Ajit Doval News: भारत के NSA अजीत डोभाल ने खुलासा किया है कि वे मोबाइल फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते. यह कोई आदत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी उनकी रणनीति है. IB और फील्ड एक्सपीरियंस ने उन्हें सिखाया कि डिजिटल ट्रेस सबसे बड़ा खतरा हो सकता है. आइए जानते हैं इस बारे में डिटेल में.
नई दिल्ली: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को यूं ही सुपर स्पाई नहीं कहा जाता. दशकों तक खुफिया दुनिया में रहकर काम करने वाले डोभाल की पहचान हमेशा एक ऐसे अधिकारी की रही है, जो कम बोलते हैं लेकिन हर कदम बेहद सोच-समझकर उठाते हैं.
अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने उनकी इसी सोच की झलक फिर से दिखा दी है. न्यूज एजेंसी ANI ने इस वीडियो शेयर किया है. वीडियो में वे खुद स्वीकार करते हैं कि वे मोबाइल फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते. डिजिटल दौर में, जहां हर व्यक्ति की जिंदगी स्मार्टफोन और इंटरनेट के इर्द-गिर्द घूमती है, वहां देश के सबसे ताकतवर सुरक्षा पद पर बैठे व्यक्ति का यह कहना चौंकाता है. यही वजह है कि यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. डोभाल का यह खुलासा सिर्फ उनकी निजी आदत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी उस सोच को सामने लाता है, जो आज के समय में बेहद अहम मानी जाती है. View this post on Instagram A post shared by Asian News International पढ़ें- ‘मंदिरों को लूटा गया, हम असहाय रहे’, NSA अजित डोभाल बोले- बदला लेना होगा…युवाओं में आग होनी चाहिए क्या है वायरल वीडियो का मामला? वायरल वीडियो में अजीत डोभाल खुद कहते हैं कि वे इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते और मोबाइल फोन भी लगभग नहीं रखते. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, ‘ये पता नहीं आपको ये कहां से मालूम चला… लेकिन ये बात सही है कि मैं इंटरनेट का प्रयोग नहीं करता. फोन का भी प्रयोग नहीं करता.’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बहुत जरूरी पारिवारिक या निजी बातों के लिए कभी-कभार फोन का इस्तेमाल करना पड़ता है, लेकिन कुल मिलाकर वे डिजिटल दुनिया से दूरी बनाए रखते हैं. अजीत डोभाल जैसे लोग भारत की सुरक्षा की रीढ़ हैं. क्यों नहीं रखते NSA अजीत डोभाल मोबाइल फोन? डोभाल का फोन न रखना किसी तरह का दिखावा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सुरक्षा नीति है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पास आतंकवाद, गुप्त ऑपरेशंस, रणनीतिक फैसलों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से जुड़ी बेहद संवेदनशील जानकारियां होती हैं. आज के दौर में मोबाइल फोन हैक हो सकता है, लोकेशन ट्रैक हो सकती है और बातचीत इंटरसेप्ट की जा सकती है. ऐसे में जरा-सी लापरवाही भी देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है. डोभाल की सोच है कि जब खतरे से बचा जा सकता है, तो जोखिम क्यों लिया जाए. IB और फील्ड एक्सपीरियंस से निकला फैसला अजीत डोभाल का पूरा करियर खुफिया एजेंसी IB से जुड़ा रहा है. पाकिस्तान में अंडरकवर ऑपरेशन और फील्ड में काम करने के अनुभव ने उन्हें सिखाया कि दुश्मन सबसे पहले डिजिटल ट्रेस का पीछा करता है. डिजिटल फुटप्रिंट जितना कम होगा उतना ही किसी व्यक्ति को ट्रैक करना मुश्किल होगा. यही वजह है कि डोभाल ने फोन और इंटरनेट से दूरी बना ली. फोन के बिना कैसे करते हैं कम्युनिकेशन? डोभाल की कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी पूरी तरह ऑफ-ग्रिड मानी जाती है. वे आधुनिक तकनीक से दूर रहते हुए भी प्रभावी तरीके से काम करते हैं. आमने-सामने की मीटिंग्स. सरकार की विशेष सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड लाइन्स. ट्रस्टेड मैसेंजर और फिजिकल कूरियर. इंटरनेट से कटे ऑफलाइन कंप्यूटर. निजी बातचीत के लिए न्यूनतम फोन इस्तेमाल. ये सभी तरीके पुराने स्पाई-क्राफ्ट पर आधारित हैं, जहां कोई डिजिटल सबूत नहीं छूटता. अजीत डोभाल का पूरा करियर खुफिया एजेंसी IB से जुड़ा रहा है. वीडियो में डोभाल का अहम बयान डोभाल ने वीडियो में यह भी कहा कि ‘कई ऐसे साधन भी जुटाने पड़ते हैं जो लोगों को मालूम नहीं होते.’ इस एक लाइन से साफ होता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कई वैकल्पिक और गुप्त सिस्टम मौजूद हैं. इनके बारे में आम नागरिक जान भी नहीं सकते. इस नीति से क्या फायदा हुआ? डोभाल की इस आदत ने उन्हें दुश्मनों के लिए लगभग अनट्रैकेबल बना दिया. सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट जैसे ऑपरेशंस में बेहद सीमित लोगों को ही जानकारी थी. इससे लीक का खतरा लगभग खत्म हो गया. डिजिटल दूरी ने गोपनीयता को मजबूत किया. इससे आम लोगों को क्या सीख मिलती है? डिजिटल दुनिया जितनी सुविधाजनक है, उतनी ही जोखिम भरी भी. हर जरूरी जानकारी फोन में रखना खतरनाक हो सकता है. प्राइवेसी और सिक्योरिटी पर समझौता नहीं करना चाहिए. जरूरत से ज्यादा डिजिटल निर्भरता नुकसानदेह है. अजीत डोभाल जैसे लोग भारत की सुरक्षा की रीढ़ हैं. उनका यह खुलासा सिर्फ वायरल कंटेंट नहीं, बल्कि यह याद दिलाता है कि असली सुरक्षा कभी-कभी डिजिटल दुनिया से दूरी बनाने में ही छिपी होती है.
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