रिंकलर से सिंचाई कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. जिला उद्यान अधिकारी ने दी जानकारी वहीं, जिला उद्यान अधिकारी पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि शाहजहांपुर जिले में आलू मुख्य फसलों में से एक है. जिले में 15,000 हेक्टेयर में आलू की फसल उगाई जाती है. यहां करीब 5.5 लाख टन का आलू उत्पादन होता है. जिले में 2.5 टन आलू भंडारण की क्षमता है. किसान अगर आलू की बुवाई के समय कुछ सावधानी बरत लें तो किसानों को अच्छी गुणवत्ता का उपज मिलेगी. जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि किसान 300 से 350 टन आलू का उत्पादन आसानी ले सकते हैं. खासकर किसान आलू की फसल की बुवाई करते समय बीज को उपचारित करें और सिंचाई का विशेष तौर पर ध्यान रखें. ऐसा करने से किसानों को चमकदार और बड़े आकार का आलू मिलेगा. मिनी स्प्रिंकलर से करें आलू कि सिंचाई आलू की फसल से अच्छा उत्पादन लेने के लिए सिंचाई का भी विशेष ध्यान रखने की जरूरत है. किसान पारंपरिक तरीके से सिंचाई करने की बजाय मिनी स्प्रिंकलर से सिंचाई करें. ऐसा करने से जल संरक्षण होगा. उसके अलावा आलू की फसल में अगेती झुलसा रोग और पछेती झुलसा रोग से भी बचाव हो जाएगा. इतना ही नहीं मिनी स्प्रिंकलर से सिंचाई करने से आलू का साइज बड़ा होगा, खुदाई के समय मिट्टी नहीं चिपकेगी. इससे आलू के पौधों की पत्तियों पर जमी हुई धूल साफ हो जाती है, जिसकी वजह से पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बेहतर तरीके से होती है. अच्छी गुणवत्ता वाला आलू पैदा होगा. आलू में मिट्टी नहीं चिपकती, जिसकी वजह से बाजार में अच्छा भाव मिलेगा. खास बात यह है कि मिनी स्प्रिंकलर से सिंचाई करने से 15 से 20% तक उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी. सरकार मिनी स्प्रिंकलर लगाने के लिए किसानों को 80 से 90% तक अनुदान भी दे रही है. बीज शोधन बेहद जरूरी खेत तैयार करने के बाद किसान बीज शोधन जरूर कर लें, बीज शोधन करने से फंगस रोग से बचाव हो सकता है. बीज शोधन करने के लिए किसान 0.02 ग्राम मैंकोजेब को प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर आलू के कटे हुए या साबुत आलू को 10 मिनट तक भिगो दें. उसके बाद छाया के नीचे सुखा लें, बीज शोध के बाद आलू को खेत में बोया जा सकता है. कितनी मात्रा में दें उर्वरक फसल से अच्छा उत्पादन लेने के लिए उर्वरकों का भी महत्वपूर्ण रोल रहता है. किसान आलू की फसल की बुवाई करते समय 100 से 150 किलोग्राम नाइट्रोजन, 45 से 60 किलोग्राम फास्फोरस और 100 किलोग्राम पोटेशियम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से खेत में डालें. ध्यान रखें की आधी मात्रा बेसल डोज में और शेष आधी मात्रा बुवाई के 25 से 27 दिन के बाद दे दें. खरपतवारों का नियंत्रण कैसे करें आलू की फसल में खरपतवार भी एक बड़ी समस्या है. आलू की फसल की बुवाई के तुरंत बाद पेंडीमेथिलीन नाम का रासायनिक खरपतवार का इस्तेमाल करें. किसान 500 ml से 1 लीटर दवा का घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं. जिससे खेत में खरपतवार नहीं उगेंगे.

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