हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना और व्रत करने का विधान है। इस बार ज्येष्ठ माह में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 30 मई Masik Krishna Janmashtami 2024 Date को है। इस दिन पूजा के दौरान कृष्ण चालीसा का पाठ जरूर करना...
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Krishna Chalisa Lyrics: हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस बार ज्येष्ठ माह में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 30 मई को है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि प्रभु की पूजा करने से साधक को जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है। पूजा के दौरान कृष्ण चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए। इससे भगवान श्री कृष्ण प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए पढ़ते हैं कृष्ण चालीसा । यह भी पढ़ें: Buddha Purnima 2024: यहां स्थित है शयन मुद्रा में भगवान बुद्ध की प्रतिमा, जानें इसकी खासियत श्री कृष्ण चालीसा दोहा बंशी शोभित कर मधुर,नील जलद तन श्याम। अरुण अधर जनु बिम्बा फल,पिताम्बर शुभ साज॥ जय मनमोहन मदन छवि,कृष्णचन्द्र महाराज। करहु कृपा हे रवि तनय,राखहु जन की लाज॥ चौपाई जय यदुनंदन जय जगवंदन। जय वसुदेव देवकी नन्दन॥ जय यशुदा सुत नन्द दुलारे। जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥ जय नटनागर, नाग नथइया॥ कृष्ण कन्हइया धेनु चरइया॥ पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो। आओ दीनन कष्ट निवारो॥ वंशी मधुर अधर धरि टेरौ। होवे पूर्ण विनय यह मेरौ॥ आओ हरि पुनि माखन चाखो। आज लाज भारत की राखो॥ गोल कपोल, चिबुक अरुणारे। मृदु मुस्कान मोहिनी डारे॥ राजित राजिव नयन विशाला। मोर मुकुट वैजन्तीमाला॥ कुंडल श्रवण, पीत पट आछे। कटि किंकिणी काछनी काछे॥ नील जलज सुन्दर तनु सोहे। छबि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे॥ मस्तक तिलक, अलक घुँघराले। आओ कृष्ण बांसुरी वाले॥ करि पय पान, पूतनहि तार्यो। अका बका कागासुर मार्यो॥ मधुवन जलत अगिन जब ज्वाला। भै शीतल लखतहिं नंदलाला॥ सुरपति जब ब्रज चढ़्यो रिसाई। मूसर धार वारि वर्षाई॥ लगत लगत व्रज चहन बहायो। गोवर्धन नख धारि बचायो॥ लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई। मुख मंह चौदह भुवन दिखाई॥ दुष्ट कंस अति उधम मचायो॥ कोटि कमल जब फूल मंगायो॥ नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें। चरण चिह्न दै निर्भय कीन्हें॥ करि गोपिन संग रास विलासा। सबकी पूरण करी अभिलाषा॥ केतिक महा असुर संहार्यो। कंसहि केस पकड़ि दै मार्यो॥ मातपिता की बन्दि छुड़ाई । उग्रसेन कहँ राज दिलाई॥ महि से मृतक छहों सुत लायो। मातु देवकी शोक मिटायो॥ भौमासुर मुर दैत्य संहारी। लाये षट दश सहसकुमारी॥ दै भीमहिं तृण चीर सहारा। जरासिंधु राक्षस कहँ मारा॥ असुर बकासुर आदिक मार्यो। भक्तन के तब कष्ट निवार्यो॥ दीन सुदामा के दुःख टार्यो। तंदुल तीन मूंठ मुख डार्यो॥ प्रेम के साग विदुर घर माँगे। दर्योधन के मेवा त्यागे॥ लखी प्रेम की महिमा भारी। ऐसे श्याम दीन हितकारी॥ भारत के पारथ रथ हाँके। लिये चक्र कर नहिं बल थाके॥ निज गीता के ज्ञान सुनाए। भक्तन हृदय सुधा वर्षाए॥ मीरा थी ऐसी मतवाली। विष पी गई बजाकर ताली॥ राना भेजा साँप पिटारी। शालीग्राम बने बनवारी॥ निज माया तुम विधिहिं दिखायो। उर ते संशय सकल मिटायो॥ तब शत निन्दा करि तत्काला। जीवन मुक्त भयो शिशुपाला॥ जबहिं द्रौपदी टेर लगाई। दीनानाथ लाज अब जाई॥ तुरतहि वसन बने नंदलाला। बढ़े चीर भै अरि मुँह काला॥ अस अनाथ के नाथ कन्हइया। डूबत भंवर बचावइ नइया॥ सुन्दरदास आ उर धारी। दया दृष्टि कीजै बनवारी॥ नाथ सकल मम कुमति निवारो। क्षमहु बेगि अपराध हमारो॥ खोलो पट अब दर्शन दीजै। बोलो कृष्ण कन्हइया की जै॥ दोहा यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारि। अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि॥ यह भी पढ़ें: Ekadashi 2024 June Date: जून में कब कौन सी एकादशी है? जानें पूजा का समय अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।.
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Krishna Chalisa Lyrics: हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस बार ज्येष्ठ माह में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 30 मई को है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि प्रभु की पूजा करने से साधक को जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है। पूजा के दौरान कृष्ण चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए। इससे भगवान श्री कृष्ण प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए पढ़ते हैं कृष्ण चालीसा। यह भी पढ़ें: Buddha Purnima 2024: यहां स्थित है शयन मुद्रा में भगवान बुद्ध की प्रतिमा, जानें इसकी खासियत श्रीकृष्ण चालीसा दोहा बंशी शोभित कर मधुर,नील जलद तन श्याम। अरुण अधर जनु बिम्बा फल,पिताम्बर शुभ साज॥ जय मनमोहन मदन छवि,कृष्णचन्द्र महाराज। करहु कृपा हे रवि तनय,राखहु जन की लाज॥ चौपाई जय यदुनंदन जय जगवंदन। जय वसुदेव देवकी नन्दन॥ जय यशुदा सुत नन्द दुलारे। जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥ जय नटनागर, नाग नथइया॥ कृष्ण कन्हइया धेनु चरइया॥ पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो। आओ दीनन कष्ट निवारो॥ वंशी मधुर अधर धरि टेरौ। होवे पूर्ण विनय यह मेरौ॥ आओ हरि पुनि माखन चाखो। आज लाज भारत की राखो॥ गोल कपोल, चिबुक अरुणारे। मृदु मुस्कान मोहिनी डारे॥ राजित राजिव नयन विशाला। मोर मुकुट वैजन्तीमाला॥ कुंडल श्रवण, पीत पट आछे। कटि किंकिणी काछनी काछे॥ नील जलज सुन्दर तनु सोहे। छबि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे॥ मस्तक तिलक, अलक घुँघराले। आओ कृष्ण बांसुरी वाले॥ करि पय पान, पूतनहि तार्यो। अका बका कागासुर मार्यो॥ मधुवन जलत अगिन जब ज्वाला। भै शीतल लखतहिं नंदलाला॥ सुरपति जब ब्रज चढ़्यो रिसाई। मूसर धार वारि वर्षाई॥ लगत लगत व्रज चहन बहायो। गोवर्धन नख धारि बचायो॥ लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई। मुख मंह चौदह भुवन दिखाई॥ दुष्ट कंस अति उधम मचायो॥ कोटि कमल जब फूल मंगायो॥ नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें। चरण चिह्न दै निर्भय कीन्हें॥ करि गोपिन संग रास विलासा। सबकी पूरण करी अभिलाषा॥ केतिक महा असुर संहार्यो। कंसहि केस पकड़ि दै मार्यो॥ मातपिता की बन्दि छुड़ाई । उग्रसेन कहँ राज दिलाई॥ महि से मृतक छहों सुत लायो। मातु देवकी शोक मिटायो॥ भौमासुर मुर दैत्य संहारी। लाये षट दश सहसकुमारी॥ दै भीमहिं तृण चीर सहारा। जरासिंधु राक्षस कहँ मारा॥ असुर बकासुर आदिक मार्यो। भक्तन के तब कष्ट निवार्यो॥ दीन सुदामा के दुःख टार्यो। तंदुल तीन मूंठ मुख डार्यो॥ प्रेम के साग विदुर घर माँगे। दर्योधन के मेवा त्यागे॥ लखी प्रेम की महिमा भारी। ऐसे श्याम दीन हितकारी॥ भारत के पारथ रथ हाँके। लिये चक्र कर नहिं बल थाके॥ निज गीता के ज्ञान सुनाए। भक्तन हृदय सुधा वर्षाए॥ मीरा थी ऐसी मतवाली। विष पी गई बजाकर ताली॥ राना भेजा साँप पिटारी। शालीग्राम बने बनवारी॥ निज माया तुम विधिहिं दिखायो। उर ते संशय सकल मिटायो॥ तब शत निन्दा करि तत्काला। जीवन मुक्त भयो शिशुपाला॥ जबहिं द्रौपदी टेर लगाई। दीनानाथ लाज अब जाई॥ तुरतहि वसन बने नंदलाला। बढ़े चीर भै अरि मुँह काला॥ अस अनाथ के नाथ कन्हइया। डूबत भंवर बचावइ नइया॥ सुन्दरदास आ उर धारी। दया दृष्टि कीजै बनवारी॥ नाथ सकल मम कुमति निवारो। क्षमहु बेगि अपराध हमारो॥ खोलो पट अब दर्शन दीजै। बोलो कृष्ण कन्हइया की जै॥ दोहा यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारि। अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि॥ यह भी पढ़ें: Ekadashi 2024 June Date: जून में कब कौन सी एकादशी है? जानें पूजा का समय अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
Masik Krishna Puja Masik Krishna Janmashtami Krishna Chalisa Krishna Chalisa In Hindi Krishna Chalisa Lyrics In Hindi Benefits Of Krishna Chalisa Krishna Chalisa Lyrics In Hindi कृष्ण चालीसा कृष्ण चालीसा इन हिंदी कृष्ण चालीसा लिरिक्स इन हिंदी कृष्ण चालीसा के लाभ कृष्ण चालीसा लिरिक्स इन हिंदी When Is Masik Krishna Janmashtami 2024 Masik Krishna Janmashtami 2024 Kab Hai Masik Krishna Janmashtami Date Masik Krishna Janmashtami Puja Vidhi Masik Krishn
United States Latest News, United States Headlines
Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.
Masik Krishna Janmashtami 2024: मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर जरूर करें ये काम, दुख होंगे समाप्तMasik Krishna Janmashtami 2024 हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 01 मई को है। इस विशेष तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-व्रत किया जाता है। इससे भगवान श्री कृष्ण प्रसन्न होते हैं और साधक की मनचाही मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही शुभ फल की प्राप्ति होती...
Read more »
Masik Krishna Janmashtami 2024: मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर जरूर करें इस स्तोत्र का पाठ, जीवन रहेगा खुशहालहर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 01 मई को है। इस विशेष अवसर पर लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना और व्रत करने का विधान है। माना जाता है कि प्रभु की पूजा करने से साधक को भगवान कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है और साथ ही जीवन के संकटों से छुटकारा मिलता...
Read more »
Masik Krishna Janmashtami 2024: भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के समय करें इस चालीसा का पाठ, खुल जाएंगे किस्मत के द्वारMasik Krishna Janmashtami 2024 शास्त्रों में वर्णित है कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ है। अतः हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-उपासना करने से साधक के सकल मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता...
Read more »
Shani Jayanti 2024: शनि जयंती की पूजा में करें ये आरती, जीवन सदैव रहेगा खुशहालहिंदू धर्म में शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है क्योंकि वह व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर ही शुभ या अशुभ परिणाम देते हैं। वैशाख अमावस्या पर शनि जयंती मनाई जाती है। इस बार शनि जयंती आज यानी 08 मई को है। इस दिन विधिपूर्वक से शनिदेव की पूजा की जाती है। साथ ही शनि दोष से छुटकारा पाने के लिए व्रत भी किया जाता...
Read more »
Tulsi Chalisa: गुरुवार को पूजा के समय करें इस चमत्कारी चालीसा का पाठ, मिलेगा मनचाहा वरगुरुवार के दिन विवाहित और अविवाहित महिलाएं भगवान विष्णु के निमित्त गुरुवार का व्रत रखती हैं। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। साथ ही घर में सुख समृद्धि एवं खुशहाली आती है। ज्योतिष भी कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत करने की सलाह देते हैं। कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत रहने से साधक को सभी प्रकार के सांसारिक सुखों की...
Read more »
Masik Durgashtami 2024: मासिक दुर्गाष्टमी पर करें इस चालीसा का पाठ, जीवन सदैव रहेगा खुशहालहर महीने पड़ने वाली मासिक दुर्गाष्टमी का विशेष महत्व है। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार वैशाख माह में मासिक दुर्गाष्टमी 15 मई को है। धार्मिक मान्यता है कि मासिक दुर्गाष्टमी पर मां दुर्गा की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में खुशियों का आगमन होता...
Read more »
