संदीप शास्त्री ने कहा कि बीजेपी का आंकड़ा 304 से ऊपर रहता है या नीचे जाता है यह 2 राज्य तय करेंगे वो दोनों राज्य हैं महाराष्ट्र और बंगाल.
नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव के लिए 6 चरण के मतदान हो चुके हैं. देश के कई राज्यों में सभी सीटों पर वोट डाले जा चुके हैं. अंतिम चरण के लिए 1 जून को वोट डाले जाएंगे. देश में जनता किन मुद्दों पर इस चुनाव में वोट कर रही है इसे जानने के लिए NDTV खास शो 'बैटलग्राउंड' लेकर आया था.
हमारे शो की शुरुआत महाराष्ट्र से हुई थी. कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के बाद हम दिल्ली पहुंचे जहां यह 'बैटलग्राउंड' का दूसरा शो है. Advertisement इस शो के माध्यम से एनडीटीवी ने जानना चाहा है कि 2024 के इस ऐतिहासिक चुनाव का परिणाम कैसा होगा. क्या इसका परिणाम ऐतिहासिक होगा, रूटीन होगा या बदलाव वाला होगा. इस कार्यक्रम में पॉलिटिकल एनालिस्ट नीरजा चौधरी, CSDS लोकनीति से संजय कुमार और संदीप शास्त्री और राजनीतिक विश्लेशक अमिताभ तिवारी ने हिस्सा लिया. 2024 के चुनाव को डिकोड करना बेहद मुश्किल: नीरजा चौधरी नीरजा चौधरी ने कहा कि इस चुनाव को डिकोड करना बहुत ही मुश्किल है. उन्होंने कहा कि इसबार का चुनाव बहुत ही कंप्लेक्स है. एक स्तर पर मोदी लहर नहीं दिख रहा है जैसा कि 2014 और 2019 के चुनावों में दिखता था. लेकिन दूसरी तरफ सरकार के खिलाफ भी कोई लहर नहीं दिख रहा है. बहुत लोग सरकार से असंतोष जता रहे हैं. लेकिन सरकार के खिलाफ कोई आक्रोश नहीं है. स्थानीय मुद्दों पर जहां चुनाव हो रहे हैं वहां अच्छी लड़ाई हो रही है. उत्तर भारत के जिन राज्यों में माना जा रहा था कि बीजेपी को 2019 की सफलता मिलेगी ऐसी बात नहीं दिख रही है. राजस्थान में 10 सीटों पर टक्कर दिख रही है. दिल्ली में 2-3 सीटों पर टक्कर दिख रही है. हरियाणा में 10 में से 5 सीटों पर टक्कर देखने को मिल रही है. नीरजा चौधरी ने कहा कि पिछले चुनाव में जिस तरह से सफाया दिख रहा था विपक्ष का वो इस चुनाव में नहीं है. इस बार टक्कर देखने को मिल रही है. हालांकि उन्होंने कहा कि मैं ये नहीं कह सकती कि टक्कर ऐसा नहीं है कि जिसे विक्ट्री माना जाए. बीजेपी के बन रहे हैं कई नए किले: प्रोफेसर संजय कुमार CSDS के प्रोफेसर संजय कुमार ने कहा कि क्रिकेट में कई बार देखने को मिलता है कि शुरुआती बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन नहीं करते हैं. वहीं बाद के बल्लेबाज काफी अच्छा प्रदर्शन करते हैं. कुछ ऐसे राज्य हैं जहां 2014 और 2019 में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया था लेकिन इस बार के चुनाव में बीजेपी प्रदर्शन खराब दिख रहा है. लेकिन कुछ नए किले बीजेपी इस चुनाव में भेद रही है. छठे और सांतवे नंबर के बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. कुछ नए राज्यों में बीजेपी मजबूत हो रही है. यही कारण है कि देश भर में कोई लहर नहीं दिख रहा है. लोकनीति के संदीप शास्त्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर लहर नहीं दिख रही है. लेकिन राज्यों में जाएंगे तो छोटी-छोटी लहरे दिख रही है. हवा दिख रहा है. कई जगहों पर हवा तेज है कई जगहों पर हवा धीमा है. मुझे लगता है कि हर एक राज्यो में कुछ अलग नतीजा आएगा. हमें राज्यों में ध्यान देना होगा. काफी लंबी चुनाव प्रक्रिया के कारण राजनीतिक दलों में एक थकावट दिख रही है इस बार. पहले और अंतिम चरण के बीच 6 हफ्ते का फासला है क्या यह एक जैसा ही परिणाम दिखाएगा. लहर चुनाव के बाद पता चलता है: अमिताभ तिवारी अमिताभ तिवारी ने कहा कि मतदान एक भावनात्मक फैसला होता है. सरकार को लेकर आसंतोष है लेकिन आक्रोश नहीं है. असंतोष को आक्रोश में बदलने के लिए एक मूवमेंट की जरूरत होती है. जब ग्राउंड पर जाते हैं तो दिसंबर में तीन चुनाव हुए थे विधानसभा के. कहा जा रहा था कि कांटे की टक्कर हो रही है. रिजल्ट एकतरफा देखने को मिला था. 2019 को लेकर अब हम कहते हैं कि लहर वाला चुनाव था लेकिन कोई एग्जिट पोल 275 से अधिक सीट नहीं दिखा रहा था. लहर जो होता है वो चुनाव के बाद दिखता है. चुनाव के बीच में नहीं दिखता है. चुनाव की शुरुआत ही हुई है कि बीजेपी को 400 सीट नहीं लाना देना है. महाराष्ट्र जैसे राज्य में वोटिंग टर्नआउट में लोगों में उत्साह नहीं देखने को मिला. वोटर्स के पास विपक्ष में कोई नेता नहीं है. चुनाव एक ही पार्टी लड़ रही है. विपक्ष आज भी बीजेपी को 272 से नीचे रोकने के लिए मेहनत करती दिख रही है. विपक्ष जीतने के लिए चुनाव नहीं लड़ रहा है. नीरजा चौधरी ने बताया कि उत्तर के राज्यों में बीजेपी की सीटें कम होगी. कर्नाटक में बीजेपी की सीटें कम होगी. भरपाई अगर देखें तो उत्तर प्रदेश में बीजेपी को होते हुए नहीं दिख रही है. तेलंगाना में बीजेपी को फायदा होगा. ओडिशा में बीजेपी को फायदा हो सकता है. बंगाल में 2 तरह की बात सामने आ रही है. कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि बीजेपी बहुमत के करीब रहेगा. बीजेपी को नुकसान हो रहा है लेकिन कितना?- प्रोफेसर संजय कुमार प्रोफेसर संजय कुमार ने कहा कि 2019 के चुनाव में बीजेपी ने 224 सीटों पर 50 प्रतिशत से अधिक वोट प्राप्त किया था. ये जो कुछ भी बदलाव की चर्चा हो रही है कि बीजेपी को नुकसान हो रहा है. लेकिन कुछ ऐसे राज्य हैं जहां बीजेपी का वोट शेयर काफी अधिक था. इस बात की संभावना बनी रहेगी की वोट शेयर में नुकसान के बाद भी बीजेपी का आंकड़ा क्या रहेगा. चर्चा इस बात की नहीं हो रही है कि बीजेपी चुनाव हार रही है या नहीं हार रही है. चर्चा बस इस बात की हो रही है कि बीजेपी को 272 से पहले रोका जाएगा या नहीं. आज चर्चा हो रही है कि 370 तो नहीं लेकिन 300 के आसपास तो आएगा. नुकसान हो भी रहा है तो वो कितना हो रहा है ये अहम है. बीजेपी का आंकड़ा 304 से ऊपर रहता है या नीचे जाता है यह 2 राज्य तय करेंगे वो दोनों राज्य हैं महाराष्ट्र और बंगाल. महाराष्ट्र में बीजेपी को गठबंधन की सहयोगियों से समस्या है. पश्चिम बंगाल में बीजेपी भी बेहद अहम है इन 22 राज्यों के नतीजे ही तय करेंगे. मेरे हिसाब से उत्तर प्रदेश में बहुत अधिक बदलाव नहीं होता है. नीरजा चौधरी ने बताया कि बीजेपी की ताकत है नेतृत्व और संगठन वहीं उन्होंने कहा कि हालांकि अगर विपक्ष की तरफ से मल्लिकार्जुन खरगे को पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर उतारा जाता तो हालात कुछ और हो सकते थे. नीरजा चौधरी के तर्क को संदीप शास्त्री ने काउंटर करते हुए कहा कि यह बीजेपी के पक्ष में जा सकता था. विपक्ष और कांग्रेस अगर कहीं चूक रही है तो वो है साझा रणनीति का अभाव और एक साथ चुनाव प्रचार नहीं करना. किन मुद्दे पर हो रहे हैं चुनाव? प्रोफेसर संजय कुमार ने बताया कि जब चुनाव शुरु हुआ था तो बीजेपी चाहती थी कि यह चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर हो. धारा 370, राम मंदिर जैसे मुद्दों पर बीजेपी चुनाव में उतरना चाहती थी. लेकिन शुरुआत वहां से हुई लेकिन विपक्ष की तरफ से महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर अड़ा रहा. संविधान बचाने की लड़ाई जैसी बातें भी विपक्ष की तरफ से होते रहे. बीजेपी पहली बार कांग्रेस के पिच पर खेलती नजर आयी. पहली बार कांग्रेस की तरफ से एजेंडा सेट किया जा रहा था और प्रधानमंत्री उसका काउंटर कर रही थी. चुनाव की शुरुआत किसी मुद्दे से हुई थी और वो ट्रेवल करते हुए कई मील आगे निकल गया. छोटे-छोटे मुद्दे बीजेपी के लिए बैकफायर करता हुआ दिखा. आम लोग अपना और अपने बच्चों का भविष्य देखना चाहते हैं. 2019 के चुनाव में कांग्रेस ने 'न्याय' की घोषणा की थी लेकिन वो बूथ स्तर तक नहीं पहुंच पाया था. पिछले 5 साल में ज्यादातर लोग अब स्मार्ट फोन पर आ गए हैं. जिसकी वजह से अब कांग्रेस पार्टी भी मैसेज पहुंचाने में सफल रही है. लेकिन सोशल मीडिया पर जो आवाज उठ रही है उससे महिलाएं और लाभार्थी दूर हैं. यही वर्ग चुनाव को तय कर रहे हैं. पूरी स्टोरी पढ़ें Comments NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
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